फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etawah News ›   health

एक डोज बाहर से लेने की मजबूरी

Fri, 24 Jun 2022 11:09 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jun 2022 11:09 PM IST
विज्ञापन
health
कुत्ता काटे मरीज को इंजेक्शन लगाते स्वास्थ्य कर्मी। संवाद - फोटो : ETAWAH
इटावा। कुत्ता अथवा बंदर के काटने पर लगने वाले इंजेक्शन की जिला अस्पताल में सिर्फ तीन डोजे लगाई जा रही हैं। मरीज को एक डोज बाहर से खरीदकर लगवानी पड़ रही है।
विज्ञापन

जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ.महेंद्र कुमार ने बताया कुत्ता अथवा बंदर काटने के रोजाना 50 मरीज आ रहे हैं। किसी भी पशु के काटने पर सबसे पहले आरआईजी और एआरवी इंजेक्शन लगाया जाता है। आरआईजी (रेवीज इम्योनिलो ग्लोविनो) लंबे समय से जिला अस्पताल और सैफई में नहीं हैं। सीएमओ डॉ.भगवान दास ने बताया कि लंबे समय से जिला अस्पताल में यह इंजेक्शन नहीं आ रहा है।
विज्ञापन

डॉ. महेंद्र कुमार ने बताया कुत्ता और बंदर काटने के बाद चार इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इनमें पहला इंजेक्शन के बाद तीन, सात और 28 दिन में लगता है। आरआईजी इंजेक्शन लगते ही तत्काल एंटीबॉडी काम करने लगती है। यह इंजेक्शन घाव में या चारों ओर लगाया जाता है। इसका असर 25 दिन तक रहता है। आरआईजी इंजेक्शन लगवाने के लिए मरीज को 514 रुपये खर्च करना पड़ता है। यदि मरीज का वजन 35 किलो से अधिक है तो उसे दो गुना खर्च करना पड़ता है। डॉक्टरों ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में आरआईजी इंजेक्शन आपूर्ति करने वाली कंपनियां अब कोरोना वैक्सीन बनाने में लगी हैं। इस वजह से आपूर्ति नहीं मिल पा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed