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Etawah News: मलमास खत्म, शुक्रवार से मांगलिक कार्यक्रम का श्री गणेश
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इटावा। मलमास की समाप्ति के साथ जिले में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत समेत अन्य मांगलिक कार्यों पर लगा विराम समाप्त हो गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शुक्रवार, 19 जून से शुभ कार्यों का सिलसिला फिर शुरू हो गया है। हालांकि यह अवधि अधिक लंबी नहीं रहेगी, क्योंकि 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा। इसके बाद चार माह तक विवाह और अन्य मांगलिक कार्य स्थगित रहेंगे।
आचार्य पंडित विनोद कुमार दुबे ने बताया कि मलमास के कारण पिछले एक माह से विवाह सहित सभी शुभ कार्यों का आयोजन नहीं किया जा रहा था। अब ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष के प्रभाव से मांगलिक कार्यों के लिए शुभ समय शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि जून और जुलाई में विवाह तथा अन्य संस्कारों के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं, जिससे आयोजन स्थलों, बैंड-बाजा, कैटरिंग और सजावट से जुड़े कारोबारियों को भी राहत मिलेगी।ज्योतिषाचार्य पंडित कपिल देव त्रिपाठी के अनुसार 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाएंगे। हिंदू पंचांग में इस अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी से देवोत्थान एकादशी तक विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इस वर्ष चातुर्मास नवंबर तक रहेगा। इसके बाद देवोत्थान एकादशी के साथ पुनः शुभ कार्यों की शुरुआत होगी।
प्रमुख शुभ मुहूर्त
जून: 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 29
जुलाई: 1, 6, 7, 11
नवंबर: 21, 24, 25, 26
दिसंबर: 2, 3, 4, 5, 6, 11, 12।
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आचार्य पंडित विनोद कुमार दुबे ने बताया कि मलमास के कारण पिछले एक माह से विवाह सहित सभी शुभ कार्यों का आयोजन नहीं किया जा रहा था। अब ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष के प्रभाव से मांगलिक कार्यों के लिए शुभ समय शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि जून और जुलाई में विवाह तथा अन्य संस्कारों के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं, जिससे आयोजन स्थलों, बैंड-बाजा, कैटरिंग और सजावट से जुड़े कारोबारियों को भी राहत मिलेगी।ज्योतिषाचार्य पंडित कपिल देव त्रिपाठी के अनुसार 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाएंगे। हिंदू पंचांग में इस अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी से देवोत्थान एकादशी तक विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इस वर्ष चातुर्मास नवंबर तक रहेगा। इसके बाद देवोत्थान एकादशी के साथ पुनः शुभ कार्यों की शुरुआत होगी।
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प्रमुख शुभ मुहूर्त
जून: 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 29
जुलाई: 1, 6, 7, 11
नवंबर: 21, 24, 25, 26
दिसंबर: 2, 3, 4, 5, 6, 11, 12।