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कालेज ने नहीं कराई परीक्षा, छात्र परेशान
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
Updated Thu, 09 Apr 2015 12:16 AM IST
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जनता कालेज बकेवर के 24 स्टूडेंट्स को भविष्य अधर में लटका है। कारण ये है कि इस बार कालेज प्रबंधन बीएससी तृतीय वर्ष की बायोटेक थर्ड पेपर की परीक्षा कराना ही भूल गया। कुछ दिन तक तो प्राध्यापक छात्रों को सही जानकारी देने से कतराते रहे।
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बाद में स्टूडेंट्स को पता चला तो उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई। अब कालेज प्रबंधन स्टूडेंट्स से बैक पेपर देने को कहा रहा है। स्टूडेंट्स ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मदद की गुहार लगाई है। मानी तिवारी, ट्विंकल विश्वास ने बताया कि वे बीएससी तृतीय वर्ष की छात्राएं हैं।
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बायोटेक विषय के थर्ड पेपर की परीक्षा 22 मार्च को होनी थी। उक्त तिथि पर वे परीक्षा देने के लिए निर्धारित समय पर पहुंचीं तो उनसे यह कहकर मना कर दिया गया कि परीक्षा 29 मार्च को होगी। जब वे 29 मार्च को परीक्षा देने के लिए पहुंचीं तो बताया गया कि आज भी परीक्षा नहीं होगी क्योंकि जो पेपर आया है उसमें आज की तिथि और समय नहीं दिया गया।
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सभी स्टूडेंट्स का नाम और मोबाइल नंबर ले लिया गया। तब से आज तक कोई सूचना नहीं दी गई। छात्रा लक्ष्मी वर्मा और दीक्षा सोनी ने बताया कि उनसे प्राचार्य ने कहा कि बैक पेपर भर दो। तुम्हारी परीक्षा छूट गई है। छात्राओं का कहना है कि कालेज प्रबंधन अपनी गलती छिपाने के लिए सही बात नहीं बता रहा।
विश्व विद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि जब तक कालेज लिखित में जानकारी नहीं देता, तब तक दुबारा परीक्षा संभव नहीं है। छात्रा पल्लवी त्रिपाठी और पल्लवी मिश्रा ने बताया कि उनकी क्लास में 21 लड़कियां और तीन छात्र हैं। अधिकतर स्टूडेंट्स बाहर के होेने के कारण परीक्षा खत्म होने के बाद घर चले गए हैं। कालेज के गैर जिम्मेदाराना व्यवहार के कारण भविष्य खराब हो रहा है। जिलाधिकारी क ो राज्यपाल तथा कुलपति के नाम ज्ञापन सौंपा है।
प्राचार्य डॉ. आरआर अग्रवाल ने बताया कि गलती हमारी नहीं बल्कि विश्वविद्यालय की है। जो पेपर का बंडल भेजा गया था उसमें न दिन लिखा था और न तारीख। असमंजस की स्थिति में पेपर खोला नहीं गया। स्कीम में भी कुुछ स्पष्ट नहीं था। विश्वविद्यालय से संपर्क में हूं।
अधिकारियों ने अपनी गलती मान ली है। शीघ्र ही दूसरी डेट दी जा रही है। छात्र-छात्राओं का भविष्य खराब नहीं होने दिया जाएगा। परीक्षा के दिन मैं छुट्टी पर था, ड्यूटी पर परीक्षा इंचार्ज थे। वह अगर ध्यान देते तो ऐसा नहीं होता।