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Etawah News: अंगद ने रावण के दरबार में जमाया पैर, मेघनाथ की शक्ति से मूर्छित हुए लक्ष्मण
Mon, 19 Oct 2026 12:04 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Mon, 19 Oct 2026 12:04 AM IST
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फोटो 13: मैदानी रामलीला में लंका में प्रवेश करता राम दल। संवाद
जसवंतनगर। मैदानी रामलीला में रविवार को प्रभावशाली मंचन हुआ। इसमें समुद्र सेतु निर्माण, विभीषण की शरणागति और अंगद-रावण संवाद की लीलाएं दिखाई गईं। लक्ष्मण शक्ति के मंचन ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
रामलीला मैदान में दोपहर बाद शुरू हुई लीला देखने भारी भीड़ उमड़ी। कलाकारों के शानदार अभिनय पर दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं। नल-नील के सहयोग से वानर सेना ने समुद्र पर सेतु बनाया। राम की सेना सेतु पार कर लंका की सीमा में पहुंच गई।
विभीषण ने रावण को श्रीराम को भगवान बताते हुए सीता को लौटाने की सलाह दी। रावण क्रोधित होकर विभीषण को लात मारकर दरबार से निकाल दिया। इसके बाद विभीषण राम की शरण में चले गए। राम के दूत अंगद ने रावण को सीता वापस कर संधि करने को कहा।
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रावण के न मानने पर अंगद ने दरबार में अपना पैर जमाया। उन्होंने चुनौती दी कि यदि कोई पैर हिला दे तो वे बिना युद्ध लौट जाएंगे। रावण के कई बलशाली योद्धा असफल रहे। रावण स्वयं आगे बढ़ा तो अंगद ने उसे श्रीराम के पैर पकड़ने की सलाह दी। इसके बाद रावण ने मेघनाथ को युद्ध के लिए भेजा।
मेघनाथ और लक्ष्मण के बीच भीषण युद्ध हुआ। मेघनाथ ने शक्ति का प्रहार कर लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया। राम दल में हाहाकार मच गया। हनुमान सुषेण वैद्य को लेकर पहुंचे, जिन्होंने संजीवनी बूटी से जान बचने की बात कही। बूटी की पहचान न होने पर हनुमान पूरा पहाड़ ही उठा लाए और लक्ष्मण की मूर्छा दूर हुई।
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रामलीला मैदान में दोपहर बाद शुरू हुई लीला देखने भारी भीड़ उमड़ी। कलाकारों के शानदार अभिनय पर दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं। नल-नील के सहयोग से वानर सेना ने समुद्र पर सेतु बनाया। राम की सेना सेतु पार कर लंका की सीमा में पहुंच गई।
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विभीषण ने रावण को श्रीराम को भगवान बताते हुए सीता को लौटाने की सलाह दी। रावण क्रोधित होकर विभीषण को लात मारकर दरबार से निकाल दिया। इसके बाद विभीषण राम की शरण में चले गए। राम के दूत अंगद ने रावण को सीता वापस कर संधि करने को कहा।
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रावण के न मानने पर अंगद ने दरबार में अपना पैर जमाया। उन्होंने चुनौती दी कि यदि कोई पैर हिला दे तो वे बिना युद्ध लौट जाएंगे। रावण के कई बलशाली योद्धा असफल रहे। रावण स्वयं आगे बढ़ा तो अंगद ने उसे श्रीराम के पैर पकड़ने की सलाह दी। इसके बाद रावण ने मेघनाथ को युद्ध के लिए भेजा।
मेघनाथ और लक्ष्मण के बीच भीषण युद्ध हुआ। मेघनाथ ने शक्ति का प्रहार कर लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया। राम दल में हाहाकार मच गया। हनुमान सुषेण वैद्य को लेकर पहुंचे, जिन्होंने संजीवनी बूटी से जान बचने की बात कही। बूटी की पहचान न होने पर हनुमान पूरा पहाड़ ही उठा लाए और लक्ष्मण की मूर्छा दूर हुई।