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44 डिग्री चढ़ा पारा, लू से बचें
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
Updated Sun, 15 May 2016 01:16 AM IST
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लू से बचाव के लिए तन ढक्कर रिक्शे में बच्चे समेत जाती महिला
- फोटो : अमर उजाला
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जिले क ा अधिकतम तापमान शनिवार को एक बार फिर से 44 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। सुबह से ही झुलसा देने वाली तेज धूप लोगों घर से नहीं निकलने दे रही है। मजबूरी में घर से बाहर निकले लोग जरा सी लापरवाही में लू की चपेट में आने लगे हैं। लू बड़ों और बच्चों के साथ जानवरों को भी अपनी चपेट में लेता है। इससे किसानों के जानवरों की मौत तक हो जाती है और किसान को बड़ा नुकसान होता है। अगर चिकित्सकों की राय मानते हुए जरा सी सावधानी बरती जाए तो इस गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है।
पानी पीकर और बदन को ढककर निकलें घर से: डा. साहू - शरीर को झुलसा देने वाली तेज धूप और गर्म हवाओं में सबसे ज्यादा खतरा लू लगने का रहता है, जिसे हीट स्ट्रोक कहते हैं। जिला अस्पताल के फिजीशियन डा. वीके साहू के अनुसार लू किसी के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है। अगर जरा सी सावधानी बरती जाए तो लू से बचा जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि घर से निकलने से पूर्व पर्याप्त पानी पीकर चलें। शरीर को ज्यादा से ज्यादा ढककर चलें। एक- दो घंटे के अंतराल पर पानी या जूस लेते रहें।
धूप में ज्यादा देर तक रहने के बाद तुरंत पानी न पिएं। कम से कम 10 मिनट आराम करने के बाद ही हल्का ठंडा पानी पिएं। ज्यादा ठंडा पानी पीने से बचें। गर्मी के मौसम में इलैक्ट्रोल या ओआरएस पाउडर अपने पास अवश्य रखें। इन सावधानियों से लू से काफी हद तक बचा जा सकता है। अगर आप लू की चपेट में आ चुके हैं तो तुरंत ही चिकित्सक से इलाज लें।
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धूप में बच्चों को लेकर निकलने से बचें, पिलाएं उबला पानी - भीषण गर्मी और लपट में छोटे बच्चे जल्द ही लू की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि बच्चों का विशेष ध्यान रखा जाए। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डा. मनोज श्रीवास्तव के अनुसार बच्चों क ो लू क ी चपेट में आने से बचाने के लिए हर संभव कोशिश करें कि उन्हें सुबह 10 से शाम छह बजे के बीच धूप में लेकर चलने से बचें।
बच्चों को पर्याप्त मात्रा में उबला हुआ पानी पिलाते रहें, जिससे उन्हें डिहाईड्रेशन न हो। दिन में बडे़ बच्चों को नीबू की शिकंजी, नमक चीनी का घोल, मट्ठा, नारियल का पानी या घर में निकाला गया फलों का जूस एक दो बार अवश्य दें। छोटे बच्चों की दूध की बोतल को गर्म पानी में खौलाने के बाद ही दूध पिलाएं। अगर कोई बच्चा लू की चपेट में आ चुका है तो उसे प्राथमिक तौर पर ओआरएस का घोल और जिंक की गोली खिलाएं और चिकित्सक की राय पर उपचार दें।
सूर्य निकलने से पहले व ढलने के बाद पशुओं को नहलाएं- तेज लपट में इंसान ही नहीं पशु भी हीट स्ट्रोक की चपेट में आ जाते हैं। देखरेख के अभाव में उनकी मौत भी हो जाती है। पशु चिकित्साधिकारी समथर डा. वैभव मिश्रा के अनुसार इंसानों की तरह ही पशुओं को सावधानी बरतकर गर्मी से बचाया जा सकता है। पशु को हीट स्ट्रोक से बचाने के लिए पशुपालक ध्यान रखें कि इस मौसम में सूर्य निकलने से पहले व सूर्य के ढलने के बाद ही पशु को नहलाएं।
पशु क ो पीने के लिए साफ शीतल पानी दें, पशु को ऐसे स्थान पर बांधें, जहां उसे सीधी धूप, लू और गर्म हवा न लगे। अगर पशु के बांधने के लिए सिर्फ टीन या झप्पर की व्यवस्था है तो शेड के ऊपर गीले बोरे डालें। हो सके तो पशु को सुबह 10 से पहले ही किसी वृक्ष की छाया में बांधे। चारे में अगर नया भूसा है तो उसे कम से कम तीन घंटे पानी में भिगोने के बाद ही पशु को दें। सीधे नया भूसा खिलाने से पशु का पेट फूल सकता है।
डा. मिश्रा के अनुसार दिन में कम से कम दो बार जानवरों के लिए बाजार में उपलब्ध पेय पदार्थों को घोलकर अवश्य पिलाएं। अगर कोई जानवर हीट स्ट्रोक की चपेट में आ गया है तो उसके सिर पर गीला कपड़ा या बोरी रखें और झोलाछाप डाक्टर से बचकर किसी राजकीय पशु चिकित्सक को ही दिखाएं।
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पानी पीकर और बदन को ढककर निकलें घर से: डा. साहू - शरीर को झुलसा देने वाली तेज धूप और गर्म हवाओं में सबसे ज्यादा खतरा लू लगने का रहता है, जिसे हीट स्ट्रोक कहते हैं। जिला अस्पताल के फिजीशियन डा. वीके साहू के अनुसार लू किसी के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है। अगर जरा सी सावधानी बरती जाए तो लू से बचा जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि घर से निकलने से पूर्व पर्याप्त पानी पीकर चलें। शरीर को ज्यादा से ज्यादा ढककर चलें। एक- दो घंटे के अंतराल पर पानी या जूस लेते रहें।
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धूप में ज्यादा देर तक रहने के बाद तुरंत पानी न पिएं। कम से कम 10 मिनट आराम करने के बाद ही हल्का ठंडा पानी पिएं। ज्यादा ठंडा पानी पीने से बचें। गर्मी के मौसम में इलैक्ट्रोल या ओआरएस पाउडर अपने पास अवश्य रखें। इन सावधानियों से लू से काफी हद तक बचा जा सकता है। अगर आप लू की चपेट में आ चुके हैं तो तुरंत ही चिकित्सक से इलाज लें।
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धूप में बच्चों को लेकर निकलने से बचें, पिलाएं उबला पानी - भीषण गर्मी और लपट में छोटे बच्चे जल्द ही लू की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि बच्चों का विशेष ध्यान रखा जाए। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डा. मनोज श्रीवास्तव के अनुसार बच्चों क ो लू क ी चपेट में आने से बचाने के लिए हर संभव कोशिश करें कि उन्हें सुबह 10 से शाम छह बजे के बीच धूप में लेकर चलने से बचें।
बच्चों को पर्याप्त मात्रा में उबला हुआ पानी पिलाते रहें, जिससे उन्हें डिहाईड्रेशन न हो। दिन में बडे़ बच्चों को नीबू की शिकंजी, नमक चीनी का घोल, मट्ठा, नारियल का पानी या घर में निकाला गया फलों का जूस एक दो बार अवश्य दें। छोटे बच्चों की दूध की बोतल को गर्म पानी में खौलाने के बाद ही दूध पिलाएं। अगर कोई बच्चा लू की चपेट में आ चुका है तो उसे प्राथमिक तौर पर ओआरएस का घोल और जिंक की गोली खिलाएं और चिकित्सक की राय पर उपचार दें।
सूर्य निकलने से पहले व ढलने के बाद पशुओं को नहलाएं- तेज लपट में इंसान ही नहीं पशु भी हीट स्ट्रोक की चपेट में आ जाते हैं। देखरेख के अभाव में उनकी मौत भी हो जाती है। पशु चिकित्साधिकारी समथर डा. वैभव मिश्रा के अनुसार इंसानों की तरह ही पशुओं को सावधानी बरतकर गर्मी से बचाया जा सकता है। पशु को हीट स्ट्रोक से बचाने के लिए पशुपालक ध्यान रखें कि इस मौसम में सूर्य निकलने से पहले व सूर्य के ढलने के बाद ही पशु को नहलाएं।
पशु क ो पीने के लिए साफ शीतल पानी दें, पशु को ऐसे स्थान पर बांधें, जहां उसे सीधी धूप, लू और गर्म हवा न लगे। अगर पशु के बांधने के लिए सिर्फ टीन या झप्पर की व्यवस्था है तो शेड के ऊपर गीले बोरे डालें। हो सके तो पशु को सुबह 10 से पहले ही किसी वृक्ष की छाया में बांधे। चारे में अगर नया भूसा है तो उसे कम से कम तीन घंटे पानी में भिगोने के बाद ही पशु को दें। सीधे नया भूसा खिलाने से पशु का पेट फूल सकता है।
डा. मिश्रा के अनुसार दिन में कम से कम दो बार जानवरों के लिए बाजार में उपलब्ध पेय पदार्थों को घोलकर अवश्य पिलाएं। अगर कोई जानवर हीट स्ट्रोक की चपेट में आ गया है तो उसके सिर पर गीला कपड़ा या बोरी रखें और झोलाछाप डाक्टर से बचकर किसी राजकीय पशु चिकित्सक को ही दिखाएं।