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शौचालय में ताला, लोग बेहाल
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इटावा। स्वच्छ भारत मिशन को लेकर देशभर में अभियान चलाए जा रहे हैं। जिसमें सबसे पहले देश भर में शौचालयों का तेजी से निर्माण कराया जा रहा, लेकिन इटावा बस स्टैंड पर स्वच्छता अभियान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
बस स्टैंड पर आम लोगें के उपयोग के लिए बना सामुदायिक शौचालय पर ताला लगा हुआ है। इससे लोगों को विवश होकर जहां-तहां शौच के लिए जाना पड़ता है, लेकिन प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
बस स्टैंड पर शौचालय का निर्माण इसलिए करवाया गया था कि यहां आने वाले यात्री इसका उपयोग कर सके और दूसरी जगह पर गंदगी न फैले, लेकिन ठीक इसके उलट यह शौचालय अब विभागीय उदासीनता का शिकार हो चुके हैं।
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इन शौचालयों में ताले लटके पड़े है। जिसका नतीजा यह है कि लोग बाहर ही मल मूत्र करने के लिए विवश है। शौचालय में ताला लगे होने के कारण यात्री मजबूरी में बस स्टैंड के बाहर कोने में टॉयलेट करते हैं।
यात्रियों से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अगर शौचालय खुला होता तो वह जरूर इसका प्रयोग करते। मजबूरी में हमें बाहर जाना पड़ता है।
यहां तक कि बस स्टैंड पर दिव्यांगों के लिए बने शौचालय पर भी लंबे समय से ताला लटका हुआ है, जिससे दिव्यांग यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बता दें कि इटावा बस स्टैंड से रोजसना लगभग पांच हजार यात्री सफर करते हैं और यहां लगभग सौ से अधिक बसें चलती है।
उधर, शौचालय पर ताला लटके होने के कारण यात्रियों ने बस स्टैंड के निकासी गेट की बगल वाली दीवार को मूत्रालय बना दिया है। यहां से गुजरने वाले यात्री यही पर टॉयलेट करते हैं।
जिस कारण यहां हमेशा बदबू आती रहती है। वहीं दीवार के बगल में एक छोटा से गड्डा भी है। जिसमें हमेशा गंदा पानी जमा रहता है, जो बीमारियों को दावत दे रहा है।
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बस स्टैंड पर आम लोगें के उपयोग के लिए बना सामुदायिक शौचालय पर ताला लगा हुआ है। इससे लोगों को विवश होकर जहां-तहां शौच के लिए जाना पड़ता है, लेकिन प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
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बस स्टैंड पर शौचालय का निर्माण इसलिए करवाया गया था कि यहां आने वाले यात्री इसका उपयोग कर सके और दूसरी जगह पर गंदगी न फैले, लेकिन ठीक इसके उलट यह शौचालय अब विभागीय उदासीनता का शिकार हो चुके हैं।
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इन शौचालयों में ताले लटके पड़े है। जिसका नतीजा यह है कि लोग बाहर ही मल मूत्र करने के लिए विवश है। शौचालय में ताला लगे होने के कारण यात्री मजबूरी में बस स्टैंड के बाहर कोने में टॉयलेट करते हैं।
यात्रियों से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अगर शौचालय खुला होता तो वह जरूर इसका प्रयोग करते। मजबूरी में हमें बाहर जाना पड़ता है।
यहां तक कि बस स्टैंड पर दिव्यांगों के लिए बने शौचालय पर भी लंबे समय से ताला लटका हुआ है, जिससे दिव्यांग यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बता दें कि इटावा बस स्टैंड से रोजसना लगभग पांच हजार यात्री सफर करते हैं और यहां लगभग सौ से अधिक बसें चलती है।
उधर, शौचालय पर ताला लटके होने के कारण यात्रियों ने बस स्टैंड के निकासी गेट की बगल वाली दीवार को मूत्रालय बना दिया है। यहां से गुजरने वाले यात्री यही पर टॉयलेट करते हैं।
जिस कारण यहां हमेशा बदबू आती रहती है। वहीं दीवार के बगल में एक छोटा से गड्डा भी है। जिसमें हमेशा गंदा पानी जमा रहता है, जो बीमारियों को दावत दे रहा है।