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Etawah News: भूसा खरीद टेंडर में मनमानी की शिकायत पर जांच कमेटी गठित
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इटावा। पशुपालन विभाग के अंतर्गत बाइस ख्वाजा सड़क स्थित भदावरी भैंस फार्म में भूसा खरीद के टेंडर में मनमानी का मामला गरमा गया है। टेंडर प्रक्रिया में पक्षपात का आरोप लगाते हुए शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री पोर्टल तक गुहार लगाई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीडीओ अजय कुमार गौतम ने तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी है।
शिकायतकर्ता उत्कर्ष मिश्रा ने जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए भदावरी केंद्र के संयुक्त निदेशक पर मनमानी के आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने भूसा सप्लाई के लिए टेंडर डाला था, जिसे बिना किसी वाजिब और स्पष्ट कारण के निरस्त कर दिया गया। उन्होंने इसे अधिकारियों की मनमानी और नियमों के विरुद्ध बताया है। सीडीओ अजय कुमार गौतम ने इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए कमेटी बनाई है।
इसमें डीडीओ राकेश प्रसाद, सीवीओ डॉ. धर्मेंद्र सिंह व मुख्य कोषाधिकारी डोंगरा शक्ति को शामिल किया गया है। सीवीओ डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि प्राथमिक जांच में सामने आया है कि कुल तीन टेंडर प्राप्त हुए थे, जिनमें से उत्कर्ष मिश्रा और महेंद्र नामक दो आवेदकों के दर एक समान (समान दर) पाए गए थे। जबकि तीसरे आवेदक के दर काफी ज्यादा थे। ऐसी स्थिति में नियमानुसार दोनों पक्षों से शपथ पत्र मांगा गया था, लेकिन संबंधित ठेकेदारों ने शपथ पत्र उपलब्ध नहीं कराया।
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इसी तकनीकी कमी के कारण प्रक्रिया प्रभावित हुई। इसके साथ ही संयुक्त निदेशक भदावरी की ओर से टेंडर निरस्त करने पीछे अन्य पक्ष भी रखे गए हैं। सभी की जांच की जा रही है। सीवीओ ने बताया कि सात मई को विकास भवन में सभी पक्षों को तलब किया गया है। इस दिन शिकायतकर्ता और संबंधित अधिकारियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जाएगी, ताकि वास्तविक स्थितियों को स्पष्ट कर रिपोर्ट तैयार की जा सके।
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शिकायतकर्ता उत्कर्ष मिश्रा ने जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए भदावरी केंद्र के संयुक्त निदेशक पर मनमानी के आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने भूसा सप्लाई के लिए टेंडर डाला था, जिसे बिना किसी वाजिब और स्पष्ट कारण के निरस्त कर दिया गया। उन्होंने इसे अधिकारियों की मनमानी और नियमों के विरुद्ध बताया है। सीडीओ अजय कुमार गौतम ने इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए कमेटी बनाई है।
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इसमें डीडीओ राकेश प्रसाद, सीवीओ डॉ. धर्मेंद्र सिंह व मुख्य कोषाधिकारी डोंगरा शक्ति को शामिल किया गया है। सीवीओ डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि प्राथमिक जांच में सामने आया है कि कुल तीन टेंडर प्राप्त हुए थे, जिनमें से उत्कर्ष मिश्रा और महेंद्र नामक दो आवेदकों के दर एक समान (समान दर) पाए गए थे। जबकि तीसरे आवेदक के दर काफी ज्यादा थे। ऐसी स्थिति में नियमानुसार दोनों पक्षों से शपथ पत्र मांगा गया था, लेकिन संबंधित ठेकेदारों ने शपथ पत्र उपलब्ध नहीं कराया।
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इसी तकनीकी कमी के कारण प्रक्रिया प्रभावित हुई। इसके साथ ही संयुक्त निदेशक भदावरी की ओर से टेंडर निरस्त करने पीछे अन्य पक्ष भी रखे गए हैं। सभी की जांच की जा रही है। सीवीओ ने बताया कि सात मई को विकास भवन में सभी पक्षों को तलब किया गया है। इस दिन शिकायतकर्ता और संबंधित अधिकारियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जाएगी, ताकि वास्तविक स्थितियों को स्पष्ट कर रिपोर्ट तैयार की जा सके।