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Etawah News: विभाग का पलड़ा हल्का, तौल में खेल जेब पर भारी
Mon, 08 May 2023 12:06 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Mon, 08 May 2023 12:06 AM IST
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इटावा। दुकानों, ठेलों, बड़े प्रतिष्ठानों पर तौल के खेल से ग्राहक परेशान हैं। संसाधनों और स्टाफ की कमी से जूझ रहा विभाग जांच नहीं कर रहा। इसके कारण ग्राहकों की जेब कट रही है।
लगभग साढ़े 17 लाख आबादी वाले जनपद में छह तहसील, आठ ब्लाॅक, छह नगर पंचायतें और 471 ग्राम पंचायतें हैं। पूरे जिले में 10 हजार से अधिक ठेले, खुमचे, दुकानदार और बड़े प्रतिष्ठान हैं। अधिकांश पर बांट, कांटा, मीटर और लीटर यूनिटों में खेल करके ग्राहकों को चपत लगा दी जाती है। संसाधनों और स्टाफ की कमी की वजह से विभागीय अधिकारी बेबस हैं। इतनी बड़ी संख्या में ट्रेडर होने के बावजूद जिले में लगभग साढ़े तीन हजार ट्रेडरों ने ही विधिक विज्ञान विभाग से सत्यापन कराया है। हालांकि विभाग का दावा है कि लगातार कार्रवाई करके सत्यापन के पंजीकरण की संख्या बढ़ाई जा रही है।
किराये के भवन में चल रहा कार्यालय
विधिक विज्ञान विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक का कार्यालय दशकों सिविल लाइन क्षेत्र में किराये पर चल रहा है। इसमें सात-आठ पदों के सापेक्ष सिर्फ वरिष्ठ निरीक्षक, निरीक्षक और प्रयोगशाला परीक्षक की तैनाती है। लिपिक, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी न होने की वजह से अधिकारियों को ही फील्ड के साथ ही फाइलों का काम और उनका रखरखाव करना पड़ता है। हालांकि सराय ऐसर पर होमगार्ड विभाग के कार्यालय के पास जमीन का आवंटन हो गया है।
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साल में करने होते हैं 120 चालान
वरिष्ठ निरीक्षक और निरीक्षक को हर माह 10 चालन करने का लक्ष्य दिया जाता है। साल में दोनों को कुल 120 चालान करने होते हैं। इस लक्ष्य को तो अधिकारी आराम से पूरा कर लेते हैं, लेकिन सत्यापन प्रक्रिया में तेजी न होने से लोगों की जेब खुलेआम काटी जा रही है।
बांट, मीटर, लीटर प्रयोग करने के नियम
विभाग के नियम के मुताबिक प्रतिष्ठान, दुकान, संस्थान जहां बांट, मीटर, लीटर, इलेक्ट्रानिक कांटा और तराजू का प्रयोग होता है, उन्हें हर साल सत्यापन कराना जरूरी है। इसके लिए अलग-अलग उपकरण के अनुसार, शुल्क लिया जाता है। उपकरण को ट्रेड मार्क कराने का काम विभाग की ओर से निजी कंपनियों को दिया जाता है। जिले में 10 कंपनियां उपकरण को नियमानुसार लगाने का काम कर रही हैं। इसके बाद विभागीय अधिकारी सत्यापन करके उसे प्रमाण पत्र देते हैं।
विभाग की ओर से सीमित संसाधनों के बाद भी दुकानों की चेकिंग की जाती हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार जुर्माने की कार्रवाई की जाती है। - विकास त्रिपाठी, निरीक्षक
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लगभग साढ़े 17 लाख आबादी वाले जनपद में छह तहसील, आठ ब्लाॅक, छह नगर पंचायतें और 471 ग्राम पंचायतें हैं। पूरे जिले में 10 हजार से अधिक ठेले, खुमचे, दुकानदार और बड़े प्रतिष्ठान हैं। अधिकांश पर बांट, कांटा, मीटर और लीटर यूनिटों में खेल करके ग्राहकों को चपत लगा दी जाती है। संसाधनों और स्टाफ की कमी की वजह से विभागीय अधिकारी बेबस हैं। इतनी बड़ी संख्या में ट्रेडर होने के बावजूद जिले में लगभग साढ़े तीन हजार ट्रेडरों ने ही विधिक विज्ञान विभाग से सत्यापन कराया है। हालांकि विभाग का दावा है कि लगातार कार्रवाई करके सत्यापन के पंजीकरण की संख्या बढ़ाई जा रही है।
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किराये के भवन में चल रहा कार्यालय
विधिक विज्ञान विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक का कार्यालय दशकों सिविल लाइन क्षेत्र में किराये पर चल रहा है। इसमें सात-आठ पदों के सापेक्ष सिर्फ वरिष्ठ निरीक्षक, निरीक्षक और प्रयोगशाला परीक्षक की तैनाती है। लिपिक, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी न होने की वजह से अधिकारियों को ही फील्ड के साथ ही फाइलों का काम और उनका रखरखाव करना पड़ता है। हालांकि सराय ऐसर पर होमगार्ड विभाग के कार्यालय के पास जमीन का आवंटन हो गया है।
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साल में करने होते हैं 120 चालान
वरिष्ठ निरीक्षक और निरीक्षक को हर माह 10 चालन करने का लक्ष्य दिया जाता है। साल में दोनों को कुल 120 चालान करने होते हैं। इस लक्ष्य को तो अधिकारी आराम से पूरा कर लेते हैं, लेकिन सत्यापन प्रक्रिया में तेजी न होने से लोगों की जेब खुलेआम काटी जा रही है।
बांट, मीटर, लीटर प्रयोग करने के नियम
विभाग के नियम के मुताबिक प्रतिष्ठान, दुकान, संस्थान जहां बांट, मीटर, लीटर, इलेक्ट्रानिक कांटा और तराजू का प्रयोग होता है, उन्हें हर साल सत्यापन कराना जरूरी है। इसके लिए अलग-अलग उपकरण के अनुसार, शुल्क लिया जाता है। उपकरण को ट्रेड मार्क कराने का काम विभाग की ओर से निजी कंपनियों को दिया जाता है। जिले में 10 कंपनियां उपकरण को नियमानुसार लगाने का काम कर रही हैं। इसके बाद विभागीय अधिकारी सत्यापन करके उसे प्रमाण पत्र देते हैं।
विभाग की ओर से सीमित संसाधनों के बाद भी दुकानों की चेकिंग की जाती हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार जुर्माने की कार्रवाई की जाती है। - विकास त्रिपाठी, निरीक्षक