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मुआवजा मिला छह लाख, तीन लाख रिश्वत में गए
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इटावा। नेशनल हाईवे के लिए सरकार ने जमीन ली, तो छह लाख रुपये का मुआवजा मिला, लेकिन किसान के तीन लाख रुपये रिश्वत में चले गए। इतना ही नहीं उसके साथ दूसरे लोगों ने भी दगा कर दिया।
उसने जितना प्लाट बेचा था, बिचौलियों ने उससे दोगुना में बैनामा करा लिया और पूरा पैसा भी नहीं दिया। किसान कई दिन से थाने में धक्के खाता रहा, जब सुनवाई नहीं हुई तो वह सोमवार को कलक्ट्रेट में पत्नी-बच्चों समेत धरने पर बैठ गया।
इस पर एडीएम जयप्रकाश ने नायब तहसीलदार जसवंतनगर को जांच के आदेश दिए हैं। जसवंतनगर थाना क्षेत्र के कैस्त गांव निवासी चंद्रभान का बेटा भगवान दास परिवार सहित कलेक्ट्रेट पहुंचा और धरने पर बैठ ग
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या। उसके साथ में उसकी पत्नी और दो बेटियां भी थीं। उसने साथ में एक बैनर भी लगाया हुआ था। उसने बताया कि एनएच-2 (दिल्ली-कोलकाता हाईवे) में उसकी जमीन अधिगृहीत की गई थी। उसमें उसके हिस्से छह लाख रुपये मुआवजा बना था।
आरोप लगाया कि उस मुआवजे को जारी करने के लिए उससे तीन लाख रुपये लिए गए। बताया कि यह रुपये एक बिचौलिए के माध्यम से एक शख्स ने लिए हैं।
इसके अलावा उसने आरोप लगाया कि उसने 20 गुणा 60 फीट का एक प्लाट बेचा था, लेकिन बिचौलियों ने 40 गुणा 60 का बैनामा करा लिया। अब पैसा मांगने पर उसे जान से मारने की धमकी दी जा रही है।
उसने इस बाबत एडीएम जयप्रकाश को एक शिकायती पत्र भी दिया है। एडीएम ने इस मामले में नायब तहसीलदार जसवंतनगर को जांच करके 15 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
बैनर पर भड़के एडीएम
भगवान दास ने कलक्ट्रेट में एक बैनर भी लगाया हुआ था। उसमें उसने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए लिखा था कि उससे तीन लाख रुपये की रिश्वत एडीएम कार्यालय में ली गई है।
इसकी भनक जब एडीएम जयप्रकाश को लगी तो वे मौके पर पहुंचे। भगवान दास और उसकी पत्नी से पूरी बात की। बताया कि मामला उनके समय का नहीं है, फिर भी आप बैनर लगाए हुए हैं।
उन्होंने पुलिस कर्मियों से तुरंत बैनर हटाने को कहा। उन्होंने मौके पर ही भगवान दास को आश्वासन दिया कि वे पूरे मामले की जांच कराकर दोषी पर कार्रवाई की जाएगी।
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उसने जितना प्लाट बेचा था, बिचौलियों ने उससे दोगुना में बैनामा करा लिया और पूरा पैसा भी नहीं दिया। किसान कई दिन से थाने में धक्के खाता रहा, जब सुनवाई नहीं हुई तो वह सोमवार को कलक्ट्रेट में पत्नी-बच्चों समेत धरने पर बैठ गया।
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इस पर एडीएम जयप्रकाश ने नायब तहसीलदार जसवंतनगर को जांच के आदेश दिए हैं। जसवंतनगर थाना क्षेत्र के कैस्त गांव निवासी चंद्रभान का बेटा भगवान दास परिवार सहित कलेक्ट्रेट पहुंचा और धरने पर बैठ ग
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या। उसके साथ में उसकी पत्नी और दो बेटियां भी थीं। उसने साथ में एक बैनर भी लगाया हुआ था। उसने बताया कि एनएच-2 (दिल्ली-कोलकाता हाईवे) में उसकी जमीन अधिगृहीत की गई थी। उसमें उसके हिस्से छह लाख रुपये मुआवजा बना था।
आरोप लगाया कि उस मुआवजे को जारी करने के लिए उससे तीन लाख रुपये लिए गए। बताया कि यह रुपये एक बिचौलिए के माध्यम से एक शख्स ने लिए हैं।
इसके अलावा उसने आरोप लगाया कि उसने 20 गुणा 60 फीट का एक प्लाट बेचा था, लेकिन बिचौलियों ने 40 गुणा 60 का बैनामा करा लिया। अब पैसा मांगने पर उसे जान से मारने की धमकी दी जा रही है।
उसने इस बाबत एडीएम जयप्रकाश को एक शिकायती पत्र भी दिया है। एडीएम ने इस मामले में नायब तहसीलदार जसवंतनगर को जांच करके 15 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
बैनर पर भड़के एडीएम
भगवान दास ने कलक्ट्रेट में एक बैनर भी लगाया हुआ था। उसमें उसने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए लिखा था कि उससे तीन लाख रुपये की रिश्वत एडीएम कार्यालय में ली गई है।
इसकी भनक जब एडीएम जयप्रकाश को लगी तो वे मौके पर पहुंचे। भगवान दास और उसकी पत्नी से पूरी बात की। बताया कि मामला उनके समय का नहीं है, फिर भी आप बैनर लगाए हुए हैं।
उन्होंने पुलिस कर्मियों से तुरंत बैनर हटाने को कहा। उन्होंने मौके पर ही भगवान दास को आश्वासन दिया कि वे पूरे मामले की जांच कराकर दोषी पर कार्रवाई की जाएगी।