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झंडा बैनर छोड़ सोशल मीडिया के हुए नेताजी
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फोटो संख्या 10- सोशल मीडिया प्लेटफार्म
- फोटो : ETAWHA
निवाड़ीकला। जैसे-जैसे समय बदलता जा रहा है। चुनावों में प्रचार के तौर-तरीकों में भी बदलाव होता जा रहा है। पहले के चुनावों में जहां पोस्टर और बैनर का उपयोग किया जाता था, वहीं अब सोशल मीडिया ने धाक जमा ली है। जो इस समय काफी कारगर भी साबित हो रही है।
जिले में 19 को मतदान है। चुनाव प्रचार के लिए अब कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में प्रत्याशी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। जिला पंचायत सदस्य के चुनाव के साथ-साथ प्रधान पद का चुनाव भी हाईटेक हो गया है। प्रधान पद का चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी घर-घर जाकर लोगों से संपर्क कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर उनके परिवार के सदस्य सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। गांव-गांव युवाओं के मोबाइल नंबर एकत्रित करके व्हाट्सएप ग्रुप बनाए जा रहे हैं। हाथ जोड़कर प्रत्याशी की फोटो ग्रुप पर भेजकर उनके गुणों का बखान किया जा रहा है।
विगत पंचायत चुनाव की अपेक्षा इस बार प्रधानी के चुनाव का माहौल भी बदला हुआ है। प्रत्याशी पोस्टर-बैनर का कम उपयोग करके सोशल मीडिया का सहारा लेते दिख रहे हैं। इस कारण ये प्रत्याशी दिन भर लोगों के बीच रहते हैं। जिला पंचायत सदस्य पद के प्रत्याशी भी फेसबुक से लाइव कर रहे है। किस गांव में गये और वहां कौन-कौन लोग मिले, ये फोटो भी फेसबुक पर खूब अपलोड की जा रही है।
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ब्लॉक महेवा के सभी वार्डो से मैदान में जिला पंचायत सदस्यों सहित ग्राम निवाड़ीकला ,अहेरीपुर, महेवा, उरैन्ग, इन्द्रावखी, टडवा स्माइलपुर जैसे गांवों के प्रत्याशी भी खूब सोशल मीडिया पर छाये हुए हैं। बुजुर्ग धनीराम कहते हैं कि मुझे इतनी जानकारी नहीं है, लेकिन नई तकनीक ने चुनाव का स्तर बदला जरूर है। रामप्रकाश का कहना है कि सोशल मीडिया प्रचार का अच्छा साधन है लेकिन इसका दुरुपयोग भी नही करना चाहिए ।
साइबर एक्सपर्ट कौशलेंद्र बताते हैं कि सोशल मीडिया चुनाव प्रचार का महत्वपूर्ण अंग बन गया है, लेकिन इसका दुरुपयोग कतई न करें। प्रशासन लगातार सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफार्म की निगरानी करता है।
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जिले में 19 को मतदान है। चुनाव प्रचार के लिए अब कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में प्रत्याशी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। जिला पंचायत सदस्य के चुनाव के साथ-साथ प्रधान पद का चुनाव भी हाईटेक हो गया है। प्रधान पद का चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी घर-घर जाकर लोगों से संपर्क कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर उनके परिवार के सदस्य सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। गांव-गांव युवाओं के मोबाइल नंबर एकत्रित करके व्हाट्सएप ग्रुप बनाए जा रहे हैं। हाथ जोड़कर प्रत्याशी की फोटो ग्रुप पर भेजकर उनके गुणों का बखान किया जा रहा है।
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विगत पंचायत चुनाव की अपेक्षा इस बार प्रधानी के चुनाव का माहौल भी बदला हुआ है। प्रत्याशी पोस्टर-बैनर का कम उपयोग करके सोशल मीडिया का सहारा लेते दिख रहे हैं। इस कारण ये प्रत्याशी दिन भर लोगों के बीच रहते हैं। जिला पंचायत सदस्य पद के प्रत्याशी भी फेसबुक से लाइव कर रहे है। किस गांव में गये और वहां कौन-कौन लोग मिले, ये फोटो भी फेसबुक पर खूब अपलोड की जा रही है।
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ब्लॉक महेवा के सभी वार्डो से मैदान में जिला पंचायत सदस्यों सहित ग्राम निवाड़ीकला ,अहेरीपुर, महेवा, उरैन्ग, इन्द्रावखी, टडवा स्माइलपुर जैसे गांवों के प्रत्याशी भी खूब सोशल मीडिया पर छाये हुए हैं। बुजुर्ग धनीराम कहते हैं कि मुझे इतनी जानकारी नहीं है, लेकिन नई तकनीक ने चुनाव का स्तर बदला जरूर है। रामप्रकाश का कहना है कि सोशल मीडिया प्रचार का अच्छा साधन है लेकिन इसका दुरुपयोग भी नही करना चाहिए ।
साइबर एक्सपर्ट कौशलेंद्र बताते हैं कि सोशल मीडिया चुनाव प्रचार का महत्वपूर्ण अंग बन गया है, लेकिन इसका दुरुपयोग कतई न करें। प्रशासन लगातार सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफार्म की निगरानी करता है।

फोटो संख्या 11- सायबर एक्सपर्ट कौशलेंद्र- फोटो : ETAWHA