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Etawah News: रामलीला के लिए तैयार हो रहे मुखौटे, पंजाब से मंगाईं गईं तलवारें
Tue, 29 Sep 2026 01:10 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Tue, 29 Sep 2026 01:10 AM IST
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फोटो: 12:: मैदानी रामलीला के लिए बनाए गए मुखौटे, तीर आदि सामान। संवाद
जसवंतनगर। कस्बे की ऐतिहासिक रामलीला की तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। रामलीला मैदान में मुखौटों की रंगाई-पुताई, रावण के पुतले और बाड़े तैयार करने का काम शुरू हो गया है। खुले मैदान में दौड़ते हुए पात्रों और जीवंत दृश्यों के साथ होने वाली यह रामलीला अपनी अनूठी परंपराओं और विभिन्न धातुओं से बने मुखौटों के लिए अलग पहचान रखती है।
रामलीला समिति के कार्यकारी प्रबंधक राजीव गुप्ता ने बताया कि इस बार बनारस से पीतल के मुखौटे तैयार कराए जा रहे हैं, जबकि तलवारें पंजाब से मंगवाई जा रही हैं। 13 अक्तूबर से भरत मिलाप के साथ मैदान में रामलीला की शुरुआत होगी। इस बार रावण वध के दिन रामलीला मैदान में महाआरती का आयोजन भी किया जाएगा।
जसवंतनगर की रामलीला में पारंपरिक मंचीय राम लीलाओं की तरह एक स्थान पर खड़े होकर संवाद और अभिनय नहीं होता, बल्कि कलाकार खुले मैदान में दौड़ते हुए विभिन्न लीलाओं का प्रदर्शन करते हैं। राम, लक्ष्मण और सीता को छोड़कर लगभग सभी पात्र मुखौटे पहनते हैं। अलग-अलग रंग और डिजाइन वाले मुखौटे दर्शकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहते हैं।
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रामलीला के युद्ध दृश्यों में भी हास्य का पुट देखने को मिलता है। आकाश में छोड़े जाने वाले बाण बच्चों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं। प्रतिदिन सैकड़ों बाण चलाए जाते हैं, जबकि नवमी और दशहरा के दिन इनकी संख्या हजारों में पहुंच जाती है। नवमी और दशहरा पर कस्बे की प्रमुख सड़कों पर रामदल और राक्षस दल के बीच युद्ध लीला का प्रदर्शन होता है।
रामलीला की परंपरा के अनुसार इस बार रावण वध 20 अक्तूबर की जगह 21 अक्तूबर को होगा। समिति के अनुसार 21 अक्तूबर को पंचक लग रहे हैं, जिसके चलते तिथि में बदलाव किया गया है।
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रामलीला समिति के कार्यकारी प्रबंधक राजीव गुप्ता ने बताया कि इस बार बनारस से पीतल के मुखौटे तैयार कराए जा रहे हैं, जबकि तलवारें पंजाब से मंगवाई जा रही हैं। 13 अक्तूबर से भरत मिलाप के साथ मैदान में रामलीला की शुरुआत होगी। इस बार रावण वध के दिन रामलीला मैदान में महाआरती का आयोजन भी किया जाएगा।
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जसवंतनगर की रामलीला में पारंपरिक मंचीय राम लीलाओं की तरह एक स्थान पर खड़े होकर संवाद और अभिनय नहीं होता, बल्कि कलाकार खुले मैदान में दौड़ते हुए विभिन्न लीलाओं का प्रदर्शन करते हैं। राम, लक्ष्मण और सीता को छोड़कर लगभग सभी पात्र मुखौटे पहनते हैं। अलग-अलग रंग और डिजाइन वाले मुखौटे दर्शकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहते हैं।
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रामलीला के युद्ध दृश्यों में भी हास्य का पुट देखने को मिलता है। आकाश में छोड़े जाने वाले बाण बच्चों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं। प्रतिदिन सैकड़ों बाण चलाए जाते हैं, जबकि नवमी और दशहरा के दिन इनकी संख्या हजारों में पहुंच जाती है। नवमी और दशहरा पर कस्बे की प्रमुख सड़कों पर रामदल और राक्षस दल के बीच युद्ध लीला का प्रदर्शन होता है।
रामलीला की परंपरा के अनुसार इस बार रावण वध 20 अक्तूबर की जगह 21 अक्तूबर को होगा। समिति के अनुसार 21 अक्तूबर को पंचक लग रहे हैं, जिसके चलते तिथि में बदलाव किया गया है।