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अस्पताल निर्माण में बजट का ब्रेक
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सैफई। प्रदेश की भाजपा सरकार यदि अपनी तिजोरी खोल देती तो जननी का कल्याण हो जाता। सैफई में 176.77 करोड़ रुपये से बनाया जा रहा 300 बेड का गायनी अस्पताल पिछले छह साल से अधूरा पड़ा हुआ है।
प्रदेश सरकार ने बजट जारी नहीं किया, इसलिए इसका काम अधूरा पड़ा हुआ है। महिला अस्पताल की योजना की आधारशिला 2016 में तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने रखी थी।
सैफई में 2016 में तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने 300 बेड के अस्पताल की स्वीकृति दी थी। यह महिला अस्पताल प्रदेश का सबसे बड़ा अस्पताल था, जिसकी लागत 176.77 करोड़ रखी गई थी।
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इसका निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका था। 2017 में सरकार के जाने के बाद लगातार बजट का अभाव रहा, जिससे परियोजना अभी भी अधूरी है। बीते पांच साल में सिर्फ 30 करोड़ रुपये ही शासन से मिल सके।
निर्माण निगम पिछले पांच साल से सरकार की ओर बजट की टकटकी लगाए हुए है। अस्पताल के शुरू होने से पहले से संचालित आयुर्विज्ञान विवि को भी राहत मिल सकती थी।
सुखबीर यादव बताते हैं कि यहां पर कई परियोजनाएं बजट के अभाव में पूर्ण नहीं हो सकी, जबकि इटावा ने सांसद व विधायक भी भाजपा सरकार को दिए थे, लेकिन भाजपा सरकार ने यहां पर काम कराना उचित नहीं समझा।
यह अस्पताल यहां पर बन जाता तो महिलाओं को काफी बड़ी सुविधाएं मिलती।
सुनील ठाकुर बताते हैं कि अस्पताल को बजट शासन द्वारा मिल जाता तो अब तक 5 वर्ष के अंदर चालू हो जाता, लेकिन सरकार बदले की भावना से सैफई को बजट में दिया, जबकि यहां पर लगभग एक दर्जन से अधिक जिले तथा मध्यवर्ती एमपी तक यहां पर मरीज आते हैं।
प्रदेश के दो मंत्री भी कर चुके दौरा
जिले के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही और चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना निर्माणाधीन स्थल का निरीक्षण कर चुके हैं। दोनों ही मंत्रियों ने जल्द बजट दिलाने का आश्वासन दिया था, लेकिन बजट नहीं मिल सका।
एमपी समेत कई जिलों के आते मरीज
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई में इटावा ही नहीं कानपुर देहात, औरैया, मैनपुरी, जालौन, फिरोजाबाद, कन्नौज, फर्रुखाबाद समेत कई जिलों के मरीज इलाज कराने आते हैं।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे बनने के बाद विवि का महत्व और बढ़ गया है। कई बार ऐसा भी हुआ, जब रास्ते में ही महिलाओं के प्रसव पीड़ा हुई तो उन्हें मेडिकल यूनिवर्सिटी लेकर आना पड़ा।
50 फीसदी काम हो चुका है पूरा
50 फीसदी काम पूरा हो चुका है। शेष कार्य बजट मिलने पर पूर्ण किया जाएगा, क्योंकि 2015 से लेकर अब तक 75 करोड़ रुपये ही शासन से मिले हैं।
अब अगर शासन द्वारा लगभग 100 करोड़ रुपये मिल जाते, तो एक साल के अंदर काम पूर्ण हो जाएगा। यहां के लोगों को सुविधाएं भी मिलने लगेंगी। परियोजना को सात वर्ष हो चुके हैं, अब लागत भी बढ़ेगी।
- एके सिंह, प्रोजेक्ट मैनेजर, निर्माण निगम
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प्रदेश सरकार ने बजट जारी नहीं किया, इसलिए इसका काम अधूरा पड़ा हुआ है। महिला अस्पताल की योजना की आधारशिला 2016 में तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने रखी थी।
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सैफई में 2016 में तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने 300 बेड के अस्पताल की स्वीकृति दी थी। यह महिला अस्पताल प्रदेश का सबसे बड़ा अस्पताल था, जिसकी लागत 176.77 करोड़ रखी गई थी।
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इसका निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका था। 2017 में सरकार के जाने के बाद लगातार बजट का अभाव रहा, जिससे परियोजना अभी भी अधूरी है। बीते पांच साल में सिर्फ 30 करोड़ रुपये ही शासन से मिल सके।
निर्माण निगम पिछले पांच साल से सरकार की ओर बजट की टकटकी लगाए हुए है। अस्पताल के शुरू होने से पहले से संचालित आयुर्विज्ञान विवि को भी राहत मिल सकती थी।
सुखबीर यादव बताते हैं कि यहां पर कई परियोजनाएं बजट के अभाव में पूर्ण नहीं हो सकी, जबकि इटावा ने सांसद व विधायक भी भाजपा सरकार को दिए थे, लेकिन भाजपा सरकार ने यहां पर काम कराना उचित नहीं समझा।
यह अस्पताल यहां पर बन जाता तो महिलाओं को काफी बड़ी सुविधाएं मिलती।
सुनील ठाकुर बताते हैं कि अस्पताल को बजट शासन द्वारा मिल जाता तो अब तक 5 वर्ष के अंदर चालू हो जाता, लेकिन सरकार बदले की भावना से सैफई को बजट में दिया, जबकि यहां पर लगभग एक दर्जन से अधिक जिले तथा मध्यवर्ती एमपी तक यहां पर मरीज आते हैं।
प्रदेश के दो मंत्री भी कर चुके दौरा
जिले के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही और चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना निर्माणाधीन स्थल का निरीक्षण कर चुके हैं। दोनों ही मंत्रियों ने जल्द बजट दिलाने का आश्वासन दिया था, लेकिन बजट नहीं मिल सका।
एमपी समेत कई जिलों के आते मरीज
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई में इटावा ही नहीं कानपुर देहात, औरैया, मैनपुरी, जालौन, फिरोजाबाद, कन्नौज, फर्रुखाबाद समेत कई जिलों के मरीज इलाज कराने आते हैं।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे बनने के बाद विवि का महत्व और बढ़ गया है। कई बार ऐसा भी हुआ, जब रास्ते में ही महिलाओं के प्रसव पीड़ा हुई तो उन्हें मेडिकल यूनिवर्सिटी लेकर आना पड़ा।
50 फीसदी काम हो चुका है पूरा
50 फीसदी काम पूरा हो चुका है। शेष कार्य बजट मिलने पर पूर्ण किया जाएगा, क्योंकि 2015 से लेकर अब तक 75 करोड़ रुपये ही शासन से मिले हैं।
अब अगर शासन द्वारा लगभग 100 करोड़ रुपये मिल जाते, तो एक साल के अंदर काम पूर्ण हो जाएगा। यहां के लोगों को सुविधाएं भी मिलने लगेंगी। परियोजना को सात वर्ष हो चुके हैं, अब लागत भी बढ़ेगी।
- एके सिंह, प्रोजेक्ट मैनेजर, निर्माण निगम