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15 हजार वेतन और कर्मचारी का दर्जा दें
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
Updated Mon, 27 Jun 2016 11:55 PM IST
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सभा में उपस्थित आशा, आंगनबाड़ी और रसोइया।
- फोटो : अमर उजाला
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आशा, रसोइया, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने कर्मचारी का दर्जा, 15000 मासिक वेतन, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, मातृत्व लाभ और अन्य लंबित मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि मांगे पूरी न होने पर 2 सितंबर को होने वाली देशव्यापी श्रमिक हड़ताल में शामिल होकर रेल, सड़क चक्का जाम किया जाएगा।
आशा और आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन, मिडडे मील रसोइयां कर्मचारी यूनियन ने संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। इसमें ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, मध्याह्न भोजन स्कीमों को स्थायी कर इनमें ठेकेदारी प्रथा, भ्रष्टाचार को रोकने, श्रम कानूनों को लागू करने, रसोइयों का प्रति वर्ष नवीनीकरण बंद करने, सभी के भुगतान बैंक खातों से करने की मांग की गई। सामाजिक भेदभाव समाप्त करने, उचित प्रशिक्षण देकर विभागों में पदोन्नति, प्रसूता अवस्था में 6 माह की छुट्टी आदि मांगें भी की गईं।
किसान सभा के प्रांतीय नेता मुकुट सिंह ने बड़ी तादाद में महिलाओं की उपस्थिति पर खुशी जाहिर की। कहा कि इस लड़ाई को और तेज और व्यापक बनाना होगा। 2 सितंबर को देशव्यापी श्रमिक हड़ताल में शामिल होकर 15,000 न्यूनतम वेतन और कर्मचारी का दर्जा सहित अन्य मांगो के लिए सरकार को बाध्य करना होगा।
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स्कीम वर्कर्स महिलाओं की रैली को किसान सभा की राज्य समिति के सदस्य रामप्रकाश पोरवाल, जिला मंत्री संतोष शाक्य, माकपा शहर कमेटी के मंत्री प्रेमशंकर यादव, आशा कर्मचारी यूनियन की सर्वेश कुमारी, सुमित्रा देवी, सरस्वती देवी, रेखा देवी, माया देवी, राजनश्री, कमलेश कुमारी यादव, मालती देवी, दाउदयाल यादव, नीरज कुमारी, नीलम पांडेय, कुसमा देवी, विजय देवी, मानसिंह (ओरैया), रसोइया यूनियन की सत्यवती, सुधीर दुबे, पिंकी देवी, देवेंद्र सिंह, आंगनबाड़ी बृजकिशोरी, सरला देवी, कपूरी देवी, एसएफआई के शैलेन्द्र शाक्य, डीवाईएफआई के मनोज राठौर आदि ने संबोधित किया। अध्यक्षता रजनी भदौरिया, सरस्वती, रामादेवी के अध्यक्ष मंडल ने तथा संचालन अमर सिंह शाक्य ने किया।
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आशा और आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन, मिडडे मील रसोइयां कर्मचारी यूनियन ने संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। इसमें ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, मध्याह्न भोजन स्कीमों को स्थायी कर इनमें ठेकेदारी प्रथा, भ्रष्टाचार को रोकने, श्रम कानूनों को लागू करने, रसोइयों का प्रति वर्ष नवीनीकरण बंद करने, सभी के भुगतान बैंक खातों से करने की मांग की गई। सामाजिक भेदभाव समाप्त करने, उचित प्रशिक्षण देकर विभागों में पदोन्नति, प्रसूता अवस्था में 6 माह की छुट्टी आदि मांगें भी की गईं।
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किसान सभा के प्रांतीय नेता मुकुट सिंह ने बड़ी तादाद में महिलाओं की उपस्थिति पर खुशी जाहिर की। कहा कि इस लड़ाई को और तेज और व्यापक बनाना होगा। 2 सितंबर को देशव्यापी श्रमिक हड़ताल में शामिल होकर 15,000 न्यूनतम वेतन और कर्मचारी का दर्जा सहित अन्य मांगो के लिए सरकार को बाध्य करना होगा।
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स्कीम वर्कर्स महिलाओं की रैली को किसान सभा की राज्य समिति के सदस्य रामप्रकाश पोरवाल, जिला मंत्री संतोष शाक्य, माकपा शहर कमेटी के मंत्री प्रेमशंकर यादव, आशा कर्मचारी यूनियन की सर्वेश कुमारी, सुमित्रा देवी, सरस्वती देवी, रेखा देवी, माया देवी, राजनश्री, कमलेश कुमारी यादव, मालती देवी, दाउदयाल यादव, नीरज कुमारी, नीलम पांडेय, कुसमा देवी, विजय देवी, मानसिंह (ओरैया), रसोइया यूनियन की सत्यवती, सुधीर दुबे, पिंकी देवी, देवेंद्र सिंह, आंगनबाड़ी बृजकिशोरी, सरला देवी, कपूरी देवी, एसएफआई के शैलेन्द्र शाक्य, डीवाईएफआई के मनोज राठौर आदि ने संबोधित किया। अध्यक्षता रजनी भदौरिया, सरस्वती, रामादेवी के अध्यक्ष मंडल ने तथा संचालन अमर सिंह शाक्य ने किया।