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चंबल पुल के जख्मों पर पैचवर्क का मरहम
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जर्जंर हालत में चंबल पुल
- फोटो : ETAWAH
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इटावा। इटावा-ग्वालियर राजमार्ग (एनएच 92) पर जगह-जगह गड्ढ़ों पर पैचवर्क शुरू हो गया है। सड़क की हालत तो थोड़ी बहुत सुधर जाएगी, लेकिन उदी मोड़ से चंबल पुल तक लगने वाले जाम से फिलहाल राहत मिलने वाली नहीं है। इटावा को ग्वालियर से जोड़ने वाला चंबल नदी पर बना पुल जर्जर हो चुका है। यहां नए पुल का निर्माण होना बहुत जरूरी है। नया पुल बनने के बाद ही जाम की समस्या का स्थायी निदान हो सकेगा।
ग्वालियर से बरेली जाने वलो इस हाईवे पर वर्ष 1976 में चंबल नदी पर पुल बनाया गया था, लेकिन अब पुल जर्जर हालत में है। पुल की रेलिंग टूट चूकी है। कई जगहों पर बड़े-बड़े गड्ढ़े भी हैं। जो हमेशा हादसों की वजह बनते हैं। पिछले पांच वर्षों में चंबल पुल की हालत और भी खराब हो गई है। कभी प्लेट लगाकर तो कभी कंक्रीट भर कर पुल की मरम्मत करने की औपचारिकता होती रहती है। यहां तक कि पुल की बेयरिंग भी क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
ओवरलोड वाहन बने मुसीबत
चंबल पुल के खराब होने का सबसे बड़ा कारण ओवरलोड वाहन हैं। मध्य प्रदेश के खनन माफिया को चंबल पुल रास आता है। माफिया इसी चंबल पुल से ही अपने ओवरलोड वाहन पास करवाते हैं। भाजपा सरकार बनने के बाद ओवर लोडिंग वाहनों पर लगाम लगाई गई। वर्ष 2017 के बाद चंबल पुल के दोनों तरफ कैमरे लगाकर उनका चालान किया जाने लगा। जिसके बाद से ओवर लोडिंग वाहनों में कमी आई है, लेकिन पहले से खराब पुल और सड़क की मुकम्मल मरम्मत नहीं हो सकी।
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लोग बोले
आए दिन चंबल पुल के मरम्मत कार्य चलता रहता है। पुल पर गड्ढे होने के कारण कई बार दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं।
- छोटे यादव, व्यापारी
चंबल नदी पर नए पुल का निर्माण होना बहुत जरूरी है। पुराना पुल कभी भी टूट सकता है।
-अरविंद चौधरी, किसान
कई चुनावों में नए पुल के निर्माण की बात सुनी लेकिन आज तक नया पुल नहीं बना और न ही पुुल बनाने का काम शुरू हुआ।
-सिल्पू भदौरिया, ट्रांसपोर्टर
मरम्मत के लिए कई बार पुल को बंद भी कर दिया जाता है। इससे बहुत परेशानी होती है। नया पुल बनाना आवश्यक है।
-अंकित, छात्र
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ग्वालियर से बरेली जाने वलो इस हाईवे पर वर्ष 1976 में चंबल नदी पर पुल बनाया गया था, लेकिन अब पुल जर्जर हालत में है। पुल की रेलिंग टूट चूकी है। कई जगहों पर बड़े-बड़े गड्ढ़े भी हैं। जो हमेशा हादसों की वजह बनते हैं। पिछले पांच वर्षों में चंबल पुल की हालत और भी खराब हो गई है। कभी प्लेट लगाकर तो कभी कंक्रीट भर कर पुल की मरम्मत करने की औपचारिकता होती रहती है। यहां तक कि पुल की बेयरिंग भी क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
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ओवरलोड वाहन बने मुसीबत
चंबल पुल के खराब होने का सबसे बड़ा कारण ओवरलोड वाहन हैं। मध्य प्रदेश के खनन माफिया को चंबल पुल रास आता है। माफिया इसी चंबल पुल से ही अपने ओवरलोड वाहन पास करवाते हैं। भाजपा सरकार बनने के बाद ओवर लोडिंग वाहनों पर लगाम लगाई गई। वर्ष 2017 के बाद चंबल पुल के दोनों तरफ कैमरे लगाकर उनका चालान किया जाने लगा। जिसके बाद से ओवर लोडिंग वाहनों में कमी आई है, लेकिन पहले से खराब पुल और सड़क की मुकम्मल मरम्मत नहीं हो सकी।
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आए दिन चंबल पुल के मरम्मत कार्य चलता रहता है। पुल पर गड्ढे होने के कारण कई बार दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं।
- छोटे यादव, व्यापारी
चंबल नदी पर नए पुल का निर्माण होना बहुत जरूरी है। पुराना पुल कभी भी टूट सकता है।
-अरविंद चौधरी, किसान
कई चुनावों में नए पुल के निर्माण की बात सुनी लेकिन आज तक नया पुल नहीं बना और न ही पुुल बनाने का काम शुरू हुआ।
-सिल्पू भदौरिया, ट्रांसपोर्टर
मरम्मत के लिए कई बार पुल को बंद भी कर दिया जाता है। इससे बहुत परेशानी होती है। नया पुल बनाना आवश्यक है।
-अंकित, छात्र