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उर्दू को किसी धर्म से जोड़ना गलत: मौलाना ओसामा

Sun, 11 Feb 2018 11:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इटावा
अमर उजाला ब्यूरो/इटावा Updated Sun, 11 Feb 2018 11:24 PM IST
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It is wrong to link Urdu to any religion: Maulana Osama
जमीयत उलमा हिंद के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना मतीनुल हक ओसामा कासमी व अन्य। - फोटो : अमर उजाला

इटावा। जमीयत उलमा हिंद के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना मतीनुल हक ओसामा ने कहा कि उर्दू भारतीय भाषा है। उर्दू न तो अरबिस्तान से आई है और न तुर्किस्तान से, बल्कि ये भारत में पैदा हुई। यहीं फली फूली और परवान चढ़ी। इसको मुसलमानों और गै़रमुस्लिमों ने ही परवान चढ़ाया। मदरसों ने शिक्षा का माध्यम उर्दू को बनाकर उर्दू के विकास और उसकी सुरक्षा में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि उर्दू को किसी धर्म, वर्ग और क्षेत्र से जोड़ना गलत है। ये देश की एकता और संस्कृति की भाषा है। वह रविवार को स्थानीय मदरसा अरबिया कुरानिया में मुस्लिम तालीमी सोसाइटी की ओर से आयोजित ‘उर्दू और मदारिस का मुस्तक़बिल’ विषयक सेमिनार में बोल रहे थे।

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उन्होंने कहा कि उर्दू मुसलमानाें की ज़बान नहीं है बल्कि ये हिंदुस्तान की ज़बान है। उर्दू पढ़ाना, उसको तरक़्क़ी देना और उसकी हिफाज़त करना हर सच्चे हिंदुस्तानी की ज़िम्मेदारी है। मौलाना सैयद मुहम्मद साद क़ासमी हैदराबाद ने कहा कि महात्मा गांधी ने आज़ादी के बाद एलान किया था कि इस मुल्क की राष्ट्र भाषा हिंदुस्तानी यानी उर्दू होगी लेकिन उसके साथ ज्यादती की गई और आज उर्दू को उसका हक़ नहीं मिल पा रहा है। इसलिए हम सब को मिलजुलकर एकता के साथ उर्दू को उसका जायज़ हक़ दिलाने की कोशिश करनी होगी। आयोजक मौलाना तारिक़ शम्सी ने कहा उर्दू एक तहज़ीब का नाम है। अपने घरों में इसको रिवाज देकर और नई नस्ल को उर्दू की तालीम देकर  इस तहज़ीब की हिफाज़त करना हमारी नैतिक ज़िम्मेदारी है। गोष्ठी में हाफिज़ अब्दुर्रशीद, मौलाना वजीहउद्दीन कासमी, हाफिज मुहम्मद हस्सान, हाफिज अज़मत अली, हाफिज अब्दुल मालिक, मौलाना उमर गुफरानी, मौलाना इक़बाल कासमी, मौलाना वसीम कासमी, मुफ्ती अनस नूर कासमी, हाफिज़  नसीम, हाफिज यासीन, हाजी अब्दुर्रशीद, मुहम्मद आरिफ,, सैयद फारूख अली, मुहम्मद सुहेल, फरहान रफी, मुहम्मद आसिफ,, मुहम्मद हारिस आदि ने भाग लिया। संचालन मुफ्ती सैयद मुहम्मद हस्सान हसनी ने किया।

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