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पचनद को पर्यटन हब बनाने की उम्मीद फिर टूटी
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पांच नदियों के संगम पचनद पर बांध परियोजना के साथ बीहड़ क्षेत्र के विकास का सपना वर्ष 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देखा था। इसके बाद सरकारें आईं और कार्यकाल पूरा करके चली गईं। तीन बार जिले से मुख्यमंत्री बने, लेकिन पचनद अपने हाल पर ही रहा। इस बार सरकार ने जिले के सांसद डॉ राम शंकर कठेरिया के प्रस्ताव पर पचनद बांध परियोजना को बजट में स्थान देते हुए 100 करोड़ रुपये की स्वीकृति की है।
सांसद डॉ. रामशंकर कठेरिया का कहना है कि इस परियोजना के लिए उन्होंने केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार तक प्रस्ताव भेेजा था। इसमें पचनद पर डैम बनाने और सुंदरीकरण का कार्य करवाया जाना है। उनका कहना है कि पचनद के आसपास कई जिले के इलाके बीहड़ से जुड़े हैं। यहां सिंचाई का साधन न होने से बड़े भू-भाग पर असिंचित फसले ही उगाई जा रही है। इससे छोटे और सीमांत किसानों की माली हालत में कोई सुुधार नहीं हो पा रहा है। कृषि का असवर न होने की वजह से इस इलाके के किसान पशुपालन पर ही निर्भर हैं। इस परियोजना से बुंदेलखंड, कानपुर देहात, औरैया और जालौन की लगभग 6100 हैक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि इस योजना से इटावा ही नहीं औरैया, जालौन, कानपुर देहात के लोगों को भी सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। यहां एक स्थान पर गिरने वाली पांच नदियां यमुना, चंबल, सिंध, क्वारी और पहुंज का संगम स्थल काफी बड़े क्षेत्रफल में होने के कारण पानी बर्बाद होता है। सड़रापुर गांव में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वर्ष 1976 में जनता की मांग पर बांध बनाने की घोषणा की थी। 45 वर्ष बीत जाने के बाद भी किसी ने इसकी सुध नहीं ली। भाजपा सरकार ने जनहित में यह काम कराने की शुरुआत की है। बांध परियोजना से क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा। इससे सिंचाई के अलावा मत्स्य पालन और परिवहन को विस्तार मिलेेगा। डैम बनने से यहां बिजली उत्पादन करने का अवसर खुलेगा जो जिले के विकास के साथ यहां के लोगों के लिए रोजगार का एक बड़ा रास्ता तैयार करेगा।
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पचनद को पर्यटन हब बनाने की उम्मीद फिर टूटी
चकरनगर। पचनद के पर्यटन हब बनने की उम्मीद एक बार फिर टूट गई। धार्मिक पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पांच नदियों के संगम का एक मात्र स्थल पचनद क्षेत्र में पर्यटन के नाम पर बजट में कोई स्थान नही मिला है। नैमिशारण्य, अयोध्या और चित्रकूट को धर्मनगरी मानते हुए प्रदेश सरकार ने तमाम योजनाएं घोषित की। परंतु पचनद का हाथ खाली ही रहा। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि पचनद पर विकास के लिए दशकों से राजनीतिक दल चुुनावी मुद्दा बनाते हैं। किसी ने दो कमरे बनवा कर गेस्ट हाउस का खाका खींच दिया तो किसी ने सीढ़ियां बनवा कर अपना मुंह फेर लिया। तहसील मुख्यालय चकरनगर से 25 किलोमीटर दूरी पर स्थित यमुना, चंबल, जमुना सिंध पहुंज पांच नदियों का महासंगम पचनद कहलाता है।
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सांसद डॉ. रामशंकर कठेरिया का कहना है कि इस परियोजना के लिए उन्होंने केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार तक प्रस्ताव भेेजा था। इसमें पचनद पर डैम बनाने और सुंदरीकरण का कार्य करवाया जाना है। उनका कहना है कि पचनद के आसपास कई जिले के इलाके बीहड़ से जुड़े हैं। यहां सिंचाई का साधन न होने से बड़े भू-भाग पर असिंचित फसले ही उगाई जा रही है। इससे छोटे और सीमांत किसानों की माली हालत में कोई सुुधार नहीं हो पा रहा है। कृषि का असवर न होने की वजह से इस इलाके के किसान पशुपालन पर ही निर्भर हैं। इस परियोजना से बुंदेलखंड, कानपुर देहात, औरैया और जालौन की लगभग 6100 हैक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित किया जा सकेगा।
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उन्होंने कहा कि इस योजना से इटावा ही नहीं औरैया, जालौन, कानपुर देहात के लोगों को भी सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। यहां एक स्थान पर गिरने वाली पांच नदियां यमुना, चंबल, सिंध, क्वारी और पहुंज का संगम स्थल काफी बड़े क्षेत्रफल में होने के कारण पानी बर्बाद होता है। सड़रापुर गांव में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वर्ष 1976 में जनता की मांग पर बांध बनाने की घोषणा की थी। 45 वर्ष बीत जाने के बाद भी किसी ने इसकी सुध नहीं ली। भाजपा सरकार ने जनहित में यह काम कराने की शुरुआत की है। बांध परियोजना से क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा। इससे सिंचाई के अलावा मत्स्य पालन और परिवहन को विस्तार मिलेेगा। डैम बनने से यहां बिजली उत्पादन करने का अवसर खुलेगा जो जिले के विकास के साथ यहां के लोगों के लिए रोजगार का एक बड़ा रास्ता तैयार करेगा।
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पचनद को पर्यटन हब बनाने की उम्मीद फिर टूटी
चकरनगर। पचनद के पर्यटन हब बनने की उम्मीद एक बार फिर टूट गई। धार्मिक पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पांच नदियों के संगम का एक मात्र स्थल पचनद क्षेत्र में पर्यटन के नाम पर बजट में कोई स्थान नही मिला है। नैमिशारण्य, अयोध्या और चित्रकूट को धर्मनगरी मानते हुए प्रदेश सरकार ने तमाम योजनाएं घोषित की। परंतु पचनद का हाथ खाली ही रहा। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि पचनद पर विकास के लिए दशकों से राजनीतिक दल चुुनावी मुद्दा बनाते हैं। किसी ने दो कमरे बनवा कर गेस्ट हाउस का खाका खींच दिया तो किसी ने सीढ़ियां बनवा कर अपना मुंह फेर लिया। तहसील मुख्यालय चकरनगर से 25 किलोमीटर दूरी पर स्थित यमुना, चंबल, जमुना सिंध पहुंज पांच नदियों का महासंगम पचनद कहलाता है।