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Etawah News: पुरानी किताबों से नहीं चल रहा काम, नई के बढ़े दाम
Mon, 10 Apr 2023 12:47 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Mon, 10 Apr 2023 12:47 AM IST
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इटावा। अभिभावकों पर बच्चों की पढ़ाई का बोझ इस साल बढ़ गया है। कॉपी और किताबों के दाम 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। पाठयक्रम बदलने से पुरानी किताबों से काम नहीं चल रहा और दुकानदार फुटकर में किताबेंं न देकर पूरा सेट दे रहे हैं। इसमें स्कूलों से कमीशन भी बंधा है। उनका कहना है कि कागज महंगा होने से दामों में बढ़ोतरी हुई है।
नई शिक्षा नीति की वजह से कई कक्षाओं का पाठ्यक्रम बदल गया है। वहीं कुछ स्कूलों की ओर से प्रकाशक बदल देने की वजह से लोगों को मजबूरी में पूरी नई किताबों का सेट खरीदना पड़ रहा है। कक्षा एक और दो की किताबों के दाम 18 से 19 प्रतिशत तक बढ़े हैं।
इसी तरह कक्षा तीन में 23 प्रतिशत, कक्षा चार में 20 प्रतिशत, पांचवीं में 23 प्रतिशत छठवीं में 25 प्रतिशत तक किताबों के दाम बढ़े हैं। वहीं 15 रुपये में मिलने वाली कॉपी 20 रुपये तो 150 में मिलने वाला कंपनी का रजिस्टर 180 में मिल रहा है। शहर के दुकानदारों के अनुसार, निजी स्कूल अब ज्यादातर चुनिंदा दुकानदारों के पास से ही किताबें और कॉपी खरीदने के लिए कहते हैं।
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अभिभावकों की टूटी कमर
अभिभावक संघ के जिला उपाध्यक्ष डॉ. आशीष दीक्षित ने बताया कि किताबें महंगी होने से अभिभावकों की कमर टूट गई है। बच्चों को कॉपी-किताबें दिलाने में बजट बिगड़ गया है। इस संदर्भ में अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा गया था, लेकिन कोई संज्ञान नहीं लिया गया।
पुबिया टोला निवासी आरती ने बताया कि बच्चे छठीं और 10वीं कक्षा में हैं। दोनों बच्चों की किताबें रिश्तेदारों के बच्चों से लेने की सोची थी, लेकिन कई किताबें बदल गईं। ऐसे में नई किताबें खरीदनी पड़ रही हैं। दुकानदार पूरा सेट दे रहे हैं।
अजीत नगर के प्रदीप दोहरे ने बताया कि उनका बेटा कक्षा चार में है। पिछले साल 4800 रुपये की किताबें दिलाई थीं। कक्षा चार की किताबें छह हजार रुपये से ऊपर की हैं। कॉपियां भी स्कूल की ओर से बताई कंपनी की ही लेनी पड़ रही हैं।
नौरंगाबाद के अनिल वर्मा ने बताया कि उनकी बेटी इस साल 10 वीं में गई है। किताबाें के लगभग 25 प्रतिशत तक रेट बढ़ गए हैं। पुरानी किताबें नहीं चल रही हैं।
दुकानदार बोले
स्टेशनरी विक्रेता अमित अग्रवाल ने बताया कि कुछ पाठ्यक्रम बदला है। ऐसे में ज्यादातर अभिभावकों को हर कक्षा में कोई न कोई किताब नई लेनी पड़ रही है। कॉपी और किताबों के दाम में 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है।
स्टेशनरी विक्रेता कल्याण सिंह ने बताया कि इस बार कॉपी-किताबों के दाम बढ़ा दिए गए हैं। इससे अभिभावक परेशान हैं। कागज महंगा होने से भी फर्क पड़ा है।
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नई शिक्षा नीति की वजह से कई कक्षाओं का पाठ्यक्रम बदल गया है। वहीं कुछ स्कूलों की ओर से प्रकाशक बदल देने की वजह से लोगों को मजबूरी में पूरी नई किताबों का सेट खरीदना पड़ रहा है। कक्षा एक और दो की किताबों के दाम 18 से 19 प्रतिशत तक बढ़े हैं।
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इसी तरह कक्षा तीन में 23 प्रतिशत, कक्षा चार में 20 प्रतिशत, पांचवीं में 23 प्रतिशत छठवीं में 25 प्रतिशत तक किताबों के दाम बढ़े हैं। वहीं 15 रुपये में मिलने वाली कॉपी 20 रुपये तो 150 में मिलने वाला कंपनी का रजिस्टर 180 में मिल रहा है। शहर के दुकानदारों के अनुसार, निजी स्कूल अब ज्यादातर चुनिंदा दुकानदारों के पास से ही किताबें और कॉपी खरीदने के लिए कहते हैं।
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अभिभावकों की टूटी कमर
अभिभावक संघ के जिला उपाध्यक्ष डॉ. आशीष दीक्षित ने बताया कि किताबें महंगी होने से अभिभावकों की कमर टूट गई है। बच्चों को कॉपी-किताबें दिलाने में बजट बिगड़ गया है। इस संदर्भ में अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा गया था, लेकिन कोई संज्ञान नहीं लिया गया।
पुबिया टोला निवासी आरती ने बताया कि बच्चे छठीं और 10वीं कक्षा में हैं। दोनों बच्चों की किताबें रिश्तेदारों के बच्चों से लेने की सोची थी, लेकिन कई किताबें बदल गईं। ऐसे में नई किताबें खरीदनी पड़ रही हैं। दुकानदार पूरा सेट दे रहे हैं।
अजीत नगर के प्रदीप दोहरे ने बताया कि उनका बेटा कक्षा चार में है। पिछले साल 4800 रुपये की किताबें दिलाई थीं। कक्षा चार की किताबें छह हजार रुपये से ऊपर की हैं। कॉपियां भी स्कूल की ओर से बताई कंपनी की ही लेनी पड़ रही हैं।
नौरंगाबाद के अनिल वर्मा ने बताया कि उनकी बेटी इस साल 10 वीं में गई है। किताबाें के लगभग 25 प्रतिशत तक रेट बढ़ गए हैं। पुरानी किताबें नहीं चल रही हैं।
दुकानदार बोले
स्टेशनरी विक्रेता अमित अग्रवाल ने बताया कि कुछ पाठ्यक्रम बदला है। ऐसे में ज्यादातर अभिभावकों को हर कक्षा में कोई न कोई किताब नई लेनी पड़ रही है। कॉपी और किताबों के दाम में 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है।
स्टेशनरी विक्रेता कल्याण सिंह ने बताया कि इस बार कॉपी-किताबों के दाम बढ़ा दिए गए हैं। इससे अभिभावक परेशान हैं। कागज महंगा होने से भी फर्क पड़ा है।