{"_id":"5aaff5334f1c1ba4238b613d","slug":"gang-leader-had-call-on-arto","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरगना की थी एआरटीओ पर हनक","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
सरगना की थी एआरटीओ पर हनक
अमर उजाला ब्यूरो/इटावा
Updated Mon, 19 Mar 2018 11:06 PM IST
विज्ञापन
सोमवार को सुनसान पड़ा सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय
- फोटो : अमर उजाला
इटावा। एआरटीओ दफ्तर में फर्जी कागजात बनाने के रैकेट के सरगना प्रदीप गुप्ता की एआरटीओ पर पूरी हनक थी, जबकि लिपिक बेबी अपने घर पर ही समानांतर परिवहन विभाग चला रही थी। प्रदीप गुप्ता, एआरटीओ हिमांशु जैन व एआरटीओ मोहम्मद अजीम की गिरफ्तारी के दूसरे दिन सोमवार को पुलिस ने दफ्तर से कई अहम दस्तावेज बरामद किए। इसके आधार पर सिविल लाइंस थाने में धोखाधड़ी, फर्जीवाड़े के अलावा भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस की एक टीम तीनों लोगों को भ्रष्टाचार निरोधक अदालत में पेश करने के लिए लखनऊ ले गई है। दूसरी टीम परमिट लिपिक बेबी ऊषा की तलाश में लग गई है।
विज्ञापन
सोमवार को एसएसपी वैभव कृष्ण ने पुलिस और प्रशासनिक टीम के साथ एआरटीओ दफ्तर में छापा मारकर रैकेट का भंडाफोड़ किया था। प्राइवेट कर्मी और रैकेट के सरगना प्रदीप गुप्ता को गिरफ्तार किया तो पता चला कि वह लोगों से अवैध वसूली कर लाखों के वारे न्यारे कर रहा था। इसके बाद कार्यालय में तैनात महिला लिपिक बेबी ऊषा के घर दबिश दी गी। वह घर पर ही परिवहन विभाग का सामानंतर दफ्तर चला रही थी। वह तो नहीं मिली, लेकिन उसके घर से छह लाख 19 हजार रुपये नकद के अलावा सोने-चंादी के जेवरातों के अलावा चांदी के 19 बिस्किट मिले। कंप्यूटर प्रिंटर स्कैनर, टैक्स तथा अस्थायी परमिट की छपी बुकलेट पुलिस ने बरामद की। पुलिस ने प्रदीप गुप्ता के जैतपुरा आगरा स्थित घर पर भी छापा मारा तो वहां से भी नकदी बरामद की गई। देर रात पुलिस ने एआरटीओ प्रशासन हिमांशु जैन के अलावा एआरटीओ प्रवर्तन मोहम्मद अजीम की भी संलिप्तता पाई तो उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने पकडे़ गए सभी लोगों से रात में पूछताछ की। सोमवार को तीनों लोगों का जिला अस्पताल में डाक्टरी परीक्षण भी कराया गया।
विज्ञापन
एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि 61 बसों का मालिक प्रदीप गुप्ता इतना हनकदार था कि वह ख्ुाद ही अधिकारियों के हस्ताक्षर कर लोगों को कागजात बनाकर दे देता था। प्रदीप गुप्ता अधिकरियों के साथ मिलकर काम करता था। सविलांस के जरिये पता चला कि एआरटीओ प्रवर्तन ने भी नौ मार्च को प्रदीप से बात की और उससे काम करने के लिए कहा था। प्रदीप गुप्ता स्वयं ही चेकिंग करने के लिए निकलता था और चालान पर ख्ुाद ही अधिकरी के हस्ताक्षर करता था। उसने ऐसा एक बार नहीं कई बार किया। एसएसपी ने बताया कि रविवार को छापेमारी के दौरान पुलिस ने दफ्तर में काम कराने आए कई लोगों को पकड़ा था, जिन्हें पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया।
विज्ञापन