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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etawah News ›   On the first day: Mother Shailpurutari's grace year, Shakespeare engaged in temples

प्रथम दिन: मां शैलपुत्री की बरसी कृपा, मंदिरों में लगे जयकारे

Thu, 21 Sep 2017 11:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा Updated Thu, 21 Sep 2017 11:36 PM IST
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On the first day: Mother Shailpurutari's grace year, Shakespeare engaged in temples
कालीबांह मंदिर में स्थापित महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की प्रतिमाएं। - फोटो : amarujala

इटावा। मां की कृपा जब होती है तो भक्तों के सारे कष्ट मिट जाते हैं। ऐसा ही शारदीय नवरात्र के पहले दिन गुरुवार को देखने को मिला। जब श्रद्धालु माता के दर्शन को सुबह से लंबी कतारों में लगे थे, मौसम भी उनका साथ दे रहा था। बदली के बाद रिमझिम फुहारों के बीच भक्त उत्साहित होकर मैया के जयकारे लगाते रहे।  

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दोपहर में हुई तेज बारिश ने गर्मी से परेशान लोगों को राहत दी। क्वार में पड़ने वाली नवरात्र को शारदीय नवरात्र कहा जाता है, लेकिन जिस तरह से दो दिन पहले तक तेज धूप और गर्मी पड़ रही थी, उससे ये चैत्र नवरात्र जैसी स्थिति ज्यादा नजर आ रही थी। यह माता का चमत्कार ही रहा कि सुबह मौसम सुहावना होने के साथ पहले रिमझिम फिर दोपहर में तेज बारिश से मौसम खुशगवार हो गया। सभी यह कहने लगे बारिश नहीं माता रानी की कृपा बरस रही है।
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कालीबांह में तड़के मंदिर पहुंचे भक्त
शहर के देवी भक्तों की आस्था का केंद्र कालीबांह मंदिर में आरती में शामिल होने भक्त तड़के ही जा पहुंचे। यहां सुबह तीन बजे से आरती होती है। इस दौरान मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ बढ़ती रही।
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माता के नौ रूपों के होते हैं दर्शन
ग्वालियर रोड स्थित श्रीशिव शक्तिधाम ऐसा मंदिर है, जहां देवी के नौ रूपों के दर्शन होते हैं। दो साल पहले बने इस मंदिर में लोग नवरात्र में जरूर पहुंचते हैं। मंदिर कालीबाड़ी मंदिर के पीछे स्थित है।  

संप्रदाय व समाज के लिए प्रेरक है मां कालिका मंदिर
मंदिर भारत ही नहीं दुनियां के किसी भी देश में संप्रदाय और समाज के लिए प्रेरक कहा जा सकता है। कस्बे से मात्र तीन किमी दूर लखना में स्थापित मंदिर इस गौरवशाली विरासत के साथ केवल जिले ही नहीं बल्कि देश और प्रदेश में अपनी विशिष्ट ख्याति रखता है। इस मंदिर में दलित पुजारी है। यह व्यवस्था आज की नहीं है बल्कि अत्यंत प्राचीन है।

सैयद बाबा की दर्शन बगैर पूजा रहती अधूरी
मंदिर परिसर के बाहर सैयद बाबा की मजार है। मां की पूजा के बाद बाबा की मजार पर मत्था टेकना आवश्यक है। लोगों का कहना है कि सैयद बाबा भक्तों के प्रति बड़े उदार हैं। इनसे जो मांगों वह मिलता है।


चाक चौबंद व्यवस्थाएं
लखना राज रविशंकर शुक्ल व कृष्ण शंकर शुक्ल का कहना है कि मंदिर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्के लिए कार्यवाहक थानाध्यक्ष नीरज शर्मा, थानाध्यक्ष बिठौली विनोद यादव व चौकी प्रभारी लखना सुनील गौतम अन्य थानों के फोर्स के साथ तैनात हैं।

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