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प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग नहीं रुका तो बढ़ेगा तापमान

Sat, 23 Apr 2016 12:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा Updated Sat, 23 Apr 2016 12:47 AM IST
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If the temperature did not stop the abuse of natural resources grow
बाल वन कार्यक्रम के अंतर्गत कस्तूरबा आवासीय बालिका विद्यालय में पौधे रोपित करते स्कूली बच्चे। - फोटो : अमी उजाला
राज्य वन्य जीव बोर्ड उत्तर प्रदेश के सदस्य डा. राजीव चौहान ने कहा कि अगर प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग इसी प्रकार जारी रहा तो 21वी सदी में तापमान में 3.3 से 10 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि होगी।
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चौहान पृथ्वी दिवस के मौके पर बाल वन कार्यक्रम के अंतर्गत कस्तूरबा आवासीय बालिका विद्यालय में सोसाइटी फार कंजर्वेशन आफ  नेचर एवं सामाजिक वानिकी प्रभाग इटावा की ओर से आयोजित पौधरोपण कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि 20वीं सदी में विश्व की सतह का औसत तापमान 0.8 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा है । इस शताब्दी में उष्णता का प्रभाव बढ़ता ही जा रहा है, जो यह साबित करता है कि हरित गृह प्रभाव के परिणामस्वरूप जलवायु परिवर्तन का दौर आरंभ हो चुका है।  वैश्विक जलवायु परिवर्तन के अनेक प्रभाव होंगे, जिनमें से ज्यादातर हानिकारक होंगे।
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नीलम सिंह ने बताया कि आज दुनिया के सभी विकसित और विकासशील देश ग्लोबल वार्मिग की समस्या के प्रति चिंतित हैं। अब समय आ गया है कि इस समस्या से निपटने के लिये सार्थक प्रयास किए जाएं। यह जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं है बल्कि हम सभी की है। कहा कि हम सब पेट्रोल, डीजल और बिजली का उपयोग कम कर हानिकारक गैसों के उत्सर्जन को कम करना चाहिए। जंगलों के विनाश को रोकने और पोधरोपण को बढ़ावा देने से इस समस्या के निदान में मदद मिलेगी।
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स्कान के सह समन्वयक संजीव सिंह ने कहा प्रकृति ने हमें कई रंग दिए हैं।  कैसे सुबह से रात होती है, कई जगह इतनी गर्मी और कई जगह बर्फ  से ढ़की चादर, कहीं सूखा पड़ा है। कहीं बारिश का कहर है समय के साथ मौसम मे बदलाव कुदरत के नजारे हैं। वार्डन मीनाक्षी दीक्षित ने कहा कि हमारे स्वस्थ जीवन के लिए प्रकृति बहुत जरूरी है।  इसलिए हमें इसे बचाकर रखना पड़ेगा। परंतु हम प्रकृति का गलत उपयोग कर इसका संतुलन बिगाड़ रहे हैं,  जिसकी वजह से हम इसके प्रकोप से नहीं बच पाते।


प्रधानाध्यापक बैदपुरा अनवार अहमद ने कहा कि बिजली की ऊर्जा के बजाय शुद्ध और साफ  ऊर्जा का उपयोग करना चाहिए।  सौर ऊर्जा, वायु एवं जियोथर्मल से उत्पन्न ऊर्जा का इस्तेमाल करना चाहिए। अध्यापक मंजू भदौरिया ने बताया कि तेल जलाने और कोयले के इस्तेमाल, परिवहन के साधनों और बिजली के सामानों के स्तर को घटाने से ग्लोबल वार्मिग के प्रभाव को घटाया जा सकता है।



पृथ्वी दिवस पर बाल वन कार्यक्रम में चयनित पचास विद्यालयों में पौधरोपण किया गया। साथ ही टीचर्स क्लब ने सहयोग करते हुए प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में पौधरोपण किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में नीलेश, भूपेन्द्र भदौरिया, सूर्यप्रभा, एकता, आशीष, मीनू, आंकाक्षा, प्रवीणा, जमादार सिंह, संजीव तोमर, प्रमोद कुमार का उल्लेखनीय योगदान दिया।
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