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कला, साहित्य से राष्ट्रवादी समाज का करते निर्माण
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इटावा। कला केवल सौंदर्य का विधान नहीं करती, बल्कि सत्यम, शिवम, सुंदरम से युक्त होकर लोकमंगल का विधान करती है। कला मार्गदर्शिका है तो साहित्य हमारा प्रेरक है। यही मूल भावना हमारी संस्कृति को पोषित करती है।
उक्त विचार संस्कार भारती के कानपुर बुंदेलखंड प्रांत के उपाध्यक्ष दिगंबर नारायण तिवारी ने एक दिवसीय कला साधक एवं साहित्यविद् प्रशिक्षण कार्यशाला में व्यक्त किए।
प्रांतीय महामंत्री सुरेंद्र पांडेय ने कहा कि हमारा साहित्य, हमारी देश काल और परिस्थिति का दस्तावेज है। यह संस्कृति के पुनरुत्थान का सूचक है। समाज को दिशा निर्देशित करता है, यह पीढ़ियों को पथ भ्रमित होने से बचाता है।
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कला और समाज एक दूसरे के बिना जीवित नहीं रह सकते। अमृत महोत्सव समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेश किशोर त्रिपाठी ने बताया कि कला और साहित्य घोर नैराश्य के मध्य ओजस्विता की आशावादी प्रदीप्ति है, जो समाज को प्रकाशित करती है।
फर्रुखाबाद के सह विभाग संयोजक आदेश अवस्थी ने कहा कि साहित्य के दर्पण में ही प्रत्येक समाज प्रतिबिंबित होता है। पूर्व प्राचार्य महेश चंद्र तिवारी ने संस्कृत को भारतीय संस्कृति का आधार स्तंभ बताया।
कार्यक्रम संयोजक कुलदीप अवस्थी ने कहा कि देश समाज और राष्ट्रीय राजनीति जब-जब दिग्भ्रमित हुए कला और साहित्य ने ही सही रास्ता दिखाया है। प्राचीन इतिहास के विधा संयोजक डॉ. शैलेंद्र शर्मा, रसना तिवारी, कवि रोहित चौधरी, अत्रि दीक्षित, कुलदीप मिश्रा, जिलाध्यक्ष अश्वनी कुमार मिश्र, उपाध्यक्ष डॉ. ज्योति भदौरिया, उपाध्यक्ष योगेश कटियार, अनुराग मिश्र असफल ने संबोधित किया।
जीसी जीनीयस स्कूल की छात्राओं ने रंगोली सजाई। रिटायर्ड शिक्षक इंद्रनारायण पांडेय सहित अन्य शिक्षाविदों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
इसके पूर्व पान कुंवर इंटरनेशनल स्कूल की छात्राओं ने कार्यशाला का शुभारंभ संस्कार भारती के ध्येय गीत, नटराज पूजन एवं भारत माता पूजन के साथ किया।
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उक्त विचार संस्कार भारती के कानपुर बुंदेलखंड प्रांत के उपाध्यक्ष दिगंबर नारायण तिवारी ने एक दिवसीय कला साधक एवं साहित्यविद् प्रशिक्षण कार्यशाला में व्यक्त किए।
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प्रांतीय महामंत्री सुरेंद्र पांडेय ने कहा कि हमारा साहित्य, हमारी देश काल और परिस्थिति का दस्तावेज है। यह संस्कृति के पुनरुत्थान का सूचक है। समाज को दिशा निर्देशित करता है, यह पीढ़ियों को पथ भ्रमित होने से बचाता है।
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कला और समाज एक दूसरे के बिना जीवित नहीं रह सकते। अमृत महोत्सव समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेश किशोर त्रिपाठी ने बताया कि कला और साहित्य घोर नैराश्य के मध्य ओजस्विता की आशावादी प्रदीप्ति है, जो समाज को प्रकाशित करती है।
फर्रुखाबाद के सह विभाग संयोजक आदेश अवस्थी ने कहा कि साहित्य के दर्पण में ही प्रत्येक समाज प्रतिबिंबित होता है। पूर्व प्राचार्य महेश चंद्र तिवारी ने संस्कृत को भारतीय संस्कृति का आधार स्तंभ बताया।
कार्यक्रम संयोजक कुलदीप अवस्थी ने कहा कि देश समाज और राष्ट्रीय राजनीति जब-जब दिग्भ्रमित हुए कला और साहित्य ने ही सही रास्ता दिखाया है। प्राचीन इतिहास के विधा संयोजक डॉ. शैलेंद्र शर्मा, रसना तिवारी, कवि रोहित चौधरी, अत्रि दीक्षित, कुलदीप मिश्रा, जिलाध्यक्ष अश्वनी कुमार मिश्र, उपाध्यक्ष डॉ. ज्योति भदौरिया, उपाध्यक्ष योगेश कटियार, अनुराग मिश्र असफल ने संबोधित किया।
जीसी जीनीयस स्कूल की छात्राओं ने रंगोली सजाई। रिटायर्ड शिक्षक इंद्रनारायण पांडेय सहित अन्य शिक्षाविदों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
इसके पूर्व पान कुंवर इंटरनेशनल स्कूल की छात्राओं ने कार्यशाला का शुभारंभ संस्कार भारती के ध्येय गीत, नटराज पूजन एवं भारत माता पूजन के साथ किया।