फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etawah News ›   Lion cubs left eye on everyone in Safari

लायन सफारी में सबकी नजर बचे शावक पर

Wed, 29 Jul 2015 11:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा Updated Wed, 29 Jul 2015 11:33 PM IST
विज्ञापन
Lion cubs left eye on everyone in Safari

लॉयन सफारी में इकलौते शावक को बचाने के हर संभव उपाय जारी हैं। चूंकि उसे शेरनी ने छोड़ दिया है इसलिए उसकी देखभाल अलग रखकर की जा रही है। उसे दिन के पांच वक्त में 162 मिलीग्राम दूध पिलाया जा रहा है। जन्म के बाद से करीब 110 ग्राम वजन में बढ़ोत्तरी भी हुई है। डाक्टर के मुताबिक, तीन-चार दिन में शावक की आंखें खुल जाएंगी।

विज्ञापन


उल्लेखनीय है कि दो शेरनियों के चार शावकों की मौत का सदमा झेल रहे सफारी प्रशासन एवं शासन के लिए राहत की बात यह है कि पांचवें शावक की सेहत ठीक है।  इस वजह से सबकी नजर लायन सफारी पर लगी है।  शावक की देखभाल शेरनी नहीं बल्कि डाक्टर कर रहे हैं। पिछले दिनों गुजरात से आए डा कड़ीवाल के टिप्स कारगर रहे हैं।
विज्ञापन


इन दिनों इस शावक को सफारी के डाक्टर अरविंद त्रिपाठी गाय का दूध पिला रहे हैं। सूत्रों के अनुसार शावक के जन्म के समय उसका वजन एक किलो आठ ग्राम था। जो बढ़कर एक किलो एक सौ अस्सी ग्राम हो गया है। उसे सुबह 7 बजे, 11 बजे, दोपहर 3 बजे, शाम 7 बजे और रात 12 बजे दूध पिलाया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


एक बार में करीब 35 से 40 मिलीग्राम दूध दिया जा रहा है। एक दिन में औसतन 162 मिलीग्राम दूध पी रहा है। फीडिंग के यह तौर-तरीके डा कड़ीवाल बताकर गए हैं। इसमें इस बात का खास ख्याल रखा जा रहा है कि दूध पिलाते समय उसकी गर्दन न दबे और दूध भी अच्छे से गटक ले।

ग्रीष्मा नाम की शेरनी का यह नर शावक गत 21 जुलाई को पैदा हुआ था। यह कुल नौ दिन का हुआ है। पशु चिकित्सकों के अनुसार जंगल में शावक की आंखें करीब 12 दिन में खुल जाती हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि 3-4 के बाद यह शावक भी अपनी आंखें खोल देगा। आंखें खुल जाने पर शावक के जीवित रहने की संभावनाएं अधिक हो जाती हैं।

इसी वजह से प्रमुख वन संरक्षक रूपक डे यहां डेरा जमाए हुए हैं। हालांकि शावक की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी डा. अरविंद त्रिपाठी और कीपर आरिफ निभा रहे हैं। मोबाइल पर डा त्रिपाठी ने सिर्फ बताया कि शावक पूरी तरह से स्वस्थ है और उसकी फीडिंग बिल्कुल ठीक चल रही है।

...और विवाद सुलझाने पहुंचे प्रमुख सचिव वन!
इटावा।
लॉयन सफारी चौकीदार की पिटाई मामले की गूंज शासन तक है। बुधवार को प्रमुख सचिव वन संजीव सरन इसी मसले को सुलझाने के लिए यहां पहुंचे।

उन्होंने सफारी के प्रशासनिक भवन में डीएम और एसएसपी समेत प्रमुख वन संरक्षक रूपक डे के साथ कई घंटे बैठक की। हालांकि उन्होंने मीडिया से कोई बात नहीं की जबकि कर्मचारी अभी भी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हैं।

गौरतलब है कि बीते दिनों लॉयन सफारी में तैनात चौकीदार ऋषि यादव को बंधक बनाकर पीटा गया था। इस मामले में सफारी डायरेक्टर केके सिंह, दो डाक्टर उत्कर्ष एवं विकास समेत एक चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है।

कर्मचारी इस मामले को लेकर सफारी के गेट पर तालाबंदी भी कर दी थी। बाद में एडीएम और सेंचुरी डीएफओ के समझाने बुझाने पर वे माने थे। घटना के बाद कर्मचारी काम पर भले लौट आए लेकिन अंदरूनी तौर पर उनमें नाराजगी बनी हुई है। इसी वजह से डायरेक्टर केके सिंह, लखनऊ के दोनों डाक्टर सफारी से बाहर जा चुके हैं।

मसले की गंभीरता को देखते हुए ही प्रमुख सचिव वन संजीव सरन बुधवार को दोपहर करीब एक बजे सफारी पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने ब्रीडिंग सेंटर का जायजा लिया। उसके बाद वह परिसर में बने प्रशासनिक भवन में आकर जम गए।

इसी भवन में उनकी डीएम नितिन बंसल, एसएसपी मंजिल सैनी और प्रमुख वन संरक्षक रूपक डे के साथ बातचीत होती रही। सूत्रों ने बताया कि मसला कर्मचारी विवाद का रहा।

इस बातचीत से पूर्व बुधवार को ही एसएसपी ने पिटाई के शिकार चौकीदार ऋषि यादव से घटना के संबंध में जानकारी की। एसएसपी ने प्रमुख सचिव वन को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया।

उधर प्रमुख सचिव वन पिटाई के मसले को सुलझाने में व्यस्त रहे। इधर कर्मचारी अभी भी अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। इन कर्मचारियों ने बताया कि वह अभी भी डायरेक्टर समेत अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।

वह चाहते हैं कि डायरेक्टर को यहां से हटाया जाए क्योंकि यदि इस मामले में कोई कार्रवाई न हुई तो उनके लिए यहां काम करना मुश्किल हो जाएगा। प्रमुख सचिव वन से बातचीत करने के लिए तमाम मीडिया कर्मी सफारी के गेट पर मौजूद रहे।

इसके लिए डीएम से बात भी की, लेकिन उनका कहना रहा कि यदि प्रमुख सचिव वन चाहेंगे तो बात होगी। उसके बाद न तो उनका कोई जवाब आया और न ही उनसे संपर्क कायम हो सका।

कामयाबी मिली तो कारगर रहेगी लॉयन सफारी
इटावा।
लॉयन सफारी के तौर पर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव का सपना तो साकार हो चुका है। बस कामयाबी की दरकार है। इस प्रोजेक्ट की अहमियत इसकी लागत से कही ज्यादा इसके उद्देश्य को लेकर है।

शहर में सफारी के सफल संचालन से पर्यटन उद्योग का रास्ता तो खुलेगा ही, साथ ही एशियाटिक प्रजाति के बब्बर शेरों की लगातार कम होती संख्या पर कुछ विराम अवश्य लगेगा।

इस प्रोजेक्ट की स्थापना से लेकर अब तक सीएम अखिलेश सिंह यादव ने बेहद गंभीरता बरती है। सच है कि सफारी के अंदर से अभी तक ऐसी खबर के आने का इंतजार है जिससे शासन, प्रशासन के साथ साथ आम जनमानस में उमंग और उत्साह पैदा हो। फिर भी जिस तरह से एक जोड़ा शेर और चार शावकों की मौत के बाद इकलौते शावक को बचाने की जद्दोजहद जारी है। इससे उम्मीद अभी जिंदा है।

लॉयन सफारी शहर के दक्षिणी छोर में स्थित विशाल बीहड़ के 350 हेक्टेयर में फैली है। इसमें अहम हिस्सा वह 50 हेक्टेयर का कोर जोन है, जहां खुले आसमान के नीचे बब्बर शेरों का राज होगा। इनकी संख्या में लगातार इजाफा हो। इसके लिए चार प्रजनन केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। शासन की मंशा सिर्फ लॉयन सफारी तक सीमित नहीं है।


विगत महीनों में सीएम अखिलेश यादव के साथ सिंगापुर की सफारी के दो एक्सपर्ट ने आकर जिस तरह से दिलचस्पी दिखाई थी, उससे कई संभावनाएं बनी हुई हैं।

समय-समय पर सफारी से जुड़े अफसर बताते रहे हैं कि आने वाले दिनों में यहां एलीफेंट सफारी के साथ साथ अन्य प्रकार के जानवर भी लाए जाएंगे। सेंट्रल जू अथॉरिटी (सीजेडए) से परमीशन लेने के प्रयास भी जारी हैं। कहा जा सकता है कि सब कुछ ठीकठाक चलता रहा तो यह सफारी भविष्य में रोजगार के अवसर भी मुहैया कराएगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed