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Etawah News: नाम की मेडिकल यूनिट, सीएचसी जैसी सुविधा भी नहीं
Tue, 09 May 2023 12:41 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Tue, 09 May 2023 12:41 AM IST
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इटावा। नौ वर्ष पूर्व पचराहा में 50 बेड की मेडिकल केयर यूनिट (एमसीयू) 35 हजार की आबादी को सुविधा देने के लिए शुरू की गई थी। उम्मीद थी कि उन्हें रात में इमरजेंसी होने पर तीन किलोमीटर दूर जिला अस्पताल नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन डॉक्टरों व संसाधनों के अभाव में अस्पताल में अभी तक एक भी मरीज भर्ती नहीं हो सका। कुल मिलाकर एमसीयू की स्थिति सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से भी खराब है। ऊपर से पेयजल संकट अलग से है। शौचालय तक चोक पड़ी है।
525.78 लाख रुपये से वर्ष 2013 में बनकर तैयार हुई मेडिकल केयर यूनिट में 39 कर्मियों के स्टाफ की स्वीकृति मिली थी। ओपीडी में 18 कमरे हैं। इनमें तीन में आयुर्वेद ओपीडी, तीन पर होम्योपैथी विभाग, एक-एक में आर्थो सर्जन, प्लास्टर रूम,नेत्र रोग कक्ष, दवा वितरण व अन्य कार्यों के लिए खुल रहते हैं। शेष छह लगभग खाली हैं।
अस्पताल में फिजियोथैरेपी का सामान धूल फांक रहा है। नेत्र चिकित्सक हैं लेकिन संसाधन नहीं। लैब टेक्निशियन हैं लेकिन पैथोलॉजी का अता पता नहीं है। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट, दंत चिकित्सक, कम से कम दो स्त्री रोग चिकित्सक होने चाहिए लेकिन यह नहीं हैं। एक्सरे कराने की सुविधा तक नहीं है। आर्थो सर्जन कक्ष में ताला लटका रहता है।
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इनसे चलाया जा रहा काम
इस समय एक-एक फिजिशियन, नेत्र रोग, बाल रोग चिकित्सक के साथ हड्डी रोग विशेषज्ञ सप्ताह में तीन दिन जिला अस्पताल से आकर बैठते हैं। जबकि दो फार्मासिस्ट व एक वार्ड ब्वॉय नियमित हैं। जबकि आउटसोर्स पर दो वार्ड आया, एक-एक वार्ड ब्वॉय माली व चौकीदार तथा तीन सफाई कर्मी शामिल हैं। रोजाना होम्योपैथी व आयुर्वेदिक की कुल मिलाकर करीब 200 से अधिक मरीजों की ओपीडी होती है।
अस्पताल में शौचालय तीन साल से जाम है। फार्मासिस्ट गजेंद्र सिंह भदौरिया ने बताया कि इस बारे में कई बार सीएमओ को पत्र लिख चुके हैं। पानी की समस्या के बारे में बताया कि सबमर्सिबल का पाइप टूटा है। नगर पालिका को वाटर कूलर लगवाने के लिए भी पत्र लिख चुके हैं।
मेडिकल केयर यूनिट को शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है। डॉक्टर मिल नहीं पा रहे हैं। इस संबंध में कई बार शासन को पत्र लिख चुके हैं। अन्य समस्याओं को भी जल्द दूर कराया जाएगा। - डॉ. गीताराम, सीएमओ
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525.78 लाख रुपये से वर्ष 2013 में बनकर तैयार हुई मेडिकल केयर यूनिट में 39 कर्मियों के स्टाफ की स्वीकृति मिली थी। ओपीडी में 18 कमरे हैं। इनमें तीन में आयुर्वेद ओपीडी, तीन पर होम्योपैथी विभाग, एक-एक में आर्थो सर्जन, प्लास्टर रूम,नेत्र रोग कक्ष, दवा वितरण व अन्य कार्यों के लिए खुल रहते हैं। शेष छह लगभग खाली हैं।
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अस्पताल में फिजियोथैरेपी का सामान धूल फांक रहा है। नेत्र चिकित्सक हैं लेकिन संसाधन नहीं। लैब टेक्निशियन हैं लेकिन पैथोलॉजी का अता पता नहीं है। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट, दंत चिकित्सक, कम से कम दो स्त्री रोग चिकित्सक होने चाहिए लेकिन यह नहीं हैं। एक्सरे कराने की सुविधा तक नहीं है। आर्थो सर्जन कक्ष में ताला लटका रहता है।
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इनसे चलाया जा रहा काम
इस समय एक-एक फिजिशियन, नेत्र रोग, बाल रोग चिकित्सक के साथ हड्डी रोग विशेषज्ञ सप्ताह में तीन दिन जिला अस्पताल से आकर बैठते हैं। जबकि दो फार्मासिस्ट व एक वार्ड ब्वॉय नियमित हैं। जबकि आउटसोर्स पर दो वार्ड आया, एक-एक वार्ड ब्वॉय माली व चौकीदार तथा तीन सफाई कर्मी शामिल हैं। रोजाना होम्योपैथी व आयुर्वेदिक की कुल मिलाकर करीब 200 से अधिक मरीजों की ओपीडी होती है।
अस्पताल में शौचालय तीन साल से जाम है। फार्मासिस्ट गजेंद्र सिंह भदौरिया ने बताया कि इस बारे में कई बार सीएमओ को पत्र लिख चुके हैं। पानी की समस्या के बारे में बताया कि सबमर्सिबल का पाइप टूटा है। नगर पालिका को वाटर कूलर लगवाने के लिए भी पत्र लिख चुके हैं।
मेडिकल केयर यूनिट को शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है। डॉक्टर मिल नहीं पा रहे हैं। इस संबंध में कई बार शासन को पत्र लिख चुके हैं। अन्य समस्याओं को भी जल्द दूर कराया जाएगा। - डॉ. गीताराम, सीएमओ