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ग्लूकोमा की जानकारी से अंधे होने से बच सकते हैं
Sat, 16 Mar 2019 10:45 PM IST
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etawah
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Published by: gaurav gaurav
Updated Sat, 16 Mar 2019 10:45 PM IST
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ग्लूकोमा वाक में भाग लेते विभागाध्यक्ष नेत्र रोग डा. रविरंजन एवं अन्य।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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उप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के नेत्र रोग विभाग ने शनिवार को विश्व ग्लूकोमा सप्ताह के अवसर पर विशेष जनजागरण रैली का आयोजन किया। जनजागरण रैली की शुरूआत विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन से शुरू हुई। रैली सैफई गांव होते हुए ओपीडी के पास खत्म हुई। रैली की शुरुआत विभागाध्यक्ष नेत्र रोग डा. रविरंजन ने की।
विभागाध्यक्ष नेत्र रोग डा. रविरंजन ने बताया कि ग्लूकोमा के बारे में जागरूक करके इस बीमारी से होने वाले अंधेपन को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि ग्लूकोमा के चलते नजर के नुकसान का कोई इलाज नहीं है। अगर पता न चले तो यह रोग धीरे-धीरे बढ़ता रहता है। रोग के ज्यादा बढ़ने पर अंधेपन की भी नौबत आ सकती है।
नेत्र रोग विभाग से ग्लूकोमा विशेषज्ञ डा. रीना शर्मा तथा फैकेल्टी डॉ. ब्रजेश सिंह ने बताया कि ग्लूकोमा दो प्रकार का होता है। ओपेन एंगल ग्लूकोमा तथा क्लोज्ड एंगल ग्लूकोमा। ओपन एंगल ग्लूकोमा में आंख के तरल का प्रेशर जिसे इंट्राकुलर दबाव भी कहते हैं। समय पर इलाज न होने पर यह अंधेपन का कारण भी बन सकता है।
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वहीं क्लोज्ड एंगल ग्लूकोमा में एकाएक यह तरल का प्रवाह रूक जाता है। डा. रीना शर्मा ने यह भी बताया कि यदि इस रोग के प्रति लापरवाही बरती जाए, तो आंख की अंदरूनी नसें धीरे-धीरे पूरी तरह बंद हो जाती हैं।
इस विशेष जनजागरण रैली में नेत्र रोग विभाग से डा. रीना शर्मा, डा. ब्रजेश सिंह विभाग के सीनियर एवं जूनियर रेजिडेंट डा. इफ्सा, डा. अहमद, डा. गौरव, डा. अनुज, डा. दुर्गेश, आप्ट्रोमेट्री विभाग से आदित्य त्रिपाठी तथा विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी अनिल कुमार पांडेय आदि ने भाग लिया।
रैली में विश्वविद्यालय के एमबीबीएस स्टूडेंट्स, पैरामेडिकल स्टूडेंट्स के अतिरिक्त फैकेल्टी मेंबरस, सीनियर एवं जूनियर रेजिडेंट ने ग्रामीणों को पर्चे बांटकर एवं ग्लूकोमा पर जानकारी देकर जागरूक किया।
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विभागाध्यक्ष नेत्र रोग डा. रविरंजन ने बताया कि ग्लूकोमा के बारे में जागरूक करके इस बीमारी से होने वाले अंधेपन को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि ग्लूकोमा के चलते नजर के नुकसान का कोई इलाज नहीं है। अगर पता न चले तो यह रोग धीरे-धीरे बढ़ता रहता है। रोग के ज्यादा बढ़ने पर अंधेपन की भी नौबत आ सकती है।
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नेत्र रोग विभाग से ग्लूकोमा विशेषज्ञ डा. रीना शर्मा तथा फैकेल्टी डॉ. ब्रजेश सिंह ने बताया कि ग्लूकोमा दो प्रकार का होता है। ओपेन एंगल ग्लूकोमा तथा क्लोज्ड एंगल ग्लूकोमा। ओपन एंगल ग्लूकोमा में आंख के तरल का प्रेशर जिसे इंट्राकुलर दबाव भी कहते हैं। समय पर इलाज न होने पर यह अंधेपन का कारण भी बन सकता है।
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वहीं क्लोज्ड एंगल ग्लूकोमा में एकाएक यह तरल का प्रवाह रूक जाता है। डा. रीना शर्मा ने यह भी बताया कि यदि इस रोग के प्रति लापरवाही बरती जाए, तो आंख की अंदरूनी नसें धीरे-धीरे पूरी तरह बंद हो जाती हैं।
इस विशेष जनजागरण रैली में नेत्र रोग विभाग से डा. रीना शर्मा, डा. ब्रजेश सिंह विभाग के सीनियर एवं जूनियर रेजिडेंट डा. इफ्सा, डा. अहमद, डा. गौरव, डा. अनुज, डा. दुर्गेश, आप्ट्रोमेट्री विभाग से आदित्य त्रिपाठी तथा विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी अनिल कुमार पांडेय आदि ने भाग लिया।
रैली में विश्वविद्यालय के एमबीबीएस स्टूडेंट्स, पैरामेडिकल स्टूडेंट्स के अतिरिक्त फैकेल्टी मेंबरस, सीनियर एवं जूनियर रेजिडेंट ने ग्रामीणों को पर्चे बांटकर एवं ग्लूकोमा पर जानकारी देकर जागरूक किया।