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बारिश से शहर में आफत, गलियां डूबीं, बिजली गुल
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बारिश के दौरान शास्त्री चौराहे पर लगा वाहनों का जमावड़ा
- फोटो : ETAWHA
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इटावा। 24 घंटे से अधिक समय हुई बारिश ने शहर में आफत ला दी। गलियों और सड़कों में जहां जलभराव हो गया, वहीं कई मोहल्लों की बिजली भी गुल हो गई। सबसे ज्यादा जलभराव लाइनपार क्षेत्र में हुआ। कानपुर-इटावा हाईवे की सर्विस रोड पर तो घुटनों तक पानी शाम तक भरा रहा। मंडी में भी कई जगह जलभराव हो गया।
शहर के यदुवंश नगर, शकुंतला नगर, लोहिया गैस गोदाम के आसपास, नहर के दोनों तरफ बसी घनी आबादी में गलियों में बुरा हाल रहा। यहां पानी के निकास का कोई समुचित साधन नहीं है। नई मंडी से निकला नाला वैसे ही गंदगी से भरा रहता है। मैनपुरी रेलवे क्रासिंग पर बने अधोगामी सेतु के नीचे भी पानी भरा रहा। पानी की मात्रा कम होने से वाहनों की आवाजाही में कोई दिक्कत नहीं हुई। राजकीय इंटर कालेज के सामने भी बारिश का पानी भर गया।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि बारिश के पानी से पूरे शहर में जलभराव की कहीं कोई शिकायत नहीं आई है। रुक-रुककर हुई बारिश से स्थिति सामान्य बनी रही। बारिश के मौसम से पहले शहर में पानी की निकासी के लिए बड़ा नाला निर्माण का प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। यह प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद जलभराव की समस्या का काफी हद तक निदान हो जाएगा।
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जिले में 24 घंटे से रुक-रुककर हो रही बारिश सभी फसलों के लिए लाभदायक है। लगातार बारिश के कारण खेतों में जलभराव हो गया है। खेतों में भरे पानी को किसान निकाल दें, पानी अगर फसल में भरा रहा है तो नुकसान हो सकता है।
जिला उद्यान अधिकारी राजेंद्र कुमार ने बताया कि आलू की फसल 70-75 दिन की हो गई है। 90 से110 दिन में आलू पूरी तरह तैयार हो जाता है। इसीलिए आलू की कोई नुकसान नहीं होगा। हां अगर खेत में जलभराव हो गया है तो किसान पानी निकाल दें। पानी भरा रहने से फसल को नुकसान जरूर हो जाएगा। इसी तरह सब्जियों की फसल से भी पानी निकाल दें। खेत में पानी भरा रहने से पौध सड़ सकती है। उन्होंने कहा कि जिले में आलू का बड़ा रकबा है और सब्जी की फसल का रकबा बहुत कम है।
जिला कृषि अधिकारी अभिनंदन सिंह ने कहा कि बारिश से सरसों की फसल पर ही थोड़ा विपरीत असर पड़ेगा। अगैती फसल जिसमें फलियां आ चुकी हैं, अगर खेत में पानी भरने से गिर गईं तो दाना हल्का होने की आशंका है।
पिछैती फसल में फूल झड़ने से मामूली फर्क पड़ेगा। गेहूं और दहलन की फसल को कोई नुकसान नहीं है। गेहूं में तो दूसरे पानी की सिंचाई हो गई। जिन किसानों ने गेहूं की फसल में जल्दी ही पानी लगाया है और अगर उनके खेत में पानी भर गया है तो उसे निकाल दें। रबी की किसी भी फसल में ज्यादा पानी भरने से नुकसान हो सकता है।
किसान बोले- बारिश से नुकसान
किसानों ने बारिश से फसलों को नुकसान की आशंका जताई है। जसवंतनगर क्षेत्र के अंडावली गांव निवासी किसान हाकिम सिंह ने कहा कि आलू की फसल में चुर्रा रोग लगने की आशंका है। सिसहाट के श्रीकृष्ण और निजामपुर के जगदीश सिंह ने कहा कि खेतों में पानी भरने से आलू सड़ने और बदरंग होने की आशंका है। इकदिल क्षेत्र के किसान हरिसिंह शाक्य, राकेश मिश्रा और कंकरपुरा के संजीव राजपूत और ग्राम शंकरपुर के हरिश्चंद्र ने कहा कि खेत में पानी भरने से आलू की फसल खराब हो जाएगी। निवाड़ीकला में नाले का पानी दीपक, बल्लू, सुरेश, महावीर, छुन्ना आदि किसानों के खेतों में भर गया। बकेवर क्षेत्र के किसान तेजसिंह, केशोंपुर के ध्रुव तिवारी और कुड़रिया गांव के किसान आनन्द स्वरूप त्रिपाठी और महेवा के किसान विनोद पाल, लालमणि दुबे , महेश चतुर्वेदी, रामसिंह, लाखन ने कहा कि बारिश काफी हो गई है।
खेतों में पानी भरने से सरसों, आलू, चना, मटर की फसलें सड़ सकती हैं। सैफई क्षेत्र के नगला बाबा गांव केे किसान राधेश्याम, दिवारी लाल, नगला रिक्सया गांव के धीरज और लटूपुर के रामदास ने भी खेतों में पानी भरने की बात कही है। लवेदी के आशीष, सुरेश चंद्र कठेरिया ने कहा गोभी, गाजर मटर और टमाटर की फसलें खराब हो जाएंगी।
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शहर के यदुवंश नगर, शकुंतला नगर, लोहिया गैस गोदाम के आसपास, नहर के दोनों तरफ बसी घनी आबादी में गलियों में बुरा हाल रहा। यहां पानी के निकास का कोई समुचित साधन नहीं है। नई मंडी से निकला नाला वैसे ही गंदगी से भरा रहता है। मैनपुरी रेलवे क्रासिंग पर बने अधोगामी सेतु के नीचे भी पानी भरा रहा। पानी की मात्रा कम होने से वाहनों की आवाजाही में कोई दिक्कत नहीं हुई। राजकीय इंटर कालेज के सामने भी बारिश का पानी भर गया।
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नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि बारिश के पानी से पूरे शहर में जलभराव की कहीं कोई शिकायत नहीं आई है। रुक-रुककर हुई बारिश से स्थिति सामान्य बनी रही। बारिश के मौसम से पहले शहर में पानी की निकासी के लिए बड़ा नाला निर्माण का प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। यह प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद जलभराव की समस्या का काफी हद तक निदान हो जाएगा।
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जिले में 24 घंटे से रुक-रुककर हो रही बारिश सभी फसलों के लिए लाभदायक है। लगातार बारिश के कारण खेतों में जलभराव हो गया है। खेतों में भरे पानी को किसान निकाल दें, पानी अगर फसल में भरा रहा है तो नुकसान हो सकता है।
जिला उद्यान अधिकारी राजेंद्र कुमार ने बताया कि आलू की फसल 70-75 दिन की हो गई है। 90 से110 दिन में आलू पूरी तरह तैयार हो जाता है। इसीलिए आलू की कोई नुकसान नहीं होगा। हां अगर खेत में जलभराव हो गया है तो किसान पानी निकाल दें। पानी भरा रहने से फसल को नुकसान जरूर हो जाएगा। इसी तरह सब्जियों की फसल से भी पानी निकाल दें। खेत में पानी भरा रहने से पौध सड़ सकती है। उन्होंने कहा कि जिले में आलू का बड़ा रकबा है और सब्जी की फसल का रकबा बहुत कम है।
जिला कृषि अधिकारी अभिनंदन सिंह ने कहा कि बारिश से सरसों की फसल पर ही थोड़ा विपरीत असर पड़ेगा। अगैती फसल जिसमें फलियां आ चुकी हैं, अगर खेत में पानी भरने से गिर गईं तो दाना हल्का होने की आशंका है।
पिछैती फसल में फूल झड़ने से मामूली फर्क पड़ेगा। गेहूं और दहलन की फसल को कोई नुकसान नहीं है। गेहूं में तो दूसरे पानी की सिंचाई हो गई। जिन किसानों ने गेहूं की फसल में जल्दी ही पानी लगाया है और अगर उनके खेत में पानी भर गया है तो उसे निकाल दें। रबी की किसी भी फसल में ज्यादा पानी भरने से नुकसान हो सकता है।
किसान बोले- बारिश से नुकसान
किसानों ने बारिश से फसलों को नुकसान की आशंका जताई है। जसवंतनगर क्षेत्र के अंडावली गांव निवासी किसान हाकिम सिंह ने कहा कि आलू की फसल में चुर्रा रोग लगने की आशंका है। सिसहाट के श्रीकृष्ण और निजामपुर के जगदीश सिंह ने कहा कि खेतों में पानी भरने से आलू सड़ने और बदरंग होने की आशंका है। इकदिल क्षेत्र के किसान हरिसिंह शाक्य, राकेश मिश्रा और कंकरपुरा के संजीव राजपूत और ग्राम शंकरपुर के हरिश्चंद्र ने कहा कि खेत में पानी भरने से आलू की फसल खराब हो जाएगी। निवाड़ीकला में नाले का पानी दीपक, बल्लू, सुरेश, महावीर, छुन्ना आदि किसानों के खेतों में भर गया। बकेवर क्षेत्र के किसान तेजसिंह, केशोंपुर के ध्रुव तिवारी और कुड़रिया गांव के किसान आनन्द स्वरूप त्रिपाठी और महेवा के किसान विनोद पाल, लालमणि दुबे , महेश चतुर्वेदी, रामसिंह, लाखन ने कहा कि बारिश काफी हो गई है।
खेतों में पानी भरने से सरसों, आलू, चना, मटर की फसलें सड़ सकती हैं। सैफई क्षेत्र के नगला बाबा गांव केे किसान राधेश्याम, दिवारी लाल, नगला रिक्सया गांव के धीरज और लटूपुर के रामदास ने भी खेतों में पानी भरने की बात कही है। लवेदी के आशीष, सुरेश चंद्र कठेरिया ने कहा गोभी, गाजर मटर और टमाटर की फसलें खराब हो जाएंगी।