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Etawah News: इटावाः कोरोना का शोर, फिर भी तैयारियां कमजोर
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जिला अस्पताल में बिना मास्क के लाइन में लगकर बनवाते ओपीडी का पर्चा। संवाद
- फोटो : ETAWAH
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इटावा। कोविड-19 के बीएस.7 स्वरूप की पुष्टि ने स्वास्थ्य महकमों की चिंता बढ़ा दी है। केंद्र सरकार की सलाह के बाद सभी जिले अपने स्तर पर तैयारियों में जुट गए हैं। हालांकि इससे निपटने के लिए अभी पर्याप्त इंतजाम नहीं दिख रहे हैं। लोग भी दो गज की दूरी और मास्क जरूरी जैसे संदेश भूल चुके हैं। आलम यह है कि जिले के छह लाख लोगों ने बूस्टर डोज ही नहीं लगवाई। वहीं, रोडवेज, बस स्टैंड समेत सभी सार्वजनिक स्थानों पर कोई सतर्कता नहीं बरती जा रही है।
वर्ष 2019 में इसी तरह चीन में कोविड-19 के मामले बढ़ने के बाद देश में भी महामारी ने पैर पसारना शुरू किया था। इस बीच जिले में भी हाहाकार वाली स्थिति हो गई थी। सारी व्यवस्थाएं कम पड़ने लगी थीं। पहली लहर में लोग पॉजिटिव तो अधिक निकले थे, पर मरने वालों की संख्या जिले में कम रही थी। दूसरी लहर में सबसे ज्यादा लोगों की जान गई थी। करीब तीन साल बाद फिर कोरोना ने नए रूप में चीन में हाहाकार मचा रखा है।
देश में भी बीएस.7 स्वरूप के चार मामले मिलने से केंद्र और प्रदेश सरकार अलर्ट हैं। सभी जिलों में सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। गुरुवार को रोज की तरह बाजारों में भीड़भाड़ रही। सार्वजनिक स्थानों पर न तो कोई मास्क पहने नजर आया और न ही दो गज की शारीरिक दूरी कहीं दिखाई दी। जांचों की रफ्तार भी सुस्त पड़ी है। जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में जांचें तो की जा रही हैं, लेकिन अभी इनकी संख्या बहुत कम है। सिर्फ ऑपरेशन कराने वाले मरीजों की एंटीजन जांच कराई जा रही है। वहीं, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड समेत कहीं अन्य कोविड की जांच नहीं हो रही है और हेल्प डेस्क का भी अता-पता नहीं है।
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60 फीसदी को नहीं लगी बूस्टर डोज, 297 की जा चुकी जान
जिले में कोरोना के टीके की पहली और दूसरी डोज तो सभी को लग चुकी है, लेकिन बूस्टर डोज की रफ्तार कम रही है। जिले को बूस्टर डोज लगाने के लिए 10,98,113 का लक्ष्य रखा गया था। इसके सापेक्ष सिर्फ 4,17,299 लोगों को ही बूस्टर डोज लगी है। इनमें से 61,959 बुजुर्गों ने बूस्टर डोज लगवाई है।
अभी तक जिले में कोरोना से कुल 297 लोगों की जान जा चुकी है। दूसरी लहर में सबसे ज्यादा लोगों ने जान गंवाई थी। टीकाकरण होने के बाद हालात सुधरे और कोरोना खत्म हो गया। इसके बाद से लोग बेपरवाह हो गए।
जिला अस्पताल में 20 वेंटिलेटर तैयार, 22 मोबाइल टीमें बनीं
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एमएम आर्या ने बताया कि 20 वेंटिलेटर की व्यवस्था जिला अस्पताल में है। सभी संचालित हैं। बाकी मास्क, सैनिटाइजर और दवाइयां भी पर्याप्त मात्रा में हैं। उन्हें बांटने और हेल्प डेस्क बनाने के लिए निर्देश दे दिए गए हैं। सभी मरीजों और उनके तीमारदारों से भी आग्रह है कि वह भी मास्क लगाकर ही अस्पताल आएं।
सरकार की ओर से अलर्ट जारी होने के बाद अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग भी तैयारियां करने में जुटा हुआ है। शहर में चार और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 टीमें मिलाकर कुल 22 मोबाइल टीमें सक्रिय की जा रही हैं, जो घूम-घूम कर लोगों के नमूने लेंगे। वहीं पीपीई किट समेत अन्य चीजों की मांग भेजी जा रही है।
तीन माह पहले मॉकड्रिल में देखी थी आक्सीजन प्लांट की हकीकत
जिला अस्पताल में दो स्थायी ऑक्सीजन प्लांट हैं। इनसे 50 बेड पर सीधे ऑक्सीजन की आपूर्ति दी जाती है। वहीं, कोरोना काल में जिला महिला अस्पताल में एक और प्लांट स्थापित किया गया था। महिला अस्पताल में बने एल-टू अस्पताल में ऑक्सीजन की आपूर्ति की जाती है। अभी तक हुई मॉकड्रिल में इसकी भी व्यवस्थाएं दुरुस्त मिली हैं। लगभग तीन माह पहले इस प्लांट की हकीकत जानी गई थी।
वर्जन
जिला अस्पताल, सैफई मेडिकल कॉलेज, जिला महिला अस्पताल और सभी सीएचसी समेत सभी जगहों पर जांच की रफ्तार बढ़ाई जाएगी। बचे हुए लोगों को भी बूस्टर डोज लगवाने के प्रयास किए जाएंगे। शासन के निर्देशों के अनुसार सभी नियमों को पालन कराया जाएगा। -डॉ. गीताराम, सीएमओ
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वर्ष 2019 में इसी तरह चीन में कोविड-19 के मामले बढ़ने के बाद देश में भी महामारी ने पैर पसारना शुरू किया था। इस बीच जिले में भी हाहाकार वाली स्थिति हो गई थी। सारी व्यवस्थाएं कम पड़ने लगी थीं। पहली लहर में लोग पॉजिटिव तो अधिक निकले थे, पर मरने वालों की संख्या जिले में कम रही थी। दूसरी लहर में सबसे ज्यादा लोगों की जान गई थी। करीब तीन साल बाद फिर कोरोना ने नए रूप में चीन में हाहाकार मचा रखा है।
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देश में भी बीएस.7 स्वरूप के चार मामले मिलने से केंद्र और प्रदेश सरकार अलर्ट हैं। सभी जिलों में सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। गुरुवार को रोज की तरह बाजारों में भीड़भाड़ रही। सार्वजनिक स्थानों पर न तो कोई मास्क पहने नजर आया और न ही दो गज की शारीरिक दूरी कहीं दिखाई दी। जांचों की रफ्तार भी सुस्त पड़ी है। जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में जांचें तो की जा रही हैं, लेकिन अभी इनकी संख्या बहुत कम है। सिर्फ ऑपरेशन कराने वाले मरीजों की एंटीजन जांच कराई जा रही है। वहीं, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड समेत कहीं अन्य कोविड की जांच नहीं हो रही है और हेल्प डेस्क का भी अता-पता नहीं है।
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60 फीसदी को नहीं लगी बूस्टर डोज, 297 की जा चुकी जान
जिले में कोरोना के टीके की पहली और दूसरी डोज तो सभी को लग चुकी है, लेकिन बूस्टर डोज की रफ्तार कम रही है। जिले को बूस्टर डोज लगाने के लिए 10,98,113 का लक्ष्य रखा गया था। इसके सापेक्ष सिर्फ 4,17,299 लोगों को ही बूस्टर डोज लगी है। इनमें से 61,959 बुजुर्गों ने बूस्टर डोज लगवाई है।
अभी तक जिले में कोरोना से कुल 297 लोगों की जान जा चुकी है। दूसरी लहर में सबसे ज्यादा लोगों ने जान गंवाई थी। टीकाकरण होने के बाद हालात सुधरे और कोरोना खत्म हो गया। इसके बाद से लोग बेपरवाह हो गए।
जिला अस्पताल में 20 वेंटिलेटर तैयार, 22 मोबाइल टीमें बनीं
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एमएम आर्या ने बताया कि 20 वेंटिलेटर की व्यवस्था जिला अस्पताल में है। सभी संचालित हैं। बाकी मास्क, सैनिटाइजर और दवाइयां भी पर्याप्त मात्रा में हैं। उन्हें बांटने और हेल्प डेस्क बनाने के लिए निर्देश दे दिए गए हैं। सभी मरीजों और उनके तीमारदारों से भी आग्रह है कि वह भी मास्क लगाकर ही अस्पताल आएं।
सरकार की ओर से अलर्ट जारी होने के बाद अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग भी तैयारियां करने में जुटा हुआ है। शहर में चार और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 टीमें मिलाकर कुल 22 मोबाइल टीमें सक्रिय की जा रही हैं, जो घूम-घूम कर लोगों के नमूने लेंगे। वहीं पीपीई किट समेत अन्य चीजों की मांग भेजी जा रही है।
तीन माह पहले मॉकड्रिल में देखी थी आक्सीजन प्लांट की हकीकत
जिला अस्पताल में दो स्थायी ऑक्सीजन प्लांट हैं। इनसे 50 बेड पर सीधे ऑक्सीजन की आपूर्ति दी जाती है। वहीं, कोरोना काल में जिला महिला अस्पताल में एक और प्लांट स्थापित किया गया था। महिला अस्पताल में बने एल-टू अस्पताल में ऑक्सीजन की आपूर्ति की जाती है। अभी तक हुई मॉकड्रिल में इसकी भी व्यवस्थाएं दुरुस्त मिली हैं। लगभग तीन माह पहले इस प्लांट की हकीकत जानी गई थी।
वर्जन
जिला अस्पताल, सैफई मेडिकल कॉलेज, जिला महिला अस्पताल और सभी सीएचसी समेत सभी जगहों पर जांच की रफ्तार बढ़ाई जाएगी। बचे हुए लोगों को भी बूस्टर डोज लगवाने के प्रयास किए जाएंगे। शासन के निर्देशों के अनुसार सभी नियमों को पालन कराया जाएगा। -डॉ. गीताराम, सीएमओ

जिला अस्पताल में बिना मास्क के मरीजों को देखते डॉ. पीके गुप्ता। संवाद- फोटो : ETAWAH

एलटू अस्पताल की इमारत के पास बना ऑक्सीजन प्लांट। संवाद- फोटो : ETAWAH