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आवास सूची में पात्रों के नाम काटने से नाराज प्रधान धरने पर बैठे
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फोटो संख्या 21 स्थानीय ब्लॉक मुख्यालय महेवा में आवास सूची से अधिकांश पात्र लोगों के नाम काटे जाने ?
- फोटो : ETAWHA
महेवा। ब्लॉक मुख्यालय महेवा में आवास सूची में अधिकांश पात्र लोगों के नाम काटे जाने के विरोध में ब्लॉक की ग्राम पंचायत निवाड़ी खुर्द व भरईपुर के प्रधान खंड विकास अधिकारी के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।
पूर्व में ग्राम पंचायत की खुली बैठकों में आवास के पात्रों की सूचना तैयार की गई थी। बाद में उसकी जांच ब्लॉक व जिले स्तर के अधिकारियों ने की थी। ग्राम प्रधान निवाड़ीखुर्द बृजेश चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि उनके यहां करीब 115 पात्र गरीबों की सूची थी। जिसकी जांच पूर्व में वन विभाग के किसी जिला स्तर के अधिकारी व लेखपाल ने की थी। उन्हें भी पता नहीं लगा कि कब सूची से नाम काट दिए गए। केवल 21 नाम रह गए। वहीं भरईपुर ग्राम प्रधान मनोज कुमार ने भी यही आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व में सूची 89 लोगों को थी और अब केवल 17 नाम रह गए।
प्रधानों ने पैसे के लेनदेन का आरोप भी लगाया।
दोनों प्रधान शाम करीब चार बजे ब्लॉक पहुंचे व धरने पर बैठ गए। दोनों ने ग्राम सचिवों पर जो मंजूर सूची न दिखाने का आरोप लगाया है। बीडीओ महेवा सतीश चंद्र पांडेय देर शाम प्रधानों को माने पहुंचे। उन्होंने सूची की फिर से जांच कराने का भरोसा दिलाया। प्रधान अभी धरने पर बैठे हैं। उनके साथ ग्रामीण भी आने लगे हैं।
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पूर्व में ग्राम पंचायत की खुली बैठकों में आवास के पात्रों की सूचना तैयार की गई थी। बाद में उसकी जांच ब्लॉक व जिले स्तर के अधिकारियों ने की थी। ग्राम प्रधान निवाड़ीखुर्द बृजेश चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि उनके यहां करीब 115 पात्र गरीबों की सूची थी। जिसकी जांच पूर्व में वन विभाग के किसी जिला स्तर के अधिकारी व लेखपाल ने की थी। उन्हें भी पता नहीं लगा कि कब सूची से नाम काट दिए गए। केवल 21 नाम रह गए। वहीं भरईपुर ग्राम प्रधान मनोज कुमार ने भी यही आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व में सूची 89 लोगों को थी और अब केवल 17 नाम रह गए।
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प्रधानों ने पैसे के लेनदेन का आरोप भी लगाया।
दोनों प्रधान शाम करीब चार बजे ब्लॉक पहुंचे व धरने पर बैठ गए। दोनों ने ग्राम सचिवों पर जो मंजूर सूची न दिखाने का आरोप लगाया है। बीडीओ महेवा सतीश चंद्र पांडेय देर शाम प्रधानों को माने पहुंचे। उन्होंने सूची की फिर से जांच कराने का भरोसा दिलाया। प्रधान अभी धरने पर बैठे हैं। उनके साथ ग्रामीण भी आने लगे हैं।
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