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अब खेती के गुर सीख रहीं बेटियां

Sun, 21 Nov 2021 12:22 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 21 Nov 2021 12:22 AM IST
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kisan
फोटो संख्या 16- खेती बाड़ी का हुनर सीखती बेटियां - फोटो : ETAWAH
बकेवर। बेटों के साथ-साथ बेटियां भी अब खेतीबाड़ी का हुनर सीख रही हैं। जनता कॉलेज बकेवर में कृषि विभाग में तकरीबन एक सैकड़ा छात्राएं एग्रीकल्चर से बीएससी स्नातक व परास्नातक भी कर रही हैं। छात्राएं खेती में कब किस फसल की बुवाई कितना बीज खाद पानी सिंचाई कब देना है, यह सभी हुनर सीख रही हैं।
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छात्राओं का कहना है कृषि में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं होती हैं। जॉब भी मिलने की संभावनाएं अधिक हैं। साथ ही अपने घर परिवार की खेती खेतीबाड़ी को भी किया जा सकता है। जनता कॉलेज बकेवर में एग्रीकल्चर से स्नातक और हॉर्टिकल्चर से परास्नातक की कक्षाएं चलती हैं। कुछ साल पहले तक इन कक्षाओं में पहले छात्रों का ही बोलबाला रहता था। पिछले कुछ सालों में देखने में आ रहा कि तमाम छात्राएं कृषि वैज्ञानिक बनने के लिए कृषि से स्नातक व परास्नातक कर रही हैं। कॉलेज में कृषि स्नातक के प्रथम द्वितीय तृतीय चतुर्थ से लेकर अष्टम सेमेस्टर तक तकरीबन एक सैकड़ा छात्राएं कृषि से अपनी पढ़ाई कर रही है।
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छात्राएं छात्रों के समान ही कॉलेज में खेतों के प्रयोगात्मक कार्यों की निराई-गुड़ाई, सिंचाई और खाद-बीज डालने की कला सीख रही हैं। कन्नौज की कृषि स्नातक कर रही तृतीय सेमेस्टर की छात्रा अनुपम कहती हैं कि बेटियां अब किसी कार्य में पीछे नहीं हैं। उनके घर परिवार में भी खेती होती है और उन्होंने इसीलिए कृषि से स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं। कहा कि इसमें जॉब की भी काफी संभावनाएं होने के साथ्र अगर जॉब नहीं लगती है तो खुद अपनी खेतीबाड़ी कर सकती हैं। सीतापुर की छात्रा कौशल्या कहती हैं कि गांव में परिवार वालों के साथ खेती कराती थी। कृषि के कार्यों से लगाव है, जिसके चलते ही कृषि से स्नातक करने का मन बनाया है।
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सीतापुर की ही छात्रा मौनी वर्मा कहती हैं कि अभी भी कृषि को उद्योग का दर्जा नहीं मिल सका, जबकि कृषि को एक उद्योग के रूप में देखा जाना चाहिए। कृषि के बारे में सीखने से खेतीबाड़ी करना और कराना दोनों में सहायता मिलती है। भिंड के फूप की छात्रा रिया शर्मा कहती है कि कृषि से स्नातक इसलिए कर रहीं कि जॉब की संभावना भी अधिक है, साथ है पारिवारिक पृष्ठभूमि भी कृषि है। कॉलेज के कृषि विभाग के प्राध्यापक डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह व डॉ. आनंद सिंह कहते हैं कि कृषि से काफी संख्या में छात्राएं स्नातक कर रही हैं। छात्राओं में कृषि के प्रति काफी रुचि देखने को मिल रही है।

फोटो संख्या 14-  कौशल्या

फोटो संख्या 14- कौशल्या- फोटो : ETAWAH

फोटो संख्या 15-  मौनी वर्मा

फोटो संख्या 15- मौनी वर्मा- फोटो : ETAWAH

फोटो संख्या 13- अनुपम

फोटो संख्या 13- अनुपम- फोटो : ETAWAH

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