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Etawah News: शिक्षकों की कमी से जीआईसी सूने, तीन साल में 1,568 छात्र घटे
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इटावा। जिले के 21 राजकीय इंटर कॉलेजों (जीआईसी) में छात्र संख्या लगातार घट रही है। वर्ष 2023 में 6,586 छात्र नामांकित थे, जो अगले तीन वर्षों में घटकर 5,018 रह गए। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसका सीधा असर नामांकन पर भी दिखाई दे रहा है।
तीन वर्षों के दौरान छात्रों की संख्या में 1,568 की गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में यह संख्या 5,581 और वर्ष 2025 में 5,441 थी। जिले के राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। 371 स्वीकृत पदों के सापेक्ष केवल 125 शिक्षक ही कार्यरत हैं। 192 पद अभी भी खाली हैं।
बड़ी संख्या में पद खाली होने से कई विद्यालयों में विषयवार शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विद्यार्थियों का रुझान भी राजकीय विद्यालयों की ओर नहीं बढ़ पा रहा है। शिक्षा से जुड़े जानकारों का कहना है कि जब तक रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होगी, तब तक छात्र संख्या बढ़ाना बड़ी चुनौती बना रहेगा।
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राजकीय कॉलेजों में सीमित संसाधनों में पढ़ाई करवाई जा रही है। उम्मीद है इन कॉलेजों में इसी सत्र में ही शिक्षकों की तैनाती होगी, इससे शैक्षिक व्यवस्था और बेहतर होगी। नामांकन बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे है। - अतुल कुमार सिंह, डीआईओएस
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तीन वर्षों के दौरान छात्रों की संख्या में 1,568 की गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में यह संख्या 5,581 और वर्ष 2025 में 5,441 थी। जिले के राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। 371 स्वीकृत पदों के सापेक्ष केवल 125 शिक्षक ही कार्यरत हैं। 192 पद अभी भी खाली हैं।
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बड़ी संख्या में पद खाली होने से कई विद्यालयों में विषयवार शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विद्यार्थियों का रुझान भी राजकीय विद्यालयों की ओर नहीं बढ़ पा रहा है। शिक्षा से जुड़े जानकारों का कहना है कि जब तक रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होगी, तब तक छात्र संख्या बढ़ाना बड़ी चुनौती बना रहेगा।
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राजकीय कॉलेजों में सीमित संसाधनों में पढ़ाई करवाई जा रही है। उम्मीद है इन कॉलेजों में इसी सत्र में ही शिक्षकों की तैनाती होगी, इससे शैक्षिक व्यवस्था और बेहतर होगी। नामांकन बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे है। - अतुल कुमार सिंह, डीआईओएस