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Etawah News: 20 साल से लापता रहा दौलत पहुंचा पैतृक गांव
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बकेवर। 20 साल से लापता युवक घर पहुंचकर बोला-मैं जिंदा हूं। बहन को छोड़कर सभी ने पहचान लिया। 20 साल में दौलत (45) नेपाल पहुंच गया था। जनकपुर स्थित मानव सेवा आश्रम में उसे सरंक्षण और इलाज मिला। परिवार के लोगों ने उसके जिंदा होने की आस छोड़ दी थी।
दौलत ने जो आप बीती बताई वो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। माजरा बकेवर थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुशगंवा अहीरान के मजरा ग्राम नगला मोतीराम का है। जहां का एक मानसिक रूप से विक्षिप्त दौलत 20 साल पहले घर से लापता हो गया था। इस बीच वह कई जगहों पर भटका। कभी सड़क से खाना उठाकर खाया तो कभी किसी के सहारे से पेट भरता था।
कुछ सालों बाद भटकते हुए वह नेपाल पहुंच गया। नेपाल में मानव सेवा आश्रम के संचालक को युवक की स्थिति की जानकारी हुई। जिसके बाद उसे संरक्षण और इलाज के लिए आश्रम लाया गया। इलाज के दौरान जब दौलत की स्थिति ठीक होने लगी तो उसने खुद को भारत का रहने वाला होने का खुलासा किया। मानव सेवा आश्रम के संचालक ने जनवरी 2026 में महाराष्ट्र में संचालित श्रद्धा फाउंडेशन से संपर्क किया। इसके बाद उसे नेपाल से महाराष्ट्र पहुंचाया। इलाज के दौरान हालत में सुधार होने पर फरवरी 2026 में उसे घर वापस लाया गया।
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इसके बाद फाउंडेशन की कार्यकर्ता दौलत को उसके बहन के घर औरैया के अजीतमल लेकर पहुंचे, जहां बहन के पड़ोसियों ने उसे देखते ही पहचान लिया। अजीतमल कोतवाल ललितेश त्रिपाठी ने सहयोग किया और मंगलवार की शाम को पुलिस फोर्स के साथ उसे दोबारा पैतृक गांव लाया गया।
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दौलत ने जो आप बीती बताई वो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। माजरा बकेवर थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुशगंवा अहीरान के मजरा ग्राम नगला मोतीराम का है। जहां का एक मानसिक रूप से विक्षिप्त दौलत 20 साल पहले घर से लापता हो गया था। इस बीच वह कई जगहों पर भटका। कभी सड़क से खाना उठाकर खाया तो कभी किसी के सहारे से पेट भरता था।
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कुछ सालों बाद भटकते हुए वह नेपाल पहुंच गया। नेपाल में मानव सेवा आश्रम के संचालक को युवक की स्थिति की जानकारी हुई। जिसके बाद उसे संरक्षण और इलाज के लिए आश्रम लाया गया। इलाज के दौरान जब दौलत की स्थिति ठीक होने लगी तो उसने खुद को भारत का रहने वाला होने का खुलासा किया। मानव सेवा आश्रम के संचालक ने जनवरी 2026 में महाराष्ट्र में संचालित श्रद्धा फाउंडेशन से संपर्क किया। इसके बाद उसे नेपाल से महाराष्ट्र पहुंचाया। इलाज के दौरान हालत में सुधार होने पर फरवरी 2026 में उसे घर वापस लाया गया।
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इसके बाद फाउंडेशन की कार्यकर्ता दौलत को उसके बहन के घर औरैया के अजीतमल लेकर पहुंचे, जहां बहन के पड़ोसियों ने उसे देखते ही पहचान लिया। अजीतमल कोतवाल ललितेश त्रिपाठी ने सहयोग किया और मंगलवार की शाम को पुलिस फोर्स के साथ उसे दोबारा पैतृक गांव लाया गया।