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स्टाक में डीएपी, पर मची मारामारी
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इटावा/जसवंतनगर। जिले में डीएपी और यूरिया खाद का पर्याप्त स्टाक मौजूद होने के बाद भी सहकारी समितियों में खाद की मारामारी मची है। इसका सबसे बड़ा कारण, शासन के जोतबही के आधार पर डीएपी खाद की मात्रा तय करना है।
जोतबही की गणना के हिसाब से मिल रही डीएपी को किसान पर्याप्त नहीं मान रहा। उसकी डिमांड ज्यादा है। इस कारण से चारों ओर डीएपी के लिए भीड़ लगी हुई है।
अपर मुख्य सचिव कृषि की ओर से जारी किए गए आदेश के अनुसार, किसानों की जोतबही और खतौनी में अंकित कृषि भूमि और फसल की निर्धारित संस्तुतियों के आधार पर ही पीओएस मशीन से खाद की बिक्री की जाएगी।
इस हिसाब से एक एकड़ की फसल के लिए डेढ़ से दो बोरी डीएपी देने का ही प्राविधान है, जबकि किसान एक एकड़ के लिए पांच बोरी खाद की डिमांड करता है। असंतुलन के कारण समस्या उपज रही है।
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उधर, जसवंतनगर में डीएपी खाद समय से न मिल पाने के कारण किसान बेहद परेशान हैं। आलू की फसल में डीएपी खाद की जरूरत पड़ रही है। ब्लाक में पिछले साल की अपेक्षा इस वर्ष 30 प्रतिशत खाद अभी तक कम भेजी गई है। किसानों का कहना है कि खाद की कमी की जा रही है।
नगला इंछा के किसान यदुवीर सिंह यादव ने बताया कि खाद न मिलने से परेशानी हो रही है। उन्होंने मांग की कि केंद्रों पर शीघ्र डीएपी भेजी जाए। कांग्रेस के नगर अध्यक्ष यादवेंद्र सिंह यादव ने किसानों को खाद उपलब्ध कराने में नाकामी का आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों को अकारण परेशान किया जा रहा है।
प्रसपा के नगर अध्यक्ष राहुल गुप्ता ने आलू उत्पादक किसानों का संकट दूर कराने की मांग की है। चंदनपुर के किसान लालाराम का कहना है कि खाद के ना होने के कारण फसल दिनों दिन लेट होती जा रही है।
नगला विशुन के गोविंद का कहना है कि आलू की फसल बोने को तैयार है। मगर बिना खाद के आखिर बुवाई कैसे करें। ब्लाक जसवंतनगर में 8 सहकारी समितियां तथा 3 सहकारी संघ तथा दो कृभको सेंटर हैं, परंतु कहीं पर भी खाद उपलब्ध नहीं है।
डीएपी के जमाखोरों पर कार्यवाही की जाए
इटावा। किसान डीएपी और यूरिया खाद के लिए बहुत परेशान है। लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। किसानों की इस समस्या को लेकर कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष उदय भान सिंह यादव ने कई किसान सेवा केंद्रों, सहकारी समिति, नई मंडी में किसानों से मुलाकात की।
कहा कि कई एक सैकड़ा किसान अपनी डीएपी, यूरिया खाद लेने के लिए भीषण गर्मी में परेशान हो रहा है। कई स्थानों पर ब्लैक में खाद बिक रही है। जमाखोरों पर प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए।
नहीं है डीएपी यूरिया की कोई कमी
पिछले साल रबी के सीजन में 7000 एमटी डीएपी खाद बंटी थी। इस साल अभी अक्तूबर का महीना भी नहीं बीता है और 6000 एमटी डीएपी का वितरण हो चुका है। जिले में अभी 3000 एमटी डीएपी उपलब्ध है।
इसी महीने के अंत तक 1000 एमटी एनपीके भी उपलब्ध हो जाएगी। यूरिया की कहीं कोई कमी नहीं है। यूरिया का स्टाक 11000 एमटी उपलब्ध है। यूपी में डीएपी 1200 रुपये की मिल रही, जबकि एमपी में इसकी कीमत 1700 रुपये है।
एमपी के किसान भी यहां आकर अपने रिश्तेदारों के नाम पर डीएपी खरीद रहे हैं। इस कारण से भी समस्या आ रही है।
- अभिनंदन सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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जोतबही की गणना के हिसाब से मिल रही डीएपी को किसान पर्याप्त नहीं मान रहा। उसकी डिमांड ज्यादा है। इस कारण से चारों ओर डीएपी के लिए भीड़ लगी हुई है।
अपर मुख्य सचिव कृषि की ओर से जारी किए गए आदेश के अनुसार, किसानों की जोतबही और खतौनी में अंकित कृषि भूमि और फसल की निर्धारित संस्तुतियों के आधार पर ही पीओएस मशीन से खाद की बिक्री की जाएगी।
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इस हिसाब से एक एकड़ की फसल के लिए डेढ़ से दो बोरी डीएपी देने का ही प्राविधान है, जबकि किसान एक एकड़ के लिए पांच बोरी खाद की डिमांड करता है। असंतुलन के कारण समस्या उपज रही है।
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उधर, जसवंतनगर में डीएपी खाद समय से न मिल पाने के कारण किसान बेहद परेशान हैं। आलू की फसल में डीएपी खाद की जरूरत पड़ रही है। ब्लाक में पिछले साल की अपेक्षा इस वर्ष 30 प्रतिशत खाद अभी तक कम भेजी गई है। किसानों का कहना है कि खाद की कमी की जा रही है।
नगला इंछा के किसान यदुवीर सिंह यादव ने बताया कि खाद न मिलने से परेशानी हो रही है। उन्होंने मांग की कि केंद्रों पर शीघ्र डीएपी भेजी जाए। कांग्रेस के नगर अध्यक्ष यादवेंद्र सिंह यादव ने किसानों को खाद उपलब्ध कराने में नाकामी का आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों को अकारण परेशान किया जा रहा है।
प्रसपा के नगर अध्यक्ष राहुल गुप्ता ने आलू उत्पादक किसानों का संकट दूर कराने की मांग की है। चंदनपुर के किसान लालाराम का कहना है कि खाद के ना होने के कारण फसल दिनों दिन लेट होती जा रही है।
नगला विशुन के गोविंद का कहना है कि आलू की फसल बोने को तैयार है। मगर बिना खाद के आखिर बुवाई कैसे करें। ब्लाक जसवंतनगर में 8 सहकारी समितियां तथा 3 सहकारी संघ तथा दो कृभको सेंटर हैं, परंतु कहीं पर भी खाद उपलब्ध नहीं है।
डीएपी के जमाखोरों पर कार्यवाही की जाए
इटावा। किसान डीएपी और यूरिया खाद के लिए बहुत परेशान है। लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। किसानों की इस समस्या को लेकर कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष उदय भान सिंह यादव ने कई किसान सेवा केंद्रों, सहकारी समिति, नई मंडी में किसानों से मुलाकात की।
कहा कि कई एक सैकड़ा किसान अपनी डीएपी, यूरिया खाद लेने के लिए भीषण गर्मी में परेशान हो रहा है। कई स्थानों पर ब्लैक में खाद बिक रही है। जमाखोरों पर प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए।
नहीं है डीएपी यूरिया की कोई कमी
पिछले साल रबी के सीजन में 7000 एमटी डीएपी खाद बंटी थी। इस साल अभी अक्तूबर का महीना भी नहीं बीता है और 6000 एमटी डीएपी का वितरण हो चुका है। जिले में अभी 3000 एमटी डीएपी उपलब्ध है।
इसी महीने के अंत तक 1000 एमटी एनपीके भी उपलब्ध हो जाएगी। यूरिया की कहीं कोई कमी नहीं है। यूरिया का स्टाक 11000 एमटी उपलब्ध है। यूपी में डीएपी 1200 रुपये की मिल रही, जबकि एमपी में इसकी कीमत 1700 रुपये है।
एमपी के किसान भी यहां आकर अपने रिश्तेदारों के नाम पर डीएपी खरीद रहे हैं। इस कारण से भी समस्या आ रही है।
- अभिनंदन सिंह, जिला कृषि अधिकारी