फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etawah News ›   Budget break at Tourist Complex

पर्यटक कांप्लेक्स पर बजट का ब्रेक

Mon, 24 Jan 2022 11:36 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 24 Jan 2022 11:36 PM IST
विज्ञापन
Budget break at Tourist Complex
सैफई। इटावा जिले के पर्यटन के नक्शे पर उभारने के लिए कई प्रोजेक्ट लाए गए। इसमें कई प्रोजेक्ट तो धरातल पर साकार हो गए तो कई प्रोजेक्ट धन के अभाव में अभी भी अधूरे पड़े हुए हैं।
विज्ञापन

इन्हीं प्रोजेक्ट में से एक है पर्यटन कांप्लेक्स का निर्माण। इस कांप्लेक्स के लिए 20 करोड़ रुपये जारी किए गए थे, जिससे उसका भवन बन गया है, लेकिन उसकी साज-सज्जा नहीं हो सकी है।
विज्ञापन

सरकार का प्रयास था कि इटावा टूरिस्ट सर्किट से जुड़ जाए, जिसमें आगरा पहुंचने वाले पर्यटक चंबल सफारी और उसके बाद लॉयन सफारी और रामसर साइट सरसई नावर झील तक पहुंचें।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसी के मद्देनजर पर्यटकों की सुविधा को देखते हुए एक पर्यटक कांप्लेक्स बनाया जाना था। इसके लिए सरकार ने 28 करोड़ 93 लाख रुपये के प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी थी।
बाद में अक्तूूबर 2016 में पुनरीक्षित आकलन पर 42 करोड़ 93 लाख रुपये का शासन को प्रस्ताव गया था, जिस पर शासन ने 20 करोड़ रुपये दे भी दिए थे।
इससे बिल्डिंग बनकर खड़ी हो गई, लेकिन उसके बाद से फिर इस कांप्लेक्स निर्माण के लिए धन नहीं मिल सका। अब यह पांच मंजिला इमारत दिखावा बनकर रह गई है।
छह से अधिक वर्ष हो चुके हैं जिसकी वजह से अब इसकी लागत भी बढ़ जाएगी। इस पांच मंजिला इमारत में 300 पर्यटकों के रुकने का इंतजाम किया जाना था। हर मंजिल पर 25-25 कमरे का इंतजाम किया गया था।
ये कमरे सभी सुविधाओं से लैस होते। पहले, दूसरे और तीसरी मंजिल पर बड़े-बड़े डोरमेट्री हॉल बनाने थे। जिसमें कम खर्चे में पर्यटक सुविधाओं का लाभ उठा सकते थे।
मल्टी लेवल पार्किंग का प्रोजेक्ट भी अधूरा
पर्यटन कांप्लेक्स की मंजूरी के बाद 2016 में ही 41 करोड़ 88 लाख रुपये की लागत से बनने वाले मल्टी लेवल पार्किंग कांप्लेक्स को भी मंजूरी दी गई थी। मल्टी लेवल पार्किंग को दिल्ली-मुंबई शहरों जैसा बनाया जाना था।
इसमें 600 गाड़ियां रुक सकतीं थीं। 2016 में तत्कालीन सरकार ने 16 करोड़ 75 लाख रुपये दे दिए थे। हालांकि, उसके बाद इसे भी फंड नहीं मिल सका। यह निर्माण भी अधूरा पड़ा हुआ है।
निर्माण निगम का कहना है कि छह वर्ष पुरानी परियोजना हो गई है। अब लागत भी बढ़ जाएगी, अगर बजट मिला, तो दोनों ही परियोजना लगभग तीन वर्ष में पूर्ण हो जाएगी।
जिम्मेदार बोले
2016 में ही शासन द्वारा दोनों ही परियोजना को मंजूरी दी गई थी। शासन से राशि मिली है, उसमें बिल्ंिडग बनकर तैयार हो गई। उसके बाद से अब तक शासन से बजट नहीं मिला है।

अब योजना छह वर्ष पुरानी परियोजना हो गई है, जिसके लिए अब लागत भी बढ़ जाएगी। अगर शासन द्वारा बजट मिल जाता है, तो तीन वर्ष में दोनों ही परियोजना पूर्ण हो जाएंगी।
- पंकज वर्मा, परियोजना प्रबंधक, राजकीय निर्माण निगम
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed