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सोते में भी सताता मौत का खौफ

Fri, 15 May 2015 11:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा Updated Fri, 15 May 2015 11:09 PM IST
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Even in sleep persecuting fear of death

जेल की सुरक्षा का जिम्मा उठाने वाले बंदीरक्षकों के

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परिवारों की जान सांसत में पड़ी रहती है। जर्जर मकानों में रहने वाले इन लोगों को सोते समय भी मौत का खौफ सताता है कि पता नहीं कब मकान भरभराकर गिर पड़े। इनके आवासों की दीवारों और छताें में दरारें आ गई हैं। शिकायत करने के बाद भी जेल प्रशासन आवासों की मरम्मत नहीं करा रहा है।

जिला कारागार में बंदी रक्षकों के रहने के लिए जेल के निर्माण के समय करीब तीस आवासों का निर्माण कराया गया था। बाद में और आवास बनाए गए थे। इस समय जेल कैंपस में अफसरों और कर्मचारियों के करीब 90 आवास हैं। इनमें से 38 आवास जर्जर हो चुके हैं।

इन्हीं जर्जर मकानों में बंदीरक्षक और उनके परिवार रहने को मजबूर हैं। जेल प्रशासन ने बंदी रक्षकों के लिए बनाए गए आवासों की मरम्मत का काम काफी समय से नहीं कराया है। आवास में रहने वाले बंदीरक्षक तथा उनके परिजनों ने बताया कि आवासों की दीवारें तथा छतें जर्जर हो गई हैं।

कमरों के दरवाजे तो सड़ गल कर बर्बाद हो गए हैं। बाहरी दरवाजों की मरम्मत सुरक्षा की दृष्टि से अपने स्तर पर करा ली थी। बरसात के दिनों में तो हालात और बदतर हो जाते हैं।

बारिश का पानी उनके कमरों में भर जाता है। मकानों की मरम्मत के लिए कई बार जेल प्रशासन को लिखा जा चुका है, लेकिन आवासों की मरम्मत नहीं कराई गई। मरम्मत न होने से वह जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं। परिवार को हमेशा मकानों के गिरने का खतरा बना रहता है।

38 आवास काफी जर्जर हो गए हैं। इन आवासों में बंदीरक्षक रहते हैं। बंदीरक्षकों के कहने पर समय-समय पर आवासों की मरम्मत कराई जाती है। अब तो जेल दूसरी जगह शिफ्ट हो रही है। नई जेल में कर्मचारियों के आवास की कोई समस्या नहीं रहेगी।
-पवन त्रिवेदी, जेलर।

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