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जानलेवा हमले में दो को सात वर्ष की सजा
Updated Sat, 18 Nov 2017 10:26 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
इटावा। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बादाम सिंह ने जानलेवा हमले के एक मामले में सुनवाई करते हुए दो अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए उन्हें सात सात वर्ष की सजा सुनाई। साथ ही दस-दस हजार रुपये जुर्माना लगाया।
वादी जसवेंद्र सिंह ने 7 जुलाई 2006 को सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज कराया था। जिसमें कहा था कि वह अपने बड़े भाई राघवेंद्र सिंह उर्फ मंटू व छोटे भाई विजेंद्र सिंह उर्फ चिंटू के साथ सात जुलाई की रात को रेलवे स्टेशन के साइकिल स्टैंड से अपने घर शांती कॉलोनी जा रहे थे। मैनपुरी क्रॉसिंग के पास मनोहर भदौरिया, मनोज भदौरिया, अशोक चौहान व विकास रावत ने मुझे व मेरे भाइयों को जान से मारने की नीयत से घेरकर कई फायर किए। मेरे भाई मंटू के सीने में और चिंटू के पेट में गोली लगी मेरे सिर के ऊपर से गोली निकल गई। मामला दर्ज कर पुलिस ने विवेचना की। विवेचना के बाद पुलिस ने अशोक, विकास रावत व मनोज के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। अभियुक्त विकास को नाबालिग मानकर उसका परीक्षण जुवेनाइल कोर्ट में भेज दिया गया। मनोज व अशोक का परीक्षण न्यायालय में हुआ। अभियोजन पक्ष की ओर पैरवी करते हुए शासकीय अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार अपने तर्कों के जरिए वाद को सिद्ध करने में सफल रहे।
- जानलेवा हमले में दो को सात वर्ष की सजा
- दोनों पर दस-दस हजार रुपये जुर्माना भी लगा
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इटावा। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बादाम सिंह ने जानलेवा हमले के एक मामले में सुनवाई करते हुए दो अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए उन्हें सात सात वर्ष की सजा सुनाई। साथ ही दस-दस हजार रुपये जुर्माना लगाया।
वादी जसवेंद्र सिंह ने 7 जुलाई 2006 को सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज कराया था। जिसमें कहा था कि वह अपने बड़े भाई राघवेंद्र सिंह उर्फ मंटू व छोटे भाई विजेंद्र सिंह उर्फ चिंटू के साथ सात जुलाई की रात को रेलवे स्टेशन के साइकिल स्टैंड से अपने घर शांती कॉलोनी जा रहे थे। मैनपुरी क्रॉसिंग के पास मनोहर भदौरिया, मनोज भदौरिया, अशोक चौहान व विकास रावत ने मुझे व मेरे भाइयों को जान से मारने की नीयत से घेरकर कई फायर किए। मेरे भाई मंटू के सीने में और चिंटू के पेट में गोली लगी मेरे सिर के ऊपर से गोली निकल गई। मामला दर्ज कर पुलिस ने विवेचना की। विवेचना के बाद पुलिस ने अशोक, विकास रावत व मनोज के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। अभियुक्त विकास को नाबालिग मानकर उसका परीक्षण जुवेनाइल कोर्ट में भेज दिया गया। मनोज व अशोक का परीक्षण न्यायालय में हुआ। अभियोजन पक्ष की ओर पैरवी करते हुए शासकीय अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार अपने तर्कों के जरिए वाद को सिद्ध करने में सफल रहे।
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- जानलेवा हमले में दो को सात वर्ष की सजा
- दोनों पर दस-दस हजार रुपये जुर्माना भी लगा