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महिलाओं की बीमारियों के बचाव के उपाय बताए
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
Updated Sat, 31 Oct 2015 12:46 AM IST
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उप्र ग्रामीण आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान (रिम्स) के सेमिनार हाल में गुरुवार को महिला स्वास्थ्य एवं रजोनिवृत्ति मेनोपॉज से जुड़ी समस्याओं एवं उनके बचाव पर कार्यशाला हुई। कार्यशाला का आयोजन इंटरनेशनल मेनोपॉज सोसाइटी व इंडियन मेनोपॉज सोसाइटी के सहयोग से किया गया।
कार्यशाला में जाने-माने स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों ने महिलाओं से संबंधित बीमारियों से बचाव के उपाय बताए।
कार्यशाला में डॉ. शिखा सेठ ने बताया कि रजोनिवृत्ति से जुड़ी समस्याओं व उनके बचाव के उपायों का प्रचार करने के लिए विश्व रजोनिवृत्ति दिवस मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि रजोनिवृत्ति से प्रत्येक महिला को एक निश्चित उम्र के दौरान गुजरना पड़ता है। उम्र के 46वें तथा 47वें वर्ष में यह अवस्था आती है, जिसमें मासिक स्राव बंद हो जाता है। इस दौरान महिलाओं में व्यापक मानसिक एवं शारीरिक बदलाव आता है।
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नींद में कठिनाई, जोड़ों में दर्द एवं मांसपेशियों में जकड़न, सिरदर्द एवं चक्कर आना, चिड़चिड़ापन, अवसाद, बेचैनी, चिंता, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, शरीर का फूलना, पाचन में परेशानी आदि समस्या आती है। इन समस्याओं में चिकित्सक की सलाह से तथा सही खानपान से निजात पाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इस दौरान विशेष आहार की जरूरत नहीं पड़ती है बल्कि जैतून के तेल (ऑलिव आयल) और एंटीऑक्सीडेंट युक्त प्राकृतिक आहार, जिसमें फल, हरी सब्जियां, साबूत अनाज, दूध, सोयाबीन, मछली आदि का सेवन लाभदायक है। साथ ही रजोनिवृत्ति के दौरान महिलाओं को अकेलेपन से बचना चाहिए।
विशेष परिस्थिति में चिकित्सक की सलाह पर रजोनिवृत्ति हार्मोन थेरेपी को चुना जा सकता है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. (ब्रिगे) एसके गुप्ता व स्त्री एवं प्रसूति रोग की विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण नागरथ ने बताया कि रजोनिवृत्ति तथा महिलाओं से संबंधित अन्य बीमारियों एवं काउंसिलिंग के लिए ओपीडी के कमरा नं 11 में विशेष क्लीनिक खोला गया है।
प्रत्येक शुक्रवार को इसमें विशेषज्ञ चिकित्सक महिलाओं का उपचार करेंगे। साथ ही यह भी बताया कि महिलाओं को नियमित रूप से वर्ष में कम से कम एक बार गर्भाशय एवं सर्विक्स के कैंसर की जांच अवश्य करानी चाहिए। कार्यशाला को डीन प्रो. केएम शुक्ला, डॉ. रजनी रावत, डॉ. प्रिया शर्मा, डॉ. कल्पना, डॉ. वैभव, डॉ. ममता, डॉ. नीलम व डॉ. प्रियंका आदि ने संबोधित किया।
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कार्यशाला में जाने-माने स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों ने महिलाओं से संबंधित बीमारियों से बचाव के उपाय बताए।
कार्यशाला में डॉ. शिखा सेठ ने बताया कि रजोनिवृत्ति से जुड़ी समस्याओं व उनके बचाव के उपायों का प्रचार करने के लिए विश्व रजोनिवृत्ति दिवस मनाया जाता है।
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उन्होंने कहा कि रजोनिवृत्ति से प्रत्येक महिला को एक निश्चित उम्र के दौरान गुजरना पड़ता है। उम्र के 46वें तथा 47वें वर्ष में यह अवस्था आती है, जिसमें मासिक स्राव बंद हो जाता है। इस दौरान महिलाओं में व्यापक मानसिक एवं शारीरिक बदलाव आता है।
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नींद में कठिनाई, जोड़ों में दर्द एवं मांसपेशियों में जकड़न, सिरदर्द एवं चक्कर आना, चिड़चिड़ापन, अवसाद, बेचैनी, चिंता, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, शरीर का फूलना, पाचन में परेशानी आदि समस्या आती है। इन समस्याओं में चिकित्सक की सलाह से तथा सही खानपान से निजात पाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इस दौरान विशेष आहार की जरूरत नहीं पड़ती है बल्कि जैतून के तेल (ऑलिव आयल) और एंटीऑक्सीडेंट युक्त प्राकृतिक आहार, जिसमें फल, हरी सब्जियां, साबूत अनाज, दूध, सोयाबीन, मछली आदि का सेवन लाभदायक है। साथ ही रजोनिवृत्ति के दौरान महिलाओं को अकेलेपन से बचना चाहिए।
विशेष परिस्थिति में चिकित्सक की सलाह पर रजोनिवृत्ति हार्मोन थेरेपी को चुना जा सकता है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. (ब्रिगे) एसके गुप्ता व स्त्री एवं प्रसूति रोग की विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण नागरथ ने बताया कि रजोनिवृत्ति तथा महिलाओं से संबंधित अन्य बीमारियों एवं काउंसिलिंग के लिए ओपीडी के कमरा नं 11 में विशेष क्लीनिक खोला गया है।
प्रत्येक शुक्रवार को इसमें विशेषज्ञ चिकित्सक महिलाओं का उपचार करेंगे। साथ ही यह भी बताया कि महिलाओं को नियमित रूप से वर्ष में कम से कम एक बार गर्भाशय एवं सर्विक्स के कैंसर की जांच अवश्य करानी चाहिए। कार्यशाला को डीन प्रो. केएम शुक्ला, डॉ. रजनी रावत, डॉ. प्रिया शर्मा, डॉ. कल्पना, डॉ. वैभव, डॉ. ममता, डॉ. नीलम व डॉ. प्रियंका आदि ने संबोधित किया।