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28 साल बाद घर पर शहीद की पत्नी को दिया प्रमाण पत्र
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शहीद राजेश कुमार की पत्नी ऊषा को प्रमाण पत्र सौंपते बीएसएफ के डिप्टी कमांडेंट।
- फोटो : ETAWAH
सैफई। बीएसएफ के डिप्टी कमांडेंट ने शहीद के घर करीब 28 साल बाद पहुंचकर शहीद की पत्नी को प्रमाण पत्र सौंपा। भरोसा दिलाया कि हर मुसीबत में वह साथ खड़े हैं। मकान बनवाने, बच्चों को शिक्षा सहित सभी सरकारी लाभ मुहैया कराए जाएंगे। उन्होंने शहीद के चित्र पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
गांव नगला बर्माजीत निवासी सुघर सिंह के बेटे राजेश कुमार 31 मार्च 1990 को बीएसएफ में आरक्षी पद पर भर्ती हुए थे। वह 20 फरवरी 1994 को बांग्लादेश सीमा पर ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए थे।
28 साल बाद 178 सीमा सुरक्षा बल के डिप्टी कमांडेंट मनोज कुमार आरक्षी के घर पहुंचे। उनकी पत्नी ऊषा को शहीद प्रमाण पत्र दिया। डिप्टी कमांडेंट ने बताया कि आरक्षी ने राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है।
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बीएसएफ शहीदों को सम्मान देने के लिए ऑपरेशन शहीद प्रमाण पत्र दे रहा है। डिपार्टमेंट ने 4000 स्क्वायर फुट का मकान का जो भी खर्चा होगा, वह भी मुहैया कराएगा।
इसके अलावा सरकारी सुविधाओं का भी लाभ मिलेगा। शहीद के पुत्र को पहले ही नौकरी मिल चुकी है। इसके बाद इटावा में कोतवाली थाना क्षेत्र के नुमाइश चौराहा स्थित शहीद रामजीवन यादव के आवास पर भी डिप्टी कमांडेंट मनोज कुमार पहुंचे।
यहां पर डिप्टी कमांडेंट ने शहीद की पत्नी मीना यादव को शहीद का प्रमाण पत्र सौंपा। इस मौके पर मनोज कुमार ने बताया कि बीएसएफ उनके परिवार को सभी तरह की मदद मुहैया कराएगा।
इसमें बच्चों की पढ़ाई, मकान बनाने आदि के लिए भी बीएसएफ मदद करेगा। शहीद रामजीवन वर्ष 1988 में बीएसएफ में शामिल हुए थे। वह सात अक्टूबर 2005 में जम्मू-कश्मीर के सोपोर में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए थे।
चौबिया थाना क्षेत्र के नगला बरी निवासी नितिन यादव दो अक्टूबर 2016 में जम्मू के बारामूला में आतंकियों से लोहा लेते समय शहीद हो गए थे।
नितिन यादव वर्ष 201 में बीएसएफ में भर्ती हुए थे। शुक्रवार को शहीद नितिन यादव के परिवार से बीएसएफ के उप कमांडेंट मनोज कुमार ने मुलाकात की।
उन्होंने शहीद की मां ऊषा देवी को प्रमाण पत्र सौंपा। मनोज कुमार कुमार ने अपना मोबाइल नंबर भी दिया। कहा कि किसी भी तरह की परेशानी होने पर हमें तत्काल सूचना दें।
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गांव नगला बर्माजीत निवासी सुघर सिंह के बेटे राजेश कुमार 31 मार्च 1990 को बीएसएफ में आरक्षी पद पर भर्ती हुए थे। वह 20 फरवरी 1994 को बांग्लादेश सीमा पर ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए थे।
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28 साल बाद 178 सीमा सुरक्षा बल के डिप्टी कमांडेंट मनोज कुमार आरक्षी के घर पहुंचे। उनकी पत्नी ऊषा को शहीद प्रमाण पत्र दिया। डिप्टी कमांडेंट ने बताया कि आरक्षी ने राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है।
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बीएसएफ शहीदों को सम्मान देने के लिए ऑपरेशन शहीद प्रमाण पत्र दे रहा है। डिपार्टमेंट ने 4000 स्क्वायर फुट का मकान का जो भी खर्चा होगा, वह भी मुहैया कराएगा।
इसके अलावा सरकारी सुविधाओं का भी लाभ मिलेगा। शहीद के पुत्र को पहले ही नौकरी मिल चुकी है। इसके बाद इटावा में कोतवाली थाना क्षेत्र के नुमाइश चौराहा स्थित शहीद रामजीवन यादव के आवास पर भी डिप्टी कमांडेंट मनोज कुमार पहुंचे।
यहां पर डिप्टी कमांडेंट ने शहीद की पत्नी मीना यादव को शहीद का प्रमाण पत्र सौंपा। इस मौके पर मनोज कुमार ने बताया कि बीएसएफ उनके परिवार को सभी तरह की मदद मुहैया कराएगा।
इसमें बच्चों की पढ़ाई, मकान बनाने आदि के लिए भी बीएसएफ मदद करेगा। शहीद रामजीवन वर्ष 1988 में बीएसएफ में शामिल हुए थे। वह सात अक्टूबर 2005 में जम्मू-कश्मीर के सोपोर में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए थे।
चौबिया थाना क्षेत्र के नगला बरी निवासी नितिन यादव दो अक्टूबर 2016 में जम्मू के बारामूला में आतंकियों से लोहा लेते समय शहीद हो गए थे।
नितिन यादव वर्ष 201 में बीएसएफ में भर्ती हुए थे। शुक्रवार को शहीद नितिन यादव के परिवार से बीएसएफ के उप कमांडेंट मनोज कुमार ने मुलाकात की।
उन्होंने शहीद की मां ऊषा देवी को प्रमाण पत्र सौंपा। मनोज कुमार कुमार ने अपना मोबाइल नंबर भी दिया। कहा कि किसी भी तरह की परेशानी होने पर हमें तत्काल सूचना दें।