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Etawah News: मानकों का नहीं हिसाब, मनमानी कर दे रहे कॉपी-किताब
Thu, 30 Mar 2023 12:37 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Thu, 30 Mar 2023 12:37 AM IST
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इटावा। कॉपी-किताबों को लेकर निजी स्कूलों की मनमानी फिर शुरू हो गई है। मानकों को दरकिनार कर अभिभावकों को किसी एक प्रकाशन की पुस्तकें और कॉपियां एक निश्चित दुकान से लेने की लिस्ट थमा दी गई है। जबकि नियम एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई का है। कुछ अभिभावकों ने इस संबंध में डीएम और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम सदर को सौंपा है। एसडीएम ने डीआईओएस को जांच के आदेश दिए हैं।
वर्ष 2023-24 सत्र के लिए जिले के लगभग सभी निजी स्कूलों में दाखिले शुरू हो गए है। एक अप्रैल से नया सत्र शुरू होना है। ऐसे में अभिभावक छात्र-छात्राओं के लिए किताब-कॉपियां खरीदने में लगे हैं। शासन के आदेशों के बावजूद शहर के कुछ निजी स्कूलों में एक फर्म को ठेका देकर अभिभावकों की जेब काटी जा रही है। सूची में कवर चढ़ाने के लिए आने वाले रोल और स्टीकर भी फर्म का लेने का दबाव है।
एनसीईआरटी हिंदी और अंग्रेजी व्याकरण के अलावा कंप्यूटर व सामान्य ज्ञान की किताबें प्रकाशित नहीं करता है। इनके अलावा सभी किताबें एनसीईआरटी की होनी चाहिए। लेकिन ज्यादातर निजी स्कूल इन नियमों को ताक पर रखे हैं। किताबें प्राइवेट पब्लिकेशन की हैं, जो मनमाने दामों पर बेची जा रही हैं।
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यही नहीं, आदेश है कि विद्यालय तीन साल तक किताबों को बदल नहीं सकते हैं। ऐसे में अभिभावक यदि पुरानी किताबें लेता है और उसे एक-दो विषयों की किताबों की जरूरत पड़ती है तो दुकानदार पूरा सेट लेने का दबाव बनाकर पुस्तकें देने से मना कर देते हैं।
एक-दो नहीं, पूरा सेट लो
शहर के फ्रेंड्स कॉलोनी निवासी धर्मेंद्र कुमार ने डीएम और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम सदर को दिया है। इसमें बताया कि उनके घर के बच्चे शहर के एक प्रतिष्ठित स्कूल में पांचवीं और सातवीं कक्षा में पढ़ रहे हैं। दोनों बच्चों के लिए कुछ किताबें एक जानने वालों से ली हैं। अन्य किताबों को स्कूल से बताई दुकान पर लेने गए तो दुकानदार ने कहा कि कॉपी, किताब का पूरा सेट ही लेना पड़ेगा। मजबूरी में 7000 और 6500 रुपये का सेट लेना पड़ा।
दूसरी दुकानों पर नहीं मिल रहीं कॉपी-किताबें
शहर के नौरंगाबाद निवासी अब्दुल वाहिद ने बताया कि उनका बच्चा शहर के एक नामी स्कूल में कक्षा एक में पढ़ता है। स्कूलों में कॉपी-किताबें कंपनी के लोगों ने एमआरपी पर बेचीं। लगा कि बाहर दुकानों पर कुछ छूट पर किताबें मिल जाएंगी, पर ऐसा नहीं हुआ। कई दुकानदारों के पास किताबें नहीं हैं। जिनके पास हैं, उनका कहना है कि कंपनी के अनुसार पूरा सेट एमआरपी पर ही लेना पड़ेगा। एक-दो किताबें नहीं मिलेंगी।
बाहर सस्ते में मिल रहे कॉपियां और कवर रोल
साबितगंज निवासी मोहम्मद फारिक ने बताया कि उनका बच्चा शहर के एक विद्यालय में कक्षा में एक पढ़ता है। स्कूल की ओर से जारी किए गए पाठ्यक्रम में किताबों के साथ ही कॉपियां और कवर रोल भी एक ही कंपनी की खरीदने की बाध्यता है। जबकि बाजार में कम दामों पर उक्त कंपनी की गुणवत्ता से बेहतर काॅपियां और कवर रोल कम दामों पर मिल रहे हैं।
इस तरह चल रहा खेल
शहर के एक निजी स्कूल में पहली कक्षा के लिए कॉपी-किताबों का सेट 4900 रुपये, दूसरी के लिए 5200, तीसरी के लिए 5500, चौथी की 6000, पांचवीं की साढ़े छह हजार, सातवीं और आठवीं कक्षा की पुस्तकों का सेट सात हजार रुपये में दिया जा रहा है। निश्चित पब्लिकेशन की 120 पेज की जो कॉपी बाजार में 90 रुपये की है, उससे अच्छी अन्य कॉपी 60 रुपये की मिल रही है। वहीं कवर रोल निश्चित कंपनी का लगभग 250 रुपये एमआरपी पर विद्यालय की ओर से उपलब्ध कराया जा रहा है। अन्य दुकानों पर यह 100 रुपये का है। दुकानदारों की मानें तो हर कंपनी दुकानदार को 10 प्रतिशत तक छूट देने के लिए सहमत होती है।
- कुछ निजी स्कूलों की मनमानी की शिकायत मिली है। शिकायतकर्ता ने बताया कि एक निश्चित पब्लिकेशन की कॉपी-किताबों को अधिक दामों पर बिकवाकर अभिभावकों का शोषण किया जा रहा है। डीआईओएस को जांच के लिए निर्देशित किया गया है। ऐसे निजी स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - विक्रम राघव, एसडीएम सदर।
- निजी स्कूलों की मनमानी की जानकारी हुई है। इसकी जांच की जाएगी। जिस भी स्कूल में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अभिभावकों का शोषण नहीं होने दिया जाएगा। - राजू राणा, डीआईओएस।
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वर्ष 2023-24 सत्र के लिए जिले के लगभग सभी निजी स्कूलों में दाखिले शुरू हो गए है। एक अप्रैल से नया सत्र शुरू होना है। ऐसे में अभिभावक छात्र-छात्राओं के लिए किताब-कॉपियां खरीदने में लगे हैं। शासन के आदेशों के बावजूद शहर के कुछ निजी स्कूलों में एक फर्म को ठेका देकर अभिभावकों की जेब काटी जा रही है। सूची में कवर चढ़ाने के लिए आने वाले रोल और स्टीकर भी फर्म का लेने का दबाव है।
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एनसीईआरटी हिंदी और अंग्रेजी व्याकरण के अलावा कंप्यूटर व सामान्य ज्ञान की किताबें प्रकाशित नहीं करता है। इनके अलावा सभी किताबें एनसीईआरटी की होनी चाहिए। लेकिन ज्यादातर निजी स्कूल इन नियमों को ताक पर रखे हैं। किताबें प्राइवेट पब्लिकेशन की हैं, जो मनमाने दामों पर बेची जा रही हैं।
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यही नहीं, आदेश है कि विद्यालय तीन साल तक किताबों को बदल नहीं सकते हैं। ऐसे में अभिभावक यदि पुरानी किताबें लेता है और उसे एक-दो विषयों की किताबों की जरूरत पड़ती है तो दुकानदार पूरा सेट लेने का दबाव बनाकर पुस्तकें देने से मना कर देते हैं।
एक-दो नहीं, पूरा सेट लो
शहर के फ्रेंड्स कॉलोनी निवासी धर्मेंद्र कुमार ने डीएम और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम सदर को दिया है। इसमें बताया कि उनके घर के बच्चे शहर के एक प्रतिष्ठित स्कूल में पांचवीं और सातवीं कक्षा में पढ़ रहे हैं। दोनों बच्चों के लिए कुछ किताबें एक जानने वालों से ली हैं। अन्य किताबों को स्कूल से बताई दुकान पर लेने गए तो दुकानदार ने कहा कि कॉपी, किताब का पूरा सेट ही लेना पड़ेगा। मजबूरी में 7000 और 6500 रुपये का सेट लेना पड़ा।
दूसरी दुकानों पर नहीं मिल रहीं कॉपी-किताबें
शहर के नौरंगाबाद निवासी अब्दुल वाहिद ने बताया कि उनका बच्चा शहर के एक नामी स्कूल में कक्षा एक में पढ़ता है। स्कूलों में कॉपी-किताबें कंपनी के लोगों ने एमआरपी पर बेचीं। लगा कि बाहर दुकानों पर कुछ छूट पर किताबें मिल जाएंगी, पर ऐसा नहीं हुआ। कई दुकानदारों के पास किताबें नहीं हैं। जिनके पास हैं, उनका कहना है कि कंपनी के अनुसार पूरा सेट एमआरपी पर ही लेना पड़ेगा। एक-दो किताबें नहीं मिलेंगी।
बाहर सस्ते में मिल रहे कॉपियां और कवर रोल
साबितगंज निवासी मोहम्मद फारिक ने बताया कि उनका बच्चा शहर के एक विद्यालय में कक्षा में एक पढ़ता है। स्कूल की ओर से जारी किए गए पाठ्यक्रम में किताबों के साथ ही कॉपियां और कवर रोल भी एक ही कंपनी की खरीदने की बाध्यता है। जबकि बाजार में कम दामों पर उक्त कंपनी की गुणवत्ता से बेहतर काॅपियां और कवर रोल कम दामों पर मिल रहे हैं।
इस तरह चल रहा खेल
शहर के एक निजी स्कूल में पहली कक्षा के लिए कॉपी-किताबों का सेट 4900 रुपये, दूसरी के लिए 5200, तीसरी के लिए 5500, चौथी की 6000, पांचवीं की साढ़े छह हजार, सातवीं और आठवीं कक्षा की पुस्तकों का सेट सात हजार रुपये में दिया जा रहा है। निश्चित पब्लिकेशन की 120 पेज की जो कॉपी बाजार में 90 रुपये की है, उससे अच्छी अन्य कॉपी 60 रुपये की मिल रही है। वहीं कवर रोल निश्चित कंपनी का लगभग 250 रुपये एमआरपी पर विद्यालय की ओर से उपलब्ध कराया जा रहा है। अन्य दुकानों पर यह 100 रुपये का है। दुकानदारों की मानें तो हर कंपनी दुकानदार को 10 प्रतिशत तक छूट देने के लिए सहमत होती है।
- कुछ निजी स्कूलों की मनमानी की शिकायत मिली है। शिकायतकर्ता ने बताया कि एक निश्चित पब्लिकेशन की कॉपी-किताबों को अधिक दामों पर बिकवाकर अभिभावकों का शोषण किया जा रहा है। डीआईओएस को जांच के लिए निर्देशित किया गया है। ऐसे निजी स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - विक्रम राघव, एसडीएम सदर।
- निजी स्कूलों की मनमानी की जानकारी हुई है। इसकी जांच की जाएगी। जिस भी स्कूल में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अभिभावकों का शोषण नहीं होने दिया जाएगा। - राजू राणा, डीआईओएस।