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कूड़ेदान रख नहीं रहे, और कहते हैं, साफ रखें शहर
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सिविल लाइन थाने के पास लगे टूटे हुए कूड़ेदान
- फोटो : ETAWAH
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इटावा। नगर पालिका परिषद स्वच्छता अभियान पर काफी खर्च कर रही है। पूरे शहर में वॉल पेटिंग व पोस्टर लगाए गए हैं। हालात यह हैं कि चौराहों व सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ेदान ही नहीं है। ज्यादातर जगहों पर या तो कूड़ेदान टूट गए हैं या गायब हैं। कूड़ा सड़कों के किनारे पड़ता है।
नगर पालिका परिषद की ओर से 40 वार्डों में तीन तरह के कूड़ेदान रखने की व्यवस्था की गई है। एक बड़ा कूड़ादान जो ट्राली नुमा होता है। दूसरा हैंगिंग कूड़ादान जिसमें दो कूड़ादान टंगे रहते हैं। तीसरे छोटे कूडे़दान जो प्रमुख प्रतिष्ठानों अथवा सार्वजिनक स्थानों पर बने रहते हैं। छोटे कूड़ेदानों से कूड़ा बड़े में पहुंचता है और वहां से निस्तारण के लिए भेजा जाता है। छोटे कूड़ेदान तो कहीं हैं ही नहीं। तीन साल पहले नगर पालिका ने कूड़ेदान बांटे थे। अब यह टूटकर गायब हो चुके हैं। हैंगिग कूड़ेदान में सिर्फ हैंगर बचा है। शहर के वार्डोँ में कूड़ा एकत्रित करने के स्थानों पर कोई कूड़ादान सही सलामत नहीं है। ऐसी स्थिति में कूड़ा आसपास फैला रहता है। औसतन प्रतिदिन 70 टन कूड़ा शहर से निकलता है। इस कूड़े को एकत्रित करने के लिए कम से कम 100 ट्रालीनुमा कूड़ेदान होने चाहिए। पूरे शहर में 20-25 कूड़ेदान ही मिलेंगे। वह भी टूटी-फूटी हालत में।
शहर के 40 वार्डो में तीन साल पहले कूड़ेदान रखवाए गए थे। एक-एक करके वह टूटते रहे। कूड़ेदानों की मरम्मत नहीं कराई गई। इससे वह जर्जर हालत में पहुंचते गए। अब हालत यह है कि शहर में कूड़ेदान नहीं दिखते। एक-दो मिले भी तो टूटे दिखेंगे। कूड़ा आसपास फैला रहता है।
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तीन लाख आबादी वाले इटावा शहर में नगर पालिका परिषद के 40 वार्ड लगते हैं। वैसे नगर पालिका कूड़ा निस्तारण के संबंध में सर्वे कराती है। इसमें कितने कूड़ेदान की जरूरत कहां है, इसका पता लगाया जाता है। हालत यह है कि तीन साल से सर्वे ही नहीं हो सका है।
कूड़ा निस्तारण प्रतिदिन कराया जा रहा है। आवश्यकता के संबंध में सर्वे कराया जा रहा है। कूड़ेदानों के बारे में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता समाप्त होने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।
-नौशाबा खानम, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद
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नगर पालिका परिषद की ओर से 40 वार्डों में तीन तरह के कूड़ेदान रखने की व्यवस्था की गई है। एक बड़ा कूड़ादान जो ट्राली नुमा होता है। दूसरा हैंगिंग कूड़ादान जिसमें दो कूड़ादान टंगे रहते हैं। तीसरे छोटे कूडे़दान जो प्रमुख प्रतिष्ठानों अथवा सार्वजिनक स्थानों पर बने रहते हैं। छोटे कूड़ेदानों से कूड़ा बड़े में पहुंचता है और वहां से निस्तारण के लिए भेजा जाता है। छोटे कूड़ेदान तो कहीं हैं ही नहीं। तीन साल पहले नगर पालिका ने कूड़ेदान बांटे थे। अब यह टूटकर गायब हो चुके हैं। हैंगिग कूड़ेदान में सिर्फ हैंगर बचा है। शहर के वार्डोँ में कूड़ा एकत्रित करने के स्थानों पर कोई कूड़ादान सही सलामत नहीं है। ऐसी स्थिति में कूड़ा आसपास फैला रहता है। औसतन प्रतिदिन 70 टन कूड़ा शहर से निकलता है। इस कूड़े को एकत्रित करने के लिए कम से कम 100 ट्रालीनुमा कूड़ेदान होने चाहिए। पूरे शहर में 20-25 कूड़ेदान ही मिलेंगे। वह भी टूटी-फूटी हालत में।
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शहर के 40 वार्डो में तीन साल पहले कूड़ेदान रखवाए गए थे। एक-एक करके वह टूटते रहे। कूड़ेदानों की मरम्मत नहीं कराई गई। इससे वह जर्जर हालत में पहुंचते गए। अब हालत यह है कि शहर में कूड़ेदान नहीं दिखते। एक-दो मिले भी तो टूटे दिखेंगे। कूड़ा आसपास फैला रहता है।
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तीन लाख आबादी वाले इटावा शहर में नगर पालिका परिषद के 40 वार्ड लगते हैं। वैसे नगर पालिका कूड़ा निस्तारण के संबंध में सर्वे कराती है। इसमें कितने कूड़ेदान की जरूरत कहां है, इसका पता लगाया जाता है। हालत यह है कि तीन साल से सर्वे ही नहीं हो सका है।
कूड़ा निस्तारण प्रतिदिन कराया जा रहा है। आवश्यकता के संबंध में सर्वे कराया जा रहा है। कूड़ेदानों के बारे में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता समाप्त होने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।
-नौशाबा खानम, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद