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सैफई मे सजी गीतों की महफिल
ब्यूरो/ अमर उजाला, इटावा
Updated Sat, 02 Jan 2016 11:54 PM IST
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रणवीर स्मृति सैफई महोत्सव में शनिवार की रात गीतों की महफिल सजी। फिल्म जगत के जाने माने गायक कलाकारों ने अपनी गायिकी से पंडाल में मौजूद श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
पार्श्व गायिका सपना मुखर्जी, गायक राहत अली ने जहां अपनी गायिकी के जलवे बिखेरे, वहीं गायक सुमित कुमार एवं अमित कुमार ने स्व. किशोर कुमार की यादें ताजा कर दीं।
कार्यक्रम की शुरूआत मुंबई के गजल गायक मु. अनीस ने की। उन्होंने मेरे दिल की दुनियां में आकर तो देखो, तुम्हें जिंदगी की हकीकत मिलेगी गजल प्रस्तुत की।
इसके बाद गायिका मीरा ने फिल्म निकाह का गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद मशहूर गजल गायक एवं यश भारती से सम्मानित राहत अली ने डा. बसीर अहमद की लिखी गजल ये चांदनी सा बदन खुशबुओं का साया है बहुत अजीज है मगर पराया है गाकर की।
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इसके नवाज देवबंदी की लिखी किस्सा अंजाम तक नहीं आता उसपे इल्जाम तक नहीं आता प्रस्तुत की। उनकी गजल गायिकी को सराहा गया।
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पार्श्व गायिका सपना मुखर्जी, गायक राहत अली ने जहां अपनी गायिकी के जलवे बिखेरे, वहीं गायक सुमित कुमार एवं अमित कुमार ने स्व. किशोर कुमार की यादें ताजा कर दीं।
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कार्यक्रम की शुरूआत मुंबई के गजल गायक मु. अनीस ने की। उन्होंने मेरे दिल की दुनियां में आकर तो देखो, तुम्हें जिंदगी की हकीकत मिलेगी गजल प्रस्तुत की।
इसके बाद गायिका मीरा ने फिल्म निकाह का गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद मशहूर गजल गायक एवं यश भारती से सम्मानित राहत अली ने डा. बसीर अहमद की लिखी गजल ये चांदनी सा बदन खुशबुओं का साया है बहुत अजीज है मगर पराया है गाकर की।
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इसके नवाज देवबंदी की लिखी किस्सा अंजाम तक नहीं आता उसपे इल्जाम तक नहीं आता प्रस्तुत की। उनकी गजल गायिकी को सराहा गया।