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चादरें चढ़तीं मजारों पर मगर ठिठुरते लोग हैं

Mon, 16 Nov 2015 11:53 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, इटावा
ब्यूरो/ अमर उजाला, इटावा Updated Mon, 16 Nov 2015 11:53 PM IST
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C?dar?? ca?hat?? maj?r?? para magara ?hi?hurat? l?ga hai?

जसवंतनगर में नए बस स्टैंड के पास रविवार रात आयोजित कवि सम्मेलन में देश के चर्चित कवियों ने अपने सशक्त रचनाओं से श्रोताओं को रात भर बांधे रखा। इस मौके पर कवि राजीव राज के गीत संग्रह  वेदना के फूल का विमोचन सपा जिलाध्यक्ष अशोक यादव ने किया।

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प्रदेश के लोकनिर्माण और सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने कवि सम्मेलन का उद्घाटन किया। ईश्रीदेवी और वीरेंद्र सिंह की स्मृति में विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संघ के अध्यक्ष मंगेश यादव द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन में कवियत्री रचना तिवारी तथा कवि बहादुर सिंह निर्दोषी को शॉल तथा प्रतीक चिह्न भेट कर सम्मानित किया गया।
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कवि राजीव राज के गीत संग्रह वेदना के फूल का विमोचन सपा जिलाध्यक्ष अशोक यादव ने किया। देवास के शशीकांत यादव के संचालन में रात आठ बजे से शुरू हुए कवि सम्मेलन का शुभारंभ  एटा की कवियत्री योगिता चौहान ने सरस्वती वंदना से किया।
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मुंबई से आए लाफ्टर चैंपियन सरदार प्रताप फौजदार की हस्य रचना ‘आगे-आगे एक नंगा आदमी भागा चला जा रहा था। उसके पीछे एक कच्छा पहनकर भाग रहा था। मेरे मित्र ने कहा प्रताप सिंह यह क्या कलेश है यह कैसा भेष है, मैंने कहा भाई आगे वाला विकसित और पीछे वाला विकासशील देश है, ने श्रोताओं को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया।

उदयपुर के  अजातशत्रु की रचना, बलिदानों की अमर ज्योति में परवाने खो जाते हैं, खो जाते आंखों के तारे मस्ताने सो जाते हैं सो जाते हैं, ने श्रोताओं को झकझोर दिया। संचालक शशीकांत यादव शशी ने, मातृभूमि अस्मिता का प्रश्न यदि आएगा तो रचना भी द्रोपदी का चीर बन जाएगी, सुनाकर वाहवाही लूटी।

सिरसागंज फिरोजाबाद के डा. बहादुर सिंह निर्दोषी की रचना , भले ही चार पल खिलकर सुमन मुख मोड़ जाते हैं मगर अंदाज जीने का चमन छोड़ जाते हैं,असरदार बन पड़ी। इटावा के सामाजिक चेतना के गीतकार राजीव राय की रचना ‘चादरें चढ़ती मजारों पर ठिठुरते लोग हैं, आदमी को मजहबों के भी अजब ये रोग हैं, सुनाकर श्रोताओं को संजीदा कर दिया।


सोनभद्र की रचना तिवारी, बाराबंकी के कवि शिवकुमार व्यास के अलावा अशोक यादव एवं विवेक यादव ने भी समसामयिक विषयों से संबंधित सशक्त काव्य रचनाओं से श्रोताओं को आनंदित किया।
 
 

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