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Etawah News: चंबल पुल बना आत्महत्या का केंद्र, रोकथाम के इंतजाम नाकाफी
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फोटो: 15:: चकरनगर का चंबल पुल, जहां से आए दिन नदी में कूद कर लोग दे देते हैं जान। संवाद
चकरनगर। आत्महत्या के मामलों को लेकर चकरनगर क्षेत्र में स्थित चंबल पुल लगातार चर्चा में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चंबल पुल पर अब तक बड़ी संख्या में लोग आत्महत्या कर चुके हैं। इसके बावजूद पुल पर आत्महत्या रोकने के लिए कोई ठोस सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए हैं। लोगों की मांग है कि पुल पर करीब 10 फीट ऊंची लोहे की जाली लगाई जाए, जिससे लोग नदी में छलांग न लगा सकें।
क्षेत्रीय लोगों के मुताबिक यहां लगभग हर माह आत्महत्या की कोई न कोई घटना सामने आती है। घटना के बाद पुलिस और प्रशासन कई दिनों तक शव की तलाश में जुटा रहता है। सबसे बड़ी समस्या मोटरबोट के लिए पेट्रोल की व्यवस्था करने की होती है। एक मामले में शव की तलाश पर करीब आठ से दस हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं। चंबल नदी का तेज बहाव और मगरमच्छों की मौजूदगी शव की तलाश को और मुश्किल बना देती है।
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तीन दिन तक हुई तलाश, नहीं मिला शव
केस -1
13 सितंबर को सहसों थाना क्षेत्र के बलजुपुरा निवासी शेर सिंह 45 ने पत्नी से विवाद के बाद चंबल पुल से नदी में छलांग लगा दी थी। तीन दिन सर्च के बाद भी शव नहीं मिला है। शव न मिलने से परिजन को आर्थिक सहायता नहीं मिल सकी। वहीं मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए परेशान होना पड़ा।
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मोटरबोट से तलाश के बाद भी नहीं चला पता
केस- 2
29 अगस्त को मध्य प्रदेश के भिंड के रौन थाना क्षेत्र के लारोल गांव के जितेंद्र उर्फ डंपी (50) ने चंबल पुल से नदी में छलांग लगा दी थी। सेंचुरी विभाग की मोटरबोट से तत्काल खोजबीन शुरू की पर पता नहीं चला। सहसों थाना पुलिस और तहसील प्रशासन ने मोटरबोट की मदद से नदी में सर्च किया। युवक का कोई सुराग नहीं लग सका।
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केस-3
15 दिसंबर 2024 को सहसों थाना क्षेत्र के प्रेमपुरा गांव में घर के रास्ते के विवाद को लेकर राम कली (50) ने चंबल नदी में पुल से छलांग लगाकर जान दे दी थी।
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केस-4
नौ नवंबर 2024 को सहसों थाना क्षेत्र के चंबल पुल से ददरा निवासी मोहन 20 पुत्र रूपनारायण दोहरे ने चंबल नदी में छलांग लगा दी थी। राहगीरों ने गिरता देख सहसों पुलिस को सूचना दी। सेंचुरी के नाविक और पुलिस ने रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
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वर्जन
चंबल पुल से लोगों के कूदने की घटनाएं बढ़ी हैं। रेलिंग के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। इस संबंध में वह पीडब्ल्यूडी से भी बात करेंगे।
रोहित कुमार मौर्य, एसडीएम
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क्षेत्रीय लोगों के मुताबिक यहां लगभग हर माह आत्महत्या की कोई न कोई घटना सामने आती है। घटना के बाद पुलिस और प्रशासन कई दिनों तक शव की तलाश में जुटा रहता है। सबसे बड़ी समस्या मोटरबोट के लिए पेट्रोल की व्यवस्था करने की होती है। एक मामले में शव की तलाश पर करीब आठ से दस हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं। चंबल नदी का तेज बहाव और मगरमच्छों की मौजूदगी शव की तलाश को और मुश्किल बना देती है।
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तीन दिन तक हुई तलाश, नहीं मिला शव
केस -1
13 सितंबर को सहसों थाना क्षेत्र के बलजुपुरा निवासी शेर सिंह 45 ने पत्नी से विवाद के बाद चंबल पुल से नदी में छलांग लगा दी थी। तीन दिन सर्च के बाद भी शव नहीं मिला है। शव न मिलने से परिजन को आर्थिक सहायता नहीं मिल सकी। वहीं मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए परेशान होना पड़ा।
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मोटरबोट से तलाश के बाद भी नहीं चला पता
केस- 2
29 अगस्त को मध्य प्रदेश के भिंड के रौन थाना क्षेत्र के लारोल गांव के जितेंद्र उर्फ डंपी (50) ने चंबल पुल से नदी में छलांग लगा दी थी। सेंचुरी विभाग की मोटरबोट से तत्काल खोजबीन शुरू की पर पता नहीं चला। सहसों थाना पुलिस और तहसील प्रशासन ने मोटरबोट की मदद से नदी में सर्च किया। युवक का कोई सुराग नहीं लग सका।
केस-3
15 दिसंबर 2024 को सहसों थाना क्षेत्र के प्रेमपुरा गांव में घर के रास्ते के विवाद को लेकर राम कली (50) ने चंबल नदी में पुल से छलांग लगाकर जान दे दी थी।
केस-4
नौ नवंबर 2024 को सहसों थाना क्षेत्र के चंबल पुल से ददरा निवासी मोहन 20 पुत्र रूपनारायण दोहरे ने चंबल नदी में छलांग लगा दी थी। राहगीरों ने गिरता देख सहसों पुलिस को सूचना दी। सेंचुरी के नाविक और पुलिस ने रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
वर्जन
चंबल पुल से लोगों के कूदने की घटनाएं बढ़ी हैं। रेलिंग के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। इस संबंध में वह पीडब्ल्यूडी से भी बात करेंगे।
रोहित कुमार मौर्य, एसडीएम