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जिला जेल में कैदी ने लगा ली फांसी
ब्यूरो, अमर उजाला/इटावा
Updated Thu, 18 Jun 2015 12:16 AM IST
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जिला जेल में बुधवार की सुबह एक कैदी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जानकारी मिलने पर जेल के साथ ही प्रशासनिक अधिकारी भी आनन-फानन मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की तफ्तीश की।
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सिटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। मृतक को वर्ष 2007 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। वह नैनी जेल से पेशी पर इटावा आते वक्त सिपाहियों को चकमा देकर ट्रेन से फरार हो गया था। 24 मई को डकैती की वारदात को अंजाम देकर भागते वक्त पब्लिक ने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था।
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जिला जेल की बैरक नंबर 5-ए में निरुद्ध कैदी सुरेंद्र वर्मा (31) पुत्र सीताराम वर्मा निवासी कसाब खाना कोतवाली इटावा ने बुधवार की सुबह पौने 11 बजे बैरक के पास ही खड़े नीम के पेड़ पर अंगौछे से फांसी लगा ली। जेल में गश्त कर रहे बंदी रक्षकों ने उसे फांसी के फंदे पर लटका देखा तो सूचना आला अफसरों को दी।
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कैदी की मौत की खबर से जेल प्रशासन के साथ ही जिला प्रशासन के अफसरों में हड़कंप मच गया। फंदे पर लटके कैदी को नीचे उतारकर जेल के डाक्टरों ने उसका चेकअप करने के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
कैदी की मौत होने की सूचना पर सिटी मजिस्ट्रेट ईश्वर चंद्र, एसडीएम महेंद्र कुमार सिंह, अतिरिक्त मजिस्ट्रेट, अतिरिक्त मजिस्ट्रेट अमित भट्ट के साथ ही सीओ सिटी सिद्धार्थ वर्मा जेल पहुंचे। अफसरों ने जेलर पवन त्रिवेदी ने मामले की जानकारी लेने के बाद पूरे मामले की छानबीन की।
सिटी मजिस्ट्रेट ईश्वरचंद्र की मौजूदगी में शव का पंचनामा भरने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि कैदी ने जेल परिसर में बैरिक के पास खड़े मीठे नीम के पेड़ पर अपने ही अंगौछे का फंदा बनाकर फांसी लगाई है। उसने फांसी क्यों लगाई इसकी जांच चल रही है।
मृतक ने 26 सितंबर 2005 को शहर के मोहल्ला कुंज निवासी सावधान संस्था के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल के यहां अपने साथियों के साथ डकैती की वारदात को अंजाम दिया था। वारदात में मनोज अग्रवाल की मां की हत्या कर दी गई थी जबकि उनकी पत्नी व बेटे को गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था।
सप्ताह भर के अंदर ही तत्कालीन एसएसपी/एडीजी कानून दलजीत सिंह चौधरी ने माल सहित आरोपियों को पकड़कर जेल भेज दिया था। इसके बाद इटावा न्यायालय से 4 अक्तबूर 2007 को सुरेंद्र वर्मा को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। सजा सुनाने के बाद उसे 16 दिसंबर 2007 को केंद्रीय कारागार फतेहगढ़ सिफ्ट किया गया।
फतेहगढ़ जेल से उसे प्रशासनिक आधार पर नैनी जेल भेज दिया गया था। 23 जुलाई 2014 को इलाहाबाद पुलिस के सिपाही नरेंद्र सिंह व देवानंद कैदी सुरेंद्र वर्मा को लेकर नैनी जेल से इटावा कोर्ट में पेशी पर निकले थे। सिपाहियों के सोने पर रात में वह फतेहपुर के मलवां स्टेशन के पास जनता एक्सप्रेस से फरार हो गया था।
सुरेंद्र वर्मा ने 24 मई को दिनदहाड़े इकदिल थाना क्षेत्र के मोहल्ला एमएस पुरम में ट्रांसपोर्टर अर्जुन सिंह चंदेल के यहां डकैती की वारदात को अंजाम दिया। भागते वक्त सुरेंद्र वर्मा सहित दो युवक को पब्लिक ने पकड़ लिया था। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे इटावा जेल भेज दिया।
डाक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम
जिला कारागार में फांसी लगाकर आत्महत्या करने वाले सजायाफ्ता कैदी सुरेंद्र वर्मा के शव का पोस्टमार्टम बुधवार की शाम को दो डाक्टरों ने पैनल ने किया। पोस्टमार्टम में डा. अश्वनी कुमार और डा. पारितोष शुक्ला शामिल रहे। प्रशासन की ओर से पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई गई।
परिजनों ने फांसी पर जताया संदेह
मृतक कैदी सुरेंद्र वर्मा के परिजनों ने फांसी लगाकर मौत पर संदेह जताया है। उन्होंने दावा करते हुए कहा है कि सुरेंद्र वर्मा आत्महत्या नहीं कर सकता है। परिजनों में देर से सूचना दिए जाने को लेकर नाराजगी थी।
मृतक के भाई गजेंद्र वर्मा व राजेंद्र वर्मा का कहना था कि सुरेंद्र की मौत पौने 11 बजे हुई है जबकि उन्हें सूचना दो बजे दी गई। अगर पहले सूचना मिलती तो वह मौका पर पहुंचते। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
डीआईजी जेल ने किया निरीक्षण
कैदी की मौत के बाद बुधवार की शाम को डीआईजी जेल शरद कुलश्रेष्ठी ने जेल पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी ली। उन्होंने जेलर पवन त्रिवेदी से बातचीत के बाद घटनास्थल का भी निरीक्षण किया।
उन्होंने बताया कि जेल ही हाई सिक्योरिटी बैरक में मृतक सुरेंद्र वर्मा के साथ ही बंदी डोली और बीटू को रखा गया था। डोली और बीटू की बुधवार को पेशी पर चले गए। बैरक में सुरेंद्र वर्मा अकेला रह गया था।
करीब साढे़ दस बजे उसे नहाने के लिए वहां से निकाला गया। पास ही लगे हैंडपंप के पास वह नहाने गया और अगौछे से फांसी लगा ली। उन्होंने कहा कि जिस वक्त यह घटना हुई उस समय बंदीरक्षक कहां थे उसकी निगरानी क्यों नहीं की गई इसकी जांच कराई जा रही है। जांच में अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।