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Etawah News: पत्नी की हत्या में पति को आजीवन कारावास
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इटावा। पत्नी की गला दबाकर हत्या के 11 साल पुराने मामले की सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर-10 यज्ञेश चंद्र पांडे ने पति को दोषी करार दिया। कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा कोर्ट ने उस पर पांच हजार का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना अदा न करने पर उसे तीन माह का अतिरिक्त सजा काटनी पड़ेगी।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि चौबिया थाना क्षेत्र के गांव मुकुंद पुरा निवासी सुरेश चंद्र यादव ने सिविल लाइन थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि उन्होंने पुत्री मंजू की शादी 17 साल पहले चतुरीपुरा थाना किशनी हाल पता शांति कालोनी मैनपुरी फाटक निवासी सुनील यादव के साथ की थी। शादी के बाद से सुनील मंजू के साथ मारपीट करता था। इस संबंध में थाने में मामला भी दर्ज कराया गया था।
इसके अलावा उसे समझाने का भी प्रयास किया गया लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। कोर्ट में घरेलू हिंसा का भी मामला चल रहा था। 12 दिसंबर 2012 को सुनील ने मंजू की गला दबाकर हत्या कर दी। जब उसे जानकारी मिली तो वह मौके पर पहुंचा और अपनी पुत्री को जीवित समझकर अस्पताल ले गया, जहां डाॅक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। तहरीर के आधार पर पुलिस ने पति सुनील व ससुर ओम प्रकाश के खिलाफ हत्या की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। बाद में पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस ने दोनों के खिलाफ आरोपपत्र कोर्ट में पेश कर दिए। बाद में उन्हें जमानत मिल गई। मामले की सुनवाई के दौरान ससुर ओम प्रकाश की मौत हो गई।
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मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर-10 में हुई। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता के द्वारा पेश किए साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर कोर्ट ने पति सुनील को हत्या का दोषी पाते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा कोर्ट ने उस पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
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अपर जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि चौबिया थाना क्षेत्र के गांव मुकुंद पुरा निवासी सुरेश चंद्र यादव ने सिविल लाइन थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि उन्होंने पुत्री मंजू की शादी 17 साल पहले चतुरीपुरा थाना किशनी हाल पता शांति कालोनी मैनपुरी फाटक निवासी सुनील यादव के साथ की थी। शादी के बाद से सुनील मंजू के साथ मारपीट करता था। इस संबंध में थाने में मामला भी दर्ज कराया गया था।
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इसके अलावा उसे समझाने का भी प्रयास किया गया लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। कोर्ट में घरेलू हिंसा का भी मामला चल रहा था। 12 दिसंबर 2012 को सुनील ने मंजू की गला दबाकर हत्या कर दी। जब उसे जानकारी मिली तो वह मौके पर पहुंचा और अपनी पुत्री को जीवित समझकर अस्पताल ले गया, जहां डाॅक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। तहरीर के आधार पर पुलिस ने पति सुनील व ससुर ओम प्रकाश के खिलाफ हत्या की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। बाद में पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस ने दोनों के खिलाफ आरोपपत्र कोर्ट में पेश कर दिए। बाद में उन्हें जमानत मिल गई। मामले की सुनवाई के दौरान ससुर ओम प्रकाश की मौत हो गई।
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मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर-10 में हुई। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता के द्वारा पेश किए साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर कोर्ट ने पति सुनील को हत्या का दोषी पाते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा कोर्ट ने उस पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।