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आठ माह चमत्कारी बकरा की कीमत पहुंची12 लाख
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फोटो संख्या 38: आसाराम मिश्रा
- फोटो : ETAWAH
चकरनगर। ब्लाक क्षेत्र के ग्राम जगतोली में आठ माह का जमुनापारी हंसा बकरा इन दिनों खासा चर्चा में है। बकरे के पेट पर उर्दू में अल्लाह लिखा होने की वजह से बकरे की कीमत लाखों रुपये में पहुंच गई है।
इस समय कीमत बारह लाख रुपये पहुंच चुकी है। बकरा मालिक इक्कीस लाख रुपये की मांग रहा है। अभी तक इंदौर, दिल्ली, आगरा, लखनऊ आदि शहरों से खरीदार आ चुके हैं।
ग्राम जगतोली निवासी 58 वर्षीय आसाराम मिश्रा ने बताया जनवरी 2021 में उनकी जमुनापारी बकरी ने हंसा बकरा को जन्म दिया था। 4 माह के बाद उसकी पीठ पर उर्दू में कुछ लिखा होने पर उर्दू के जानकार शिक्षक को दिखाने पर बकरे की पीठ पर उर्दू में अल्लाह लिखा होने का पता चला है।
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अब बकरा आठ माह का हो चुका है। उसने बकरा की कीमत 21 लाख रुपये निर्धारित की है। आसाराम मिश्रा कहते हैं बकरा बेचने से मिले रुपये से धार्मिक आयोजन करवाएंगे। जिसमें हिंदू- मुस्लिम सभी लोगों को भोज करवाएंगे।
बकरे का महत्व मुस्लिमों की जुबानी
मुख्तियार अली का कहना है अल्लाह के नाम बकरे की कुर्बानी करने वाला खुशनसीब होता है। अल्लाह उसे जन्नत बख्शते हैं। परवरदिगार तेरी कुर्बानियां नसीब वालों को ही करने का मौका मिलता है।
औसाव अली का कहना है यह कुदरत का करिश्मा ही है, जो कुर्बानी बकरे पर अल्लाह अंकित है। ऊपर वाले ने फरिश्ते के रूप में जमीन पर कुर्बानी के लिए भेजा है। इसकी कुर्बानी करने वाला खुशनसीब होगा।
काजिम अली ने कहा परवरदिगार अपने फरिश्तों को किसी भी मजहब में कहीं भी भेज सकता है। यह जरुरी नहीं कि कुर्बानियां मजहब के लोगों के यहां ही पैदा हो। अल्लाह के किसी सच्चे रिश्ते को यह कुर्बानी नसीब होगी।
असगर अली ने कहा अल्लाह को सबसे प्रिय कुर्बानी होती है। अल्लाह के फरिश्ते पर अल्लाह का नाम लिखा होना ऐसी कुर्बानी तो नसीब वाले ही कर पाते हैं। इसका दीदार भी जन्नत के द्वार खोल देता है।
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इस समय कीमत बारह लाख रुपये पहुंच चुकी है। बकरा मालिक इक्कीस लाख रुपये की मांग रहा है। अभी तक इंदौर, दिल्ली, आगरा, लखनऊ आदि शहरों से खरीदार आ चुके हैं।
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ग्राम जगतोली निवासी 58 वर्षीय आसाराम मिश्रा ने बताया जनवरी 2021 में उनकी जमुनापारी बकरी ने हंसा बकरा को जन्म दिया था। 4 माह के बाद उसकी पीठ पर उर्दू में कुछ लिखा होने पर उर्दू के जानकार शिक्षक को दिखाने पर बकरे की पीठ पर उर्दू में अल्लाह लिखा होने का पता चला है।
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अब बकरा आठ माह का हो चुका है। उसने बकरा की कीमत 21 लाख रुपये निर्धारित की है। आसाराम मिश्रा कहते हैं बकरा बेचने से मिले रुपये से धार्मिक आयोजन करवाएंगे। जिसमें हिंदू- मुस्लिम सभी लोगों को भोज करवाएंगे।
बकरे का महत्व मुस्लिमों की जुबानी
मुख्तियार अली का कहना है अल्लाह के नाम बकरे की कुर्बानी करने वाला खुशनसीब होता है। अल्लाह उसे जन्नत बख्शते हैं। परवरदिगार तेरी कुर्बानियां नसीब वालों को ही करने का मौका मिलता है।
औसाव अली का कहना है यह कुदरत का करिश्मा ही है, जो कुर्बानी बकरे पर अल्लाह अंकित है। ऊपर वाले ने फरिश्ते के रूप में जमीन पर कुर्बानी के लिए भेजा है। इसकी कुर्बानी करने वाला खुशनसीब होगा।
काजिम अली ने कहा परवरदिगार अपने फरिश्तों को किसी भी मजहब में कहीं भी भेज सकता है। यह जरुरी नहीं कि कुर्बानियां मजहब के लोगों के यहां ही पैदा हो। अल्लाह के किसी सच्चे रिश्ते को यह कुर्बानी नसीब होगी।
असगर अली ने कहा अल्लाह को सबसे प्रिय कुर्बानी होती है। अल्लाह के फरिश्ते पर अल्लाह का नाम लिखा होना ऐसी कुर्बानी तो नसीब वाले ही कर पाते हैं। इसका दीदार भी जन्नत के द्वार खोल देता है।

फोटो संख्या 39- बकरा के पीठ पर उर्दू में उभरा अक्षर- फोटो : ETAWAH