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कॉर्डियोलॉजी की धड़कने बंद, दिल का इलाज नहीं
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उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई
- फोटो : ETAWAH
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सैफई। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान संस्थान सैफई में कार्डियोलॉजी विभाग की धड़कनें रुक गई हैं। इसलिए दिल का इलाज नहीं हो पा रहा है। 10 महीने से ओपीडी बंद होने के कारण मरीजों को आगरा, कानपुर और दूसरे शहरों की दौड़ लगानी पड़ रही है। प्रबंधन मरीजों को कोई राहत नहीं दे पा रहा है।
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान संस्थान सैफई में कार्डियोलॉजी विभाग में कार्यरत सहायक प्रोफेसर डॉ. समीर सराफ को वित्तीय अनियमितताओं में निलंबित कर दिया गया था। उन पर आरोप थे कि उन्होंने खराब गुणवत्ता के पेसमेकर लगाकर मरीजों की जान जोखिम में डाली है। उनके खिलाफ हाल ही में एफआईआर भी दर्ज की गई है। डॉ. सर्राफ के निलंबन के बाद इस विभाग में न तो नई नियुक्ति हुई और न ही समीर सर्राफ के खिलाफ अन्य कोई कार्रवाई। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने मरीजों के हितों को दरकिनार कर आपसी खींचतान के चलते इस मामले को लटकाए रखा। अब हाल ही में नए कुलपति की नियुक्ति की गई है। उम्मीद की जा रही है कि कोई पुख्ता कदम उठाया जाएगा। 10 महीने से कार्डियोलॉजी विभाग की ओपीडी शुरू नहीं की गई है।
मेडिकल यूनिवर्सिटी और स्वास्थ्य महकमे से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन में बैठे कुछ लोगों ने इस मामले को जानबूझकर लटकाया है। उनका कहना है कि सैफई में हृदय रोगियों को इलाज न मिलने से आगरा-कानपुर के मेडिकल माफिया के हित प्रभावित हो रहे थे। इस वजह से ओपीडी व आपरेशन शुरू नहीं किए जा रहे है। यहां पर इलाज मिलने से लोगों को राहत मिली हुई थी।
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निलंबित चल रहे डॉक्टर की जांच रिपोर्ट आ गई है। जल्दी कमेटी में रखी जाएगी। निर्णय लेकर कार्डियोलॉजी सुचारू रूप से चालू कराई जाएगी।
-प्रोफेसर डॉ. प्रभात कुमार सिंह, कुलपति
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उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान संस्थान सैफई में कार्डियोलॉजी विभाग में कार्यरत सहायक प्रोफेसर डॉ. समीर सराफ को वित्तीय अनियमितताओं में निलंबित कर दिया गया था। उन पर आरोप थे कि उन्होंने खराब गुणवत्ता के पेसमेकर लगाकर मरीजों की जान जोखिम में डाली है। उनके खिलाफ हाल ही में एफआईआर भी दर्ज की गई है। डॉ. सर्राफ के निलंबन के बाद इस विभाग में न तो नई नियुक्ति हुई और न ही समीर सर्राफ के खिलाफ अन्य कोई कार्रवाई। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने मरीजों के हितों को दरकिनार कर आपसी खींचतान के चलते इस मामले को लटकाए रखा। अब हाल ही में नए कुलपति की नियुक्ति की गई है। उम्मीद की जा रही है कि कोई पुख्ता कदम उठाया जाएगा। 10 महीने से कार्डियोलॉजी विभाग की ओपीडी शुरू नहीं की गई है।
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मेडिकल यूनिवर्सिटी और स्वास्थ्य महकमे से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन में बैठे कुछ लोगों ने इस मामले को जानबूझकर लटकाया है। उनका कहना है कि सैफई में हृदय रोगियों को इलाज न मिलने से आगरा-कानपुर के मेडिकल माफिया के हित प्रभावित हो रहे थे। इस वजह से ओपीडी व आपरेशन शुरू नहीं किए जा रहे है। यहां पर इलाज मिलने से लोगों को राहत मिली हुई थी।
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निलंबित चल रहे डॉक्टर की जांच रिपोर्ट आ गई है। जल्दी कमेटी में रखी जाएगी। निर्णय लेकर कार्डियोलॉजी सुचारू रूप से चालू कराई जाएगी।
-प्रोफेसर डॉ. प्रभात कुमार सिंह, कुलपति