{"_id":"45f83063bddab1d5f0f4ad9b719513e4","slug":"engaged-in-potato-blight-disease-reduced-yields-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आलू में लगा झुलसा रोग, घटेगी पैदावार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आलू में लगा झुलसा रोग, घटेगी पैदावार
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
Updated Tue, 16 Feb 2016 12:50 AM IST
विज्ञापन
मौसम का मिजाज बीच-बीच में बदलने से आलू उत्पादक किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं। वजह यह है कि 80 फीसदी आलू की फसलों में झुलसा रोग लगने लगा है। जानकार झुलसा रोग लगने से आलू की पैदावार तकरीबन 15 फीसदी घटने का आशंका जता रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों की माने तो इटावा, औरैया, सिरसागंज, फर्रुखाबाद व कन्नौज जिले की आलू की फसलें झुलसा रोग की चपेट में हैं। इससे इन जिलों के आलू किसान बेहद परेशान हैं। मालूम हो कि इटावा में लगभग 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की फसल की बुआई हुई है।
मौसम का मिजाज बदलने के साथ ही यह आशंका जताई जा रही थी कि आलू की फसल में झुलसा रोग लग सकता है। इस समय आलू की फसल पूरी तरह पिछैती झुलसा रोग की चपेट में है। इटावा ही नहीं बल्कि आलू की बेल्ट के रूप में जानी जाने वाले इटावा, औरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज, फीरोजाबाद, आगरा में आलू की फसल को पिछेती झुलसा रोग ने अपनी चपेट में ले लिया।
विज्ञापन
हालांकि कन्नौज व फर्रुखाबाद में महीने भर पहले ही झुलसा रोग का प्रकोप शुरू हो चुका है, बाकी जिलों में भी अब झुलसा रोग ने आलू की फसल को अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया है। इस वर्ष तापमान में गिरावट कम होने से सर्दी कम पड़ी।
कृषि वैज्ञानिक मौसम को देखते हुए झुलसा रोग लगने की संभावना लगातार जता रहे थे। इन सारे जिलों की लगभग 80 फीसदी से अधिक आलू की फसल इस वक्त झुलसा रोग की चपेट में है। इतना जरूर है कि अक्तूबर महीने में जिन किसानों ने आलू की बुआई की थी, उनकी फसलों में रोग से नुकसान की
संभावना कुछ कम रहेगी। पिछैती फसल में ज्यादा नुकसान होगा।आगरा से लेकर फर्रुखाबाद तक लगभग ढाई लाख हेक्टेयर आलू की फसल है, जो पिछले वर्ष के बराबर ही है। जिला उद्यान अधिकारी कन्नौज मुन्ना सिंह यादव कहते है कि मौसम में तापमान अधिक रहने के चलते पिछेती झुलसा आया है, पैदावार में गिरावट रहने की पूरी संभावना है।
जिला उद्यान अधिकारी आगरा अनीता सिंह का कहना है की आगरा में आलू का रकवा पिछले वर्ष के जितना ही है, पिछेती झुलसा का प्रकोप पूरी तरह है। इसकी वजह से आलू की जगह बीज वाले साइज का आलू ज्यादा रहने की संभावना है।
विज्ञापन
कृषि विशेषज्ञों की माने तो इटावा, औरैया, सिरसागंज, फर्रुखाबाद व कन्नौज जिले की आलू की फसलें झुलसा रोग की चपेट में हैं। इससे इन जिलों के आलू किसान बेहद परेशान हैं। मालूम हो कि इटावा में लगभग 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की फसल की बुआई हुई है।
विज्ञापन
मौसम का मिजाज बदलने के साथ ही यह आशंका जताई जा रही थी कि आलू की फसल में झुलसा रोग लग सकता है। इस समय आलू की फसल पूरी तरह पिछैती झुलसा रोग की चपेट में है। इटावा ही नहीं बल्कि आलू की बेल्ट के रूप में जानी जाने वाले इटावा, औरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज, फीरोजाबाद, आगरा में आलू की फसल को पिछेती झुलसा रोग ने अपनी चपेट में ले लिया।
विज्ञापन
हालांकि कन्नौज व फर्रुखाबाद में महीने भर पहले ही झुलसा रोग का प्रकोप शुरू हो चुका है, बाकी जिलों में भी अब झुलसा रोग ने आलू की फसल को अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया है। इस वर्ष तापमान में गिरावट कम होने से सर्दी कम पड़ी।
कृषि वैज्ञानिक मौसम को देखते हुए झुलसा रोग लगने की संभावना लगातार जता रहे थे। इन सारे जिलों की लगभग 80 फीसदी से अधिक आलू की फसल इस वक्त झुलसा रोग की चपेट में है। इतना जरूर है कि अक्तूबर महीने में जिन किसानों ने आलू की बुआई की थी, उनकी फसलों में रोग से नुकसान की
संभावना कुछ कम रहेगी। पिछैती फसल में ज्यादा नुकसान होगा।आगरा से लेकर फर्रुखाबाद तक लगभग ढाई लाख हेक्टेयर आलू की फसल है, जो पिछले वर्ष के बराबर ही है। जिला उद्यान अधिकारी कन्नौज मुन्ना सिंह यादव कहते है कि मौसम में तापमान अधिक रहने के चलते पिछेती झुलसा आया है, पैदावार में गिरावट रहने की पूरी संभावना है।
जिला उद्यान अधिकारी आगरा अनीता सिंह का कहना है की आगरा में आलू का रकवा पिछले वर्ष के जितना ही है, पिछेती झुलसा का प्रकोप पूरी तरह है। इसकी वजह से आलू की जगह बीज वाले साइज का आलू ज्यादा रहने की संभावना है।