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गोशाला में तीन गोवंशों की मौत, दो की हालत गंभीर
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इटावा। जिले की गोशालाओं में रखे गए गोवंशों के लिए चारा, भूसा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इस वजह से उनकी मौत होने के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं।
इसके बावजूद प्रशासनिक अफसर आंख मूंद कर बैठे रहते हैं। ऐसा ही मामला सैफई विकास खंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत शिवपुरी टिमरूआ मजरा लाडमपुर में बनी गोशाला का सामने आया है। यहां भूख से तीन गोवंशों की मौत हो गई, जबकि दो मरणासन्न स्थिति में हैं।
ग्राम पंचायत शिवपुरी टिमरूआ मजरा लाडमपुर में बनी गोशाला में 106 से ज्यादा गोवंश रखे गए थे। मीडिया कर्मी सोमवार को गोशाला पहुंचे, तो व्यवस्थाओं की हकीकत सामने आ गई।
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इनमें से तीन गोशाला परिसर में ही मृत पाए गए, जबकि दो बीमार मिले। गोशाला का भूसा गोदाम खाली पड़ा था। गोवंशों की देखभाल के लिए तैनात पांच कर्मचारियों में एक भी मौके पर नहीं था। गो सेवक रूम में ताला लटक रहा था और गोशाला में गोवंशों को देखने वाला कोई नहीं नजर आया।
गोशाला में 90 गोवंश मौजूद पाए गए। बाकी 16 गोवंश गोशाला से कहां चले गए। इस बारे में कोई बताने को राजी नहीं है। वीडीओ उदल सिंह का कहना है कि गोशाला में एक गोवंश की मौत और दो गोवंशों के बीमार होने की जानकारी है। गोशाला से 16 गोवंश कहां चले गए। इस बारे में कर्मचारी से पूछताछ की जाएगी।
ग्राम प्रधान जेल सिंह ने बताया शासन की तरफ से प्रत्येक गोवंश के भूसा, चारा के लिए 30 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं। इस धनराशि में पांच कर्मचारी का वेतन, बिजली न होने की वजह से जनरेटर में प्रति माह चार हजार रुपये का डीजल खर्च हो जाता है।
जेनरेटर से ही सबमर्सिबल पंप चलाकर गोवंशों के लिए पानी व रोशनी की व्यवस्था की जाती है। गोवंश के खाने-पीने, गोशाला कर्मचारियों का वेतन के लिए प्रति गोवंश 30 रुपये की धनराशि कम है। ऐसे में कई बार गोवंशों के लिए चारा, व भूसा की पर्याप्त व्यवस्था कर पाने में दिक्कत होती है।
खुले में पड़ा रहता है भूसा
ग्राम पंचायत बरौली खुर्द के ओडमपुरा गांव में बनी गोशाला में भूसे का गोदाम नहीं है। इसलिए गोवंशों के लिए आने वाला भूसा खुले आसमान के नीचे डाल दिया जाता है। यह भूसा बारिश में भीगकर खराब हो रहा है। सड़ने के कारण उससे बदबू आ रही है। इस वजह के कई गोवंश भूसा नहीं खा रहे हैं, जिसने खाया वह बीमार पड़ रहा है।
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इसके बावजूद प्रशासनिक अफसर आंख मूंद कर बैठे रहते हैं। ऐसा ही मामला सैफई विकास खंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत शिवपुरी टिमरूआ मजरा लाडमपुर में बनी गोशाला का सामने आया है। यहां भूख से तीन गोवंशों की मौत हो गई, जबकि दो मरणासन्न स्थिति में हैं।
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ग्राम पंचायत शिवपुरी टिमरूआ मजरा लाडमपुर में बनी गोशाला में 106 से ज्यादा गोवंश रखे गए थे। मीडिया कर्मी सोमवार को गोशाला पहुंचे, तो व्यवस्थाओं की हकीकत सामने आ गई।
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इनमें से तीन गोशाला परिसर में ही मृत पाए गए, जबकि दो बीमार मिले। गोशाला का भूसा गोदाम खाली पड़ा था। गोवंशों की देखभाल के लिए तैनात पांच कर्मचारियों में एक भी मौके पर नहीं था। गो सेवक रूम में ताला लटक रहा था और गोशाला में गोवंशों को देखने वाला कोई नहीं नजर आया।
गोशाला में 90 गोवंश मौजूद पाए गए। बाकी 16 गोवंश गोशाला से कहां चले गए। इस बारे में कोई बताने को राजी नहीं है। वीडीओ उदल सिंह का कहना है कि गोशाला में एक गोवंश की मौत और दो गोवंशों के बीमार होने की जानकारी है। गोशाला से 16 गोवंश कहां चले गए। इस बारे में कर्मचारी से पूछताछ की जाएगी।
ग्राम प्रधान जेल सिंह ने बताया शासन की तरफ से प्रत्येक गोवंश के भूसा, चारा के लिए 30 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं। इस धनराशि में पांच कर्मचारी का वेतन, बिजली न होने की वजह से जनरेटर में प्रति माह चार हजार रुपये का डीजल खर्च हो जाता है।
जेनरेटर से ही सबमर्सिबल पंप चलाकर गोवंशों के लिए पानी व रोशनी की व्यवस्था की जाती है। गोवंश के खाने-पीने, गोशाला कर्मचारियों का वेतन के लिए प्रति गोवंश 30 रुपये की धनराशि कम है। ऐसे में कई बार गोवंशों के लिए चारा, व भूसा की पर्याप्त व्यवस्था कर पाने में दिक्कत होती है।
खुले में पड़ा रहता है भूसा
ग्राम पंचायत बरौली खुर्द के ओडमपुरा गांव में बनी गोशाला में भूसे का गोदाम नहीं है। इसलिए गोवंशों के लिए आने वाला भूसा खुले आसमान के नीचे डाल दिया जाता है। यह भूसा बारिश में भीगकर खराब हो रहा है। सड़ने के कारण उससे बदबू आ रही है। इस वजह के कई गोवंश भूसा नहीं खा रहे हैं, जिसने खाया वह बीमार पड़ रहा है।