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सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट पर अनदेखी का ग्रहण
ब्यूरो/ अमर उजाला, इटावा
Updated Sat, 05 Sep 2015 11:43 PM IST
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मुख्यालय स्थिति लॉयन सफारी को देखने के लिये आने वाले पर्यटकों को सारस पक्षी विहार की ओर आकर्षित करने के लिए सरसईनावर में पचास लाख रुपये की लागत से बनाया गया ईको पर्यटन गेस्ट हाउस अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल सारस पक्षी विहार के ईको पर्यटन गेस्ट हाउस के गेट पर लटका ताला, जगह-जगह भरा पानी और जहां-तहां उगी झाड़ियों का नजारा किसी वीराने के समान नजर आता है।
निर्माण एजेंसी आवास विकास परिषद ने छह महीने पहले ईको पर्यटक गेस्ट का भवन तैयार किया था, लेकिन देख रेख के अभाव ये दुर्दशाग्रस्त हो गया। सारस पक्षी विहार आने वाले पर्यटकों को निराशा ही हाथ लगती है।
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स्थानीय लोगों ने बताया कि गेस्ट हाउस में आज तक उन्होंने किसी पर्यटक को आते-जाते नहीं देखा। सारस पक्षी विहार के विकास को लेकर तत्कालीन जिलाधिकारी विद्याभूषण ने गेस्ट हाउस को विकसित करने व सुविधाएं उपलब्ध करवाने में विशेष रुचि दिखाई थी।
पर्यटक सुशील यादव का कहना है कि गेस्ट हाउस में ताला लगा हुआ है, जगह-जगह झाड़ियां उग आई हैं। राष्ट्रपति पदक से सम्मानित शिक्षक अभिलाख सिंह यादव का कहना है कि पर्यटकों के लिये कैंटीन खोलने की भी योजना बनाई गई थी, लेकिन यह आज तक खोली ही नहीं गई।
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल सारस पक्षी विहार के ईको पर्यटन गेस्ट हाउस के गेट पर लटका ताला, जगह-जगह भरा पानी और जहां-तहां उगी झाड़ियों का नजारा किसी वीराने के समान नजर आता है।
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निर्माण एजेंसी आवास विकास परिषद ने छह महीने पहले ईको पर्यटक गेस्ट का भवन तैयार किया था, लेकिन देख रेख के अभाव ये दुर्दशाग्रस्त हो गया। सारस पक्षी विहार आने वाले पर्यटकों को निराशा ही हाथ लगती है।
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स्थानीय लोगों ने बताया कि गेस्ट हाउस में आज तक उन्होंने किसी पर्यटक को आते-जाते नहीं देखा। सारस पक्षी विहार के विकास को लेकर तत्कालीन जिलाधिकारी विद्याभूषण ने गेस्ट हाउस को विकसित करने व सुविधाएं उपलब्ध करवाने में विशेष रुचि दिखाई थी।
पर्यटक सुशील यादव का कहना है कि गेस्ट हाउस में ताला लगा हुआ है, जगह-जगह झाड़ियां उग आई हैं। राष्ट्रपति पदक से सम्मानित शिक्षक अभिलाख सिंह यादव का कहना है कि पर्यटकों के लिये कैंटीन खोलने की भी योजना बनाई गई थी, लेकिन यह आज तक खोली ही नहीं गई।