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एक डोज बाहर से लेने की मजबूरी
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कुत्ता काटे मरीज को इंजेक्शन लगाते स्वास्थ्य कर्मी। संवाद
- फोटो : ETAWAH
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इटावा। कुत्ता अथवा बंदर के काटने पर लगने वाले इंजेक्शन की जिला अस्पताल में सिर्फ तीन डोजे लगाई जा रही हैं। मरीज को एक डोज बाहर से खरीदकर लगवानी पड़ रही है।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ.महेंद्र कुमार ने बताया कुत्ता अथवा बंदर काटने के रोजाना 50 मरीज आ रहे हैं। किसी भी पशु के काटने पर सबसे पहले आरआईजी और एआरवी इंजेक्शन लगाया जाता है। आरआईजी (रेवीज इम्योनिलो ग्लोविनो) लंबे समय से जिला अस्पताल और सैफई में नहीं हैं। सीएमओ डॉ.भगवान दास ने बताया कि लंबे समय से जिला अस्पताल में यह इंजेक्शन नहीं आ रहा है।
डॉ. महेंद्र कुमार ने बताया कुत्ता और बंदर काटने के बाद चार इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इनमें पहला इंजेक्शन के बाद तीन, सात और 28 दिन में लगता है। आरआईजी इंजेक्शन लगते ही तत्काल एंटीबॉडी काम करने लगती है। यह इंजेक्शन घाव में या चारों ओर लगाया जाता है। इसका असर 25 दिन तक रहता है। आरआईजी इंजेक्शन लगवाने के लिए मरीज को 514 रुपये खर्च करना पड़ता है। यदि मरीज का वजन 35 किलो से अधिक है तो उसे दो गुना खर्च करना पड़ता है। डॉक्टरों ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में आरआईजी इंजेक्शन आपूर्ति करने वाली कंपनियां अब कोरोना वैक्सीन बनाने में लगी हैं। इस वजह से आपूर्ति नहीं मिल पा रही है।
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जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ.महेंद्र कुमार ने बताया कुत्ता अथवा बंदर काटने के रोजाना 50 मरीज आ रहे हैं। किसी भी पशु के काटने पर सबसे पहले आरआईजी और एआरवी इंजेक्शन लगाया जाता है। आरआईजी (रेवीज इम्योनिलो ग्लोविनो) लंबे समय से जिला अस्पताल और सैफई में नहीं हैं। सीएमओ डॉ.भगवान दास ने बताया कि लंबे समय से जिला अस्पताल में यह इंजेक्शन नहीं आ रहा है।
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डॉ. महेंद्र कुमार ने बताया कुत्ता और बंदर काटने के बाद चार इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इनमें पहला इंजेक्शन के बाद तीन, सात और 28 दिन में लगता है। आरआईजी इंजेक्शन लगते ही तत्काल एंटीबॉडी काम करने लगती है। यह इंजेक्शन घाव में या चारों ओर लगाया जाता है। इसका असर 25 दिन तक रहता है। आरआईजी इंजेक्शन लगवाने के लिए मरीज को 514 रुपये खर्च करना पड़ता है। यदि मरीज का वजन 35 किलो से अधिक है तो उसे दो गुना खर्च करना पड़ता है। डॉक्टरों ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में आरआईजी इंजेक्शन आपूर्ति करने वाली कंपनियां अब कोरोना वैक्सीन बनाने में लगी हैं। इस वजह से आपूर्ति नहीं मिल पा रही है।
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