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बनेंगे शेल्टर हाउस, बेघरों को मिलेगा ठिकाना
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
Updated Fri, 19 Dec 2014 12:20 AM IST
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जिनका कोई ठौर ठिकाना नहीं है, ऐसे लोगों के लिए अब शहर से दो किमी दूर मानिकपुर मोहन में शेल्टर हाउस (आश्रय) बनेगा। डूडा की यह योजना मंजूरी की हद तक पहुंच चुकी है। इसमें महिला और पुुरुष दोनों के लिए अलग-अलग रहने की व्यवस्था रहेगी। कुल 50 लोग इन शेल्टर हाउस में रह सकेंगे।
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राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत शहरी बेघरों के लिए शेल्टर हाउस बनाने की योजना इसी वर्ष चालू हुई है। जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) के माध्यम से चयनित एजेंसी इस शेल्टर हाउस की देखरेख का जिम्मा संभालेगी। कंस्ट्रक्सन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएनडीएस) इस शेल्टर हाउस को बनाएगी।
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इस शेल्टर हाउस के लिए नगरपालिका ने मुफ्त में जमीन मुहैया कराई है। मानिकपुर मोहन में 0.16 एकड़ जमीन पर इसका निर्माण कराया जाएगा। सीएनडीएस ने योजनागत डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई है। डूडा स्तर से इसे शासन के पास मंजूरी के लिए भेजा जाना है।
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यह मिलेंगी सुविधाएं
50 लोगों केे शेल्टर हाउस में 14 महिलाओं के रहने की बिल्कुल अलग व्यवस्था होगी। यदि कोई बेघर परिवार है, तो उसके लिए भी यहां दो कमरे होंगे। एक कमरे में तीन लोग रह सकेंगे। रसोईघर, स्टोर रूम, डाइनिंग हाल भी होगा। खेलकूद व काउंसिलिंग की भी व्यवस्था होगी। बीमार लोगों के लिए सिक रूम भी होगा। कंप्यूटर रूम भी स्थापित किया जाएगा। यहां रहने वालों को बेसिक टेलीफोन की सुविधा मुहैया होगी।
रखरखाव पर 28.14 लाख होंगे खर्च
7000 वर्ग फीट में स्थापित होने वाले शेल्टर हाउस के निर्माण के लिए सीएनडीएस ने डीपीआर में 137.26 लाख रुपये खर्च होने का आंकलन किया है। निर्माण पूरा होने के बाद इसका रखरखाव निजी एजेंसी के पास होगा। पांच वर्ष के रखरखाव के लिए 28.14 लाख रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। जबकि इमारत में पंखा, तखत, खाने के सामान की आपूर्ति, रजाई-गद्दा आदि के लिए 3.54 लाख रुपये खर्च किए जाने की बात कही गई है।
गर्मियों तक तैयार हो जाने की उम्मीद
विभागीय जानकारी के अनुसार शेल्टर हाउस आने वाली गर्मियों तक तैयार हो जाएंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि डीपीआर भेजने के बाद 15 जनवरी तक धनराशि डूडा को मिल जाएगी। उसके साथ ही सीएनडीएस निर्माण कार्य शुरू कर देगी। अभी शासन से ऐसी कोई गाइड लाइन नहीं मिली है कि बेघरों का चयन कैसे होगा। अलबत्ता शेल्टर हाउस में रहने वाले बेघरों के देखरेख का जिम्मा निजी संस्था के हवाले रहेगा।