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‘भाजपा का विपक्ष तो अकेले ओमप्रकाश राजभर’

Thu, 15 Nov 2018 11:57 PM IST
अमर उजाला, इटावा
अमर उजाला, इटावा Updated Thu, 15 Nov 2018 11:57 PM IST
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omprakash rajbhar in etawah
वार्ता करते कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर व रमाकांत कश्यप। अमर उजाला - फोटो : amar ujala
प्रदेश के दिव्यांगजन सशक्तीकरण मंत्री एवं सुहेल देव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने गुरुवार को कहा कि प्रदेश सरकार के सामाने कोई भी विपक्ष नहीं है। सपा-बसपा और कांग्रेस मौन है। भाजपा का विपक्ष तो अकेले ओमप्रकाश राजभर है।
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यशोदानगर स्थित महर्षि कश्यप निषाद फाउंडेशन व अति पिछड़ा अति दलित वर्ग उत्थान समिति की ओर से आयोजित सामाजिक प्रतिनिधि सम्मेलन में भाग लेने आए ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा पर जमकर कटाक्ष किए। कहा कि चुनाव आते ही मंदिर मुद्दा गरमाने लगता है।
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चुनाव के बाद सब मामला शांत हो जाता है। देश संविधान से चलता है और मंदिर विवाद अदालत में चल रहा है। कोर्ट का फैसला ही अंतिम निर्णय होगा। उन्होंने कहा कि कुछ भाजपाई नेता ठेकेदार हैं। वे समाज को धोखा दे रहे हैं। कई नेताओं के भाषण सुने हैं। इससे ऐसा लगता है कि वे अपने क्षेत्र को झोले में रखते हैं।
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 प्रदेश सरकार के जिलों के नाम बदलने पर कहा कि नाम बदलने से कुछ नहीं होता बल्कि जरूरत है तकनीकी शिक्षा और रोजगार मिले। प्रदेश में 1 लाख 59 हजार प्राथमिक विद्यालय हैं जिनमें 1 लाख 77 हजार बच्चे पढ़ते हैं। लेकिन प्राइमरी स्तर की शिक्षा की हालत नाजुक है। वे चाहते हैं कि प्राथमिक विद्यालय में तकनीकि शिक्षा लागू की जाए। कक्षा चार से रोजगार परक शिक्षा दी जाए। जिसमें एक विषय को पढ़ना अनिवार्य किया जाए। कैबिनेट में अकेले ही वह इसमें सुधार के लिए प्रयास कर रहे हैं।

मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने एक बड़ी बात यह भी कही कि भारत में भाग्यवाद तथा चीन में विज्ञान वाद की वजह से ही चीन का माल भारत में बिक रहा है। इसकी वजह से बेरोजगारी बढ़ी है। चीन का लाइसेंस रद्द करने से युवाओं को रोजगार मिलने लगेगा। वह इसके लिए प्रदेश में लोगों को जगाने का कार्य कर रहे हैं कि जागोगे तभी सवेरा होगा।  


ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि प्रदेश में उनकी पार्टी का भाजपा से समझौता है। लोकसभा चुनाव भी भाजपा के साथ मिलकर लड़ेंगे। चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। दोनों पार्टियों के नेता साथ में हैं।  


सपा के गढ़ के सवाल पर ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि इटावा किसी पार्टी का गढ़ नहीं है। अखिलेश और मुलायम सिंह दोनों मुख्यमंत्री रहे हैं। वे एक जिले के मुख्यमंत्री नहीं थे। पूरे प्रदेश के मुख्यमंत्री थे।



ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि  भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रदेश के मुख्यमंत्री अदित्यनाथ योगी के साथ मुलाकात करके प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव असुरक्षित हो गए हैं। अगर उन्होंने दूसरी पार्टी बना ली थी तो भाजपा से मिलना नहीं चाहिये था। इससे उनका ही नुकसान होगा। भाजपा का कुछ भी नहीं बिगड़ेगा।
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